दो साल में शुरू होगा ब्रिक्स बैंक,भारत के हाथ में होगी अध्यक्षता

Published at :17 Jul 2014 7:45 AM (IST)
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दो साल में शुरू होगा ब्रिक्स बैंक,भारत के हाथ में होगी अध्यक्षता

फोर्तालेजा (ब्राजील) : ब्रिक्स समूह में शामिल पांच प्रमुख विकासशील देशों द्वारा स्थापित किये जा रहे सौ अरब डॉलर की पूंजीवाला न्यू डेवलपमेंट बैंक (नया विकास बैंक) दो साल में शुरू हो जायेगा. बैंक का मुख्यालय चीन के शांघाई शहर में होगा. इसकी अध्यक्षता पहले छह वर्ष भारत के हाथ में होगी. इसके बाद ब्राजील […]

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फोर्तालेजा (ब्राजील) : ब्रिक्स समूह में शामिल पांच प्रमुख विकासशील देशों द्वारा स्थापित किये जा रहे सौ अरब डॉलर की पूंजीवाला न्यू डेवलपमेंट बैंक (नया विकास बैंक) दो साल में शुरू हो जायेगा. बैंक का मुख्यालय चीन के शांघाई शहर में होगा. इसकी अध्यक्षता पहले छह वर्ष भारत के हाथ में होगी. इसके बाद ब्राजील व रूस पांच-पांच साल के लिए अध्यक्ष रहेंगे.

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स देशों) के बीच गहन वार्ता के बाद यह सहमति बनी है. छठे ब्रिक्स सम्मेलन की समाप्ति पर इस नये बैंक और सौ अरब डॉलर की आपात आरक्षित विदेशी विनियम व्यवस्था (सीआरए) की घोषणा की गयी, जिससे सदस्य देशों को अल्पकालिक नकदी दबाव से निबटने में मदद मिलेगी.

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत को छोड़कर सभी सदस्य देशों की संसदों से इसकी अनुमति प्राप्त करने के लिए छह महीने की अवधि रखी गयी है. भारत के लिए इस पर संसद के अनुमोदन की जरूरत नहीं है. पश्चिमी देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक केंद्रित वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था में बड़ी भूमिका की मांग को लेकर 2009 में एकत्र हुए ब्रिक्स देशों की पहली बड़ी उपलब्धि है.

– फोर्तालेजा घोषणा पत्र की मुख्य बातें

* ब्रिक्स के उभरते बाजारों के समक्ष बुनियादी ढांचागत विकास परियोजनाओं के लिए धन की तंगी को दूर करेंगे.

* स्वस्थ्य विकास और आर्थिक वृद्धि के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारोबार पर कर लगाने का मुद्दा भी शामिल.

* कर प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग जारी रखेंगे सभी सदस्य राष्ट्र. कर संबंधी मामलों में सूचनाओं का अदान-प्रदान.

* व्यापार अवसरों को बढ़ाने के लिए निर्यात ऋण व गारंटी एजेंसियों के बीच सहयोग को लेकर समझौता

– रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के साथ रक्षा व ऊर्जा क्षेत्रों में विशेष रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने की पैरवी की है. उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आगामी दिसंबर में होने वाली उनकी भारत यात्रा के दौरान कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया. दोनों नेताओं ने यहां ब्रिक्स शिखर बैठक से इतर 40 मिनट तक मुलाकात की. साल 2001 में मॉस्को में पुतिन से मुलाकात करने वाले मोदी ने कहा कि रूस के साथ हमारा रिश्ता हर कसौटी पर परखा हुआ है.

प्रधानमंत्री ने हिंदी में बोलते हुए कहा कि भारत का बच्चा भी जानता है कि रूस हमारा अच्छा दोस्त है. इससे किसे इनकार है कि संकट के समय रूस हमेशा भारत के साथ रहा है. आजादी के पहले से शुरू हुआ यह संबंध, आगे और प्रगाढ़ होगा. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक मोदी ने भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने के लिए राष्ट्रपति पुतिन के निर्णायक नेतृत्व की प्रशंसा की. मोदी ने दोनों देशों के बीच उदार वीजा प्रणाली की चर्चा की.

* आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने का नया तरीका

ब्रिक्स सम्मेल के फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नये विश्व बैंक का विचार दो साल पहले दिल्ली सम्मेलन में आया, जिसने फोर्तालेजा में वास्तविक स्वरूप ग्रहण किया. इससे ब्रिक्स देशों को फायदा होगा और यह विकासशील देश के तौर पर हमारे अपने अनुभवों से जुड़ा होगा. ब्रिक्स आपात आरक्षित विदेशी-विनिमय कोष ने ब्रिक्स देशों को अपनी आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने का नया तरीका दिया है.

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