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सारंडा अभ्यारण्य का जोरदार विरोध, ग्रामीणों ने मंत्रियों से कहा- अधिकार की गारंटी नहीं, तो तीर चलेगा

1 Oct, 2025 11:03 am
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Saranda News Group of Ministers in West Singhbhum

सारंडा की जमीनी हकीकत जानने पहुंचे झारखंड के मंत्री. फोटो : प्रभात खबर

Saranda News: वर्ष 2011 की जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार 50 हजार की आबादी सारंडा जंगल में रहती है. वर्तमान में यह आबादी 75 हजार से एक लाख तक होने की उम्मीद है. सरकार की चिंता है कि इस आबादी को विस्थापन से कैसे बचाया जाये. वन्य अभयारण्य बनाये जाने की प्रक्रिया में इस बड़ी आबादी के बेदखल होने की आशंका है.

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Saranda News: सारंडा जंगल को वन्य अभयारण्य बनाने के प्रस्ताव पर स्थानीय लोगों की राय लेने के लिए झारखंड सरकार के मंत्रियों की टीम ने मंगलवार को छोटानागरा मचानगुटू मैदान में आमसभा की. मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव का विरोध किया. ग्रामीणों ने कहा कि हमारा जीवन सारंडा जंगल पर निर्भर है. अगर इसे वन्य अभयारण्य घोषित किया, तो पाबंदियां लगेंगी. इनसे हमारी आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी. जानवरों की चिंता हो रही है, लेकिन हमारी चिंता नहीं कर रहे हैं. आदिवासियों का कहना था कि हम हैं, तो जंगल बचा है. इसके बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार स्थानीय लोगों की राय और हित में ही निर्णय लेगी.

राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में पहुंची मंत्रियों की टीम

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में मंत्रियों की टीम सारंडा पहुंची थी. इस टीम में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा शामिल थे. टीम ने क्षेत्र के मानकी, मुंडा और ग्रामीणों की राय जानी. सभा में हजारों ग्रामीण, पंचायत प्रतिनिधि, मुंडा-मानकी, सामाजिक व राजनीतिक संगठन और कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए. मंत्रियों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की. उनसे अद्यतन जानकारी मांगी गयी. अधिकारियों के साथ सारंडा को वन्य क्षेत्र घोषित किये जाने की पूरी प्रक्रिया पर चर्चा हुई. जंगल क्षेत्र में माइनिंग और पुलिस कैंप से संबंधित जानकारी ली गयी.

हेलीकॉप्टर से सारंडा पहुंचा झारखंड के 4 मंत्री- राधाकृष्ण किशोर, चमरा लिंडा, दीपका पांडेय सिंह और संजय कुमार यादव. फोटो : प्रभात खबर

Saranda News: लगभग एक लाख की आबादी है जंगल में

अधिकारियों ने बताया कि 2011 की जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार 50 हजार की आबादी सारंडा जंगल में रहती है. वर्तमान में यह आबादी 75 हजार से एक लाख तक होने की उम्मीद है. सरकार की चिंता है कि इस आबादी को विस्थापन से कैसे बचाया जाये. वन्य अभयारण्य बनाये जाने की प्रक्रिया में इस बड़ी आबादी के बेदखल होने की आशंका है.

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अधिकार की गारंटी नहीं हुई, तो तीर चलेगा – ग्रामीण

आमसभा में ग्रामीण परंपरागत अधिकार लेकर पहुंचे थे. कुछ लोग कुदाल और तीर-धनुष के साथ पहुंचे थे. इनका कहना था कि हमारा अधिकार सुरक्षित रहे. अधिकार की गारंटी नहीं हुई, तो तीर चलेगा. ग्रामीण वन्य विभाग के अधिकारियों से खासे नाराज थे. ग्रामीणों का कहना था कि यहां कभी ग्रामसभा नहीं हुई. वन्य अभयारण्य बनाने की बात कहां से आ गयी. ग्रामीणों ने कहा कि डीएमएफटी फंड से पैसे खर्च हो रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में बेड नहीं हैं. पोंगा नदी पर अब तक पुल नहीं है. आवागमन में परेशानी हो रही है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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