वाशिंगटन : लोगों के बीच हिंसा, संक्रामक रोगों और जलवायु परिवर्तन ने करीब 4,000 साल पहले सिंधु घाटी या हड़प्पा सभ्यता का खात्मा करने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी.
यह दावा एक नए अध्ययन में किया गया है.
शोध पत्र की प्रमुख लेखक शुग ने कहा, ‘‘सिंधु घाटी सभ्यता का अंत और मानव आबादी का पुन:संगठित होना लंबे समय से विवादित रहा है.’’ यह शोध पत्र प्लॉस वन पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.
यूनिवर्सिटी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि शुग और अनुसंधानकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने हड़प्पा के तीन कब्रिस्तानों से प्राप्त मानव कंकाल अवशेषों में अभिघात :ट्रॉमा: और संक्रामक बीमारी के सबूत की जांच की.
हड़प्पा सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े शहरों में से एक था.
उन्होंने कहा कि उस समय खोपड़ी में चोट जैसे निशान हिंसा की ओर इशारा करते हैं और यह तथ्य काफी महत्वपूर्ण है. शुग ने कहा कि प्रागैतिहासिक दक्षिण एशियाई स्थलों पर आम तौर पर हिंसा के सबूत काफी दुर्लभ हैं.
शुग ने कहा कि अध्ययन के परिणाम काफी झकझोर देने वाले हैं क्योंकि उस समय हिंसा और बीमारी की उच्च दर के चलते मानव आबादी शहरों को छोड़ रही थी. हालांकि, एक और रोचक परिणाम यह है कि शहर के औपचारिक कब्रिस्तानों से निकाले गए लोगों में शवों के परीक्षण में हिंसा और बीमारी की सर्वाधिक दर पाई गई थी.
शुग ने कहा कि सिंधु सभ्यता के परिणाम आधुनिक समाज पर भी लागू हैं.

