कैरियर की चाह में बहुत कुछ खो देती हैं महिलाएं: इंदिरा नूयी

Published at :03 Jul 2014 8:14 PM (IST)
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कैरियर की चाह में बहुत कुछ खो देती हैं महिलाएं: इंदिरा नूयी

-इंटरनेट डेस्क- न्यूयार्कः पेप्सिको कंपनी की सीईओ इंदिरा नूयी का कहना है कि महिलाएं जीवन में सबकुछ नहीं पा सकती है. उनके अनुसार हम कैरियर बनाने की चाह में बहुत कुछ खो देते हैं, बहुत कुछ से वंचित रह जाते हैं. अपने अनुभव के बारे में इंदिरा कहती है कि हम इतने बडे कंपनी की […]

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-इंटरनेट डेस्क-

न्यूयार्कः पेप्सिको कंपनी की सीईओ इंदिरा नूयी का कहना है कि महिलाएं जीवन में सबकुछ नहीं पा सकती है. उनके अनुसार हम कैरियर बनाने की चाह में बहुत कुछ खो देते हैं, बहुत कुछ से वंचित रह जाते हैं. अपने अनुभव के बारे में इंदिरा कहती है कि हम इतने बडे कंपनी की सीईओ हैं लेकिन इसके बावजूद हम परिवार व बच्चों के साथ समय नहीं दे पाये. और इसका हमें काफी दुःख है.

नूयी ने कहा कि हम ऐसा दिखाते हैं कि हम परिवार व बच्चों के साथ हैं, जीवन में हमे सबकुछ मिल रहा है पर यह वास्तविकता नहीं है. नूयी कहती है कि हमारी शादी हुए 34 वर्ष हो गये. हमारे दो बेटियां हैं. नूयी ने कहा कि हर दिन हमें यह निर्णय लेना होता है कि हम अच्छी मां है या फिर अच्छी पत्नी? हमलोग यह आशा करते हैं कि हम अच्छे पैरेंट्स बनें पर जब यह बात हम अपनी बेटी से पूछते हैं तो वे कहते हैं कि आप अच्छी मॉम नहीं हैं. एक घटना का जिक्र करते हुए नूयी कहती है कि मेरी बेटी अमेरिका में कैथोलिक स्कूल में पढ़ती है. वहां हर बुधवार की सुबह बच्चों की मां को क्लास कॉफी के लिए जाना होता है.

लेकिन मैं कभी भी उस क्लास कॉफी को अटेंड नहीं कर पाती हूं. कभी-कभी स्कूल की मीटिंग में भी मैं नहीं जा पाती हूं. नूयी कहती है कि जब बच्चे छोटे होते हैं उस वक्त कैरियर बनाने का वक्त होता है. जब बच्चे टीनेजर होते हैं तो उस वक्त उसे अपने मां की काफी जरुरत होती है. नूयी मजकिया लिहाज में कहती है कि उस वक्त हसबैंड भी टीनेजर्स होते हैं और उनको भी हमारी काफी जरुरत होती है पर हम उन्हें भी टाइम नहीं दे पाते हैं. जब हम और अधिक उम्र के होते हैं उस वक्त हमारे पैरेंट्स बूढे हो जाते हैं और उनको हमारी जरुरत होती है. नूयी कहती है कि एक मां होना फुल टाइम जॉब है पर एक कंपनी का सीईओ होना तीन फुल टाइम जॉब के बराबर है. इस तरह से हर तरफ मैनेज करना काफी मुश्किल काम है. नूयी कहती है कि इसमें जो एक सबसे पीडादायक चीज है वह है पति महोदय. हमारे पति हमेशा कहते हैं कि तुम हमेशा पेप्सिको कंपनी, पेप्सिको कंपनी, पेप्सिको कंपनी करती रहती हो. इसके बाद दो बच्चे, फिर तुम्हारी मां और तुम्हारे लिस्ट में हम सबसे नीचे हैं. इसपर मुझे कहना पडता है कि कम से कम आप लिस्ट में तो हैं.

पेप्सिको कंपनी की सीईओ जो भारत से निकलकर अमेरिका में इतनी बडी कंपनी की सीईओ हैं उनका यह बयान कि कैरियर की चाह में हम बहुत कुछ खो देते हैं, भ्रामक प्रतीत होता है. उनका यह बयान आज के युवा पीढी के लिए हतोत्साहित करने वाला हो सकता है. जबकि आज लाखों महिलाएं अपने घरों से दूर, अपने पति, बच्चों से दूर रहकर अपना कैरियर बनाने में लगी हुई है ऐसे में महिलाओं की आइकॉन माने जाने वाली नूयी का बयान निस्संदेह प्रेरणा देने के बजाय उसे हतोत्साहित करेगा.

इधर फेसबुक की सीओओ शेरिल सैंडबर्ग, जो बुधवार को भारत आयी, यह बताते चल रही हैं कि कैसे कामकाजी व शादीशुदा महिलाएं अपने कैरियर को और बेहतर बना सकती है.
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