ePaper

14 सेकेंड में धराशायी हुआ ऑस्ट्रेलिया का पहला घरेलू रॉकेट, देखें चौंकाने वाला वीडियो

Updated at : 31 Jul 2025 5:07 PM (IST)
विज्ञापन
Australian Rocket Crashes

ऑस्ट्रेलियाई रॉकेट दुर्घटनाएं

Australian Rocket Crashes: गिल्मर स्पेस टेक्नोलॉजीज का पहला ऑस्ट्रेलियाई निर्मित रॉकेट Eris लॉन्च के 14 सेकेंड बाद क्रैश हो गया. कंपनी ने फिर भी इसे सफल परीक्षण बताया.

विज्ञापन

Australian Rocket Crashes: ऑस्ट्रेलिया की पहली घरेलू रूप से डिजाइन और निर्मित ऑर्बिटल रॉकेट “Eris” बुधवार को लॉन्च के महज 14 सेकेंड बाद ही क्रैश हो गया. यह लॉन्च क्वींसलैंड राज्य के बोवेन कस्बे के पास बने एक स्पेसपोर्ट से किया गया था. हालांकि रॉकेट ने लॉन्च टावर को सफलतापूर्वक पार किया, लेकिन कुछ ही क्षणों में वह हवा में स्थिर हो गया और फिर नीचे गिरकर गायब हो गया. घटना का वीडियो सामने आया है जिसमें रॉकेट को ऊंचाई की ओर बढ़ते और फिर धुएं के गुबार के साथ नीचे गिरते देखा जा सकता है. गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई भी हताहत नहीं हुआ है.

Australian Rocket Crashes: कंपनी ने फ्लाइट को “सफल परीक्षण” बताया

रॉकेट लॉन्च करने वाली कंपनी Gilmour Space Technologies ने इस फ्लाइट को एक “सफल परीक्षण” बताया है. कंपनी के मुताबिक, चारों हाइब्रिड इंजन सफलतापूर्वक प्रज्वलित हुए और 23 सेकेंड तक इंजन का बर्न टाइम दर्ज किया गया हालांकि रॉकेट की कुल उड़ान अवधि सिर्फ 14 सेकेंड रही. Gilmour Space के सीईओ एडम गिलमोर ने लिंक्डइन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बेशक मैं चाहता था कि उड़ान थोड़ी लंबी होती, लेकिन मैं इस परिणाम से संतुष्ट हूं कि रॉकेट लॉन्चपैड से ऊपर उठ सका.

यह उड़ान कई बार स्थगित हो चुकी थी. मई और जुलाई की शुरुआत में तकनीकी खामियों और खराब मौसम के कारण लॉन्च को टालना पड़ा था. इस बार भी रॉकेट पूरी तरह से कक्षा में नहीं पहुंच पाया, लेकिन कंपनी ने इसे पहली कोशिश में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना है.

पढ़ें: बच्चा पैदा करो, सरकार देगी मोटा माल! हर साल खाते में आएंगे हजारों रुपये, घर बैठे मिलेगा फायदा

Australian Rocket Crashes in Hindi: लॉन्च साइट की इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा

Gilmour Space Technologies को इस रॉकेट के विकास के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से 5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की ग्रांट भी मिली है. इससे पहले 2023 में कंपनी को 52 मिलियन डॉलर की सरकारी सहायता भी दी गई थी, ताकि देश में स्पेस टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा मिल सके. फिलहाल लॉन्च साइट की इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, और कंपनी इसे अपने भविष्य के अभियानों के लिए सकारात्मक संकेत मान रही है.

इसे भी पढ़ें: 280000 मौतों वाली वो सुनामी, भारत में भी छीन ली थीं 16000 जिंदगियां, जब हिंद महासागर बना था काल

विज्ञापन
Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola