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प्रतिदिन के आनंद भरे पलों पर गौर करें

Updated at : 14 Jul 2016 12:05 AM (IST)
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प्रतिदिन के आनंद भरे पलों पर गौर करें

कृतज्ञता तथा समझदारी की तलाश दुखों से उबरने की कुंजी है शेरिल सैंडबर्ग छात्रों के असफल होने के बाद वैसे शिक्षक, जिन्होंने यह समझा कि वे बेहतर कर सकते थे, अपने तरीके सुधारे और अगले बैचों के नतीजे अच्छे हुए. कॉलेजों के तैराकों ने, जो अच्छा प्रदर्शन न कर सके, किंतु जिन्हें यह यकीन था […]

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कृतज्ञता तथा समझदारी की तलाश दुखों से उबरने की कुंजी है

शेरिल सैंडबर्ग

छात्रों के असफल होने के बाद वैसे शिक्षक, जिन्होंने यह समझा कि वे बेहतर कर सकते थे, अपने तरीके सुधारे और अगले बैचों के नतीजे अच्छे हुए. कॉलेजों के तैराकों ने, जो अच्छा प्रदर्शन न कर सके, किंतु जिन्हें यह यकीन था कि वे और तेज तैर सकते हैं, बाद में इसे कर दिखाया. विफलताओं को खुद पर न लेना हमें उबरने में- और आगे प्रगति करने में- मदद पहुंचाता है. आज पढ़िए प्रेरक भाषण की 11वीं कड़ी.

धन्यवाद, मारी और फैकल्टी के आप सम्मानित सदस्यों, गौरवान्वित माता-पितागण, समर्पित मित्रों, तथा छात्रों के शरमाते भाई-बहनों. आप सबको बधाई… खासकर बर्कले की 2016 की उत्कृष्ट ग्रेजुएटिंग कक्षा को!

आज इस अवसर पर उस बर्कले में मौजूद होना एक सौभाग्य की बात है, जिसने कितने सारे नोबेल तथा ट्युरिंग पुरस्कार विजेताओं, अंतरिक्ष यात्रियों, कांग्रेस सदस्यों, ओलिंपिक स्वर्णपदक विजेता महिलाओं तथा पुरुषों को जन्म दिया! बर्कले हमेशा ही वक्त से आगे रहा है. 1960 के दशक में आपने फ्री स्पीच मूवमेंट का नेतृत्व किया. उन दिनों लोग कहा करते थे कि लंबे-लंबे बालों वाले लड़कों और लड़कियों में हम कैसे फर्क करें? अब हमें इसका उत्तर पता है, जो मैनबन है.

पहले बर्कले ने अपने द्वार पूरी जनसंख्या के लिए खोल दिये थे. 1973 में जब यह कैंपस खुला, तो इसकी कक्षा में 167 पुरुष तथा 222 महिलाएं थीं, जबकि मैं जिस संस्थान से पढ़ी, वह इसके नब्बे वर्षों बाद कहीं जाकर एक महिला को एक डिग्री दे पाया.

अवसर की तलाश में बर्कले आयी महिलाओं में एक रोजालिंड नस थीं. रोज ब्रुकलिन बोर्डिंग हाउस में रहती थीं और वहां के फर्श की सफाई करती हुई बड़ी हुईं. उनके माता-पिता ने उन्हें हाइस्कूल से हटा लिया, ताकि वे परिवार की सहायता कर सकें, किंतु रोज के शिक्षकों में से एक ने उनके माता-पिता पर दबाव डाला कि वे उन्हें वापस स्कूल में डालें- और 1937 में वहां बैठ कर, जहां आज आप बैठे हैं, उन्होंने एक बर्कले डिग्री ग्रहण की. रोज मेरी दादी थीं.

वे मेरे लिए प्रेरणा की बहुत बड़ी स्रोत बनी रहीं और मैं बर्कले के प्रति अत्यंत कृतज्ञ हूं कि उसने उनकी संभावना पहचानी. मैं एक पल का समय लेकर आज यहां बैठे उन लोगों को विशेष रूप से बधाई देती हूं, जो एक कॉलेज से ग्रेजुएट होनेवाले अपने परिवार की पहली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह अत्यंत उल्लेखनीय उपलब्धि है.आज जश्न का दिन है. उस कठिन परिश्रम का जश्न मनाने का दिन, जिसने आज आपको यहां पहुंचाया.

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