फ्लैग-अपेक्षित रॉ कोल की ढुलाई नहीं होने से बिगड़ रही है गिद्दी वाशरी की स्थिति

Published at :18 Jul 2014 5:24 PM (IST)
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फ्लैग-अपेक्षित रॉ कोल की ढुलाई नहीं होने से बिगड़ रही है गिद्दी वाशरी की स्थिति

हेडिंग-16 करोड़ का हो रहा है नुकसान नन कोकिंग कोल होने के बाद से लगातार घाटे में ही रही है गिद्दी वाशरी वर्ष 2011-12 मेें वाशरी सलरी बिक्री कर मुनाफा कमायी थी फोटो. 17गिद्दी3-गिद्दी वाशरी परियोजनागिद्दी(हजारीबाग). गिद्दी वाशरी में रॉ कोल की ढुलाई अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने से इसकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है. […]

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हेडिंग-16 करोड़ का हो रहा है नुकसान नन कोकिंग कोल होने के बाद से लगातार घाटे में ही रही है गिद्दी वाशरी वर्ष 2011-12 मेें वाशरी सलरी बिक्री कर मुनाफा कमायी थी फोटो. 17गिद्दी3-गिद्दी वाशरी परियोजनागिद्दी(हजारीबाग). गिद्दी वाशरी में रॉ कोल की ढुलाई अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने से इसकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है. इसकी बेहतरी के लिए सीसीएल प्रबंधन ने कई योजनाएं बना रखी है, लेकिन धरातल पर लागू नहीं हो रहा है. इससे मजदूरों में मायूसी है और उनके काम पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. गिद्दी वाशरी लगभग 16 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान में चल रही है. बहरहाल वाशरी की जो स्थिति बनी हुई है, उसमें सुधार की गुंजाइश कम दिख रही है. जानकारी के अनुसार 70 के दशक में गिद्दी वाशरी परियोजना शुरू की गयी थी. गिद्दी वाशरी में लगभग तीन दशक तक कोकिंग कोल का उत्पादन होता रहा. इसकी स्थिति बिगड़ने पर सीसीएल प्रबंधन ने वर्ष 1998 में गिद्दी वाशरी को कोकिंग कोल से नन कोकिंग कोल में परिवर्तित कर दिया. वर्ष 2011-12 छोड़कर गिद्दी वाशरी लगातार करोड़ों रुपये के नुकसान में चल रही है. गिद्दी वाशरी में उरीमारी से कोयले की ढुलाई यहां वर्षों से हो रही है. कुछ माह से गिद्दी सी से भी रॉ कोल की ढुलाई हो रही है. उरीमारी से जो कोयला आता है. उसमें पत्थर व मिट्टी की मात्रा भी रहती है. पत्थरों के कारण गिद्दी वाशरी का बेल्ट व पार्ट पुरजे अक्सर टूटते रहते है. इससे उत्पादन पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है. गिद्दी वाशरी में उरीमारी से कोयले के साथ जो पत्थर आया है, वह यहां लाखों मीट्रिक टन में पड़ा हुआ है. गिद्दी वाशरी में लगभग तीन-हजार रॉ कोल की जरूरत है, लेकिन औसतन वाशरी को एक हजार मीट्रिक टन कोयला ही मिलता है. पिछले तीन-चार दिनों से छह-सात मीट्रिक टन कोयला मिल रहा है. इससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है. उरीमारी से कोयले के साथ मिट्टी व पत्थर पर रोक लगाने के लिए मजदूर नेताओं ने कई बार आवाज उठायी और सीसीएल प्रबंधन से इसकी शिकायत की, पर आज तक इस पर कोई असर नहीं पड़ा है. कोयले में पत्थर व मिट्टी रहने से गिद्दी वाशरी को सीधा नुकसान और उरीमारी को फायदा पहुंच रहा है. गिद्दी वाशरी एक समय लगभग 44 करोड़ रुपये नुकसान में चल रही थी, लेकिन बीते वर्ष 2011-12 में सलरी बेचकर किसी तरह वाशरी लाखों रुपये मुनाफे में पहुंची थी. पर अब इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली जा रही है. सुधार के लिए उठाये जा रहे है कदम-महाप्रबंधक रांची के महाप्रबंधक (वाशरी) श्री नियोगी ने कहा कि पूरे सीसीएल में गिद्दी वाशरी ही नुकसान में चल रही है. इसकी स्थिति में सुधार करने के लिए कई कदम उठाये जा रहे हैं. वाशरी को नया पेलोडर भी दिया जायेगा और पार्ट पुरजे भी उपलब्ध कराये जा रहे है. उन्होंने कहा कि रॉ कोल की आपूर्ति समुचित मात्रा में होगी, तभी इसकी स्थिति में सुधार आ सकती है.

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