समय, गति और पाठकों की पसंद पर सवार है वेब पत्रकारिता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Aug 2019 1:47 AM (IST)
विज्ञापन

जयदीप कर्णिकसंपादक,अमर उजाला डॉट कॉम दुनियाभर में पत्रकारिता की शुरुआत और यात्रा किसी भी कारण और स्वरूप में हुई हो, मूल कारण एक ही रहा है- संप्रेषण. भीमबेटका की गुफाओं से लेकर आज के ट्विटर और फेसबुक तक मनुष्य की मूल भावना है अभिव्यक्ति. उसी अभिव्यक्ति की उत्कट अभिलाषा का व्यवस्थित स्वरूप है पत्रकारिता. यही […]
विज्ञापन
जयदीप कर्णिक
संपादक,अमर उजाला डॉट कॉम
दुनियाभर में पत्रकारिता की शुरुआत और यात्रा किसी भी कारण और स्वरूप में हुई हो, मूल कारण एक ही रहा है- संप्रेषण. भीमबेटका की गुफाओं से लेकर आज के ट्विटर और फेसबुक तक मनुष्य की मूल भावना है अभिव्यक्ति. उसी अभिव्यक्ति की उत्कट अभिलाषा का व्यवस्थित स्वरूप है पत्रकारिता.
यही जनसंचार का प्रमुख माध्यम भी है. ये अभिव्यक्ति का संस्थागत स्वरूप है. ट्रेडल की छपाई से लेकर आज की डिजिटल पत्रकारिता तक इसने लंबा सफर तय किया है.
आभासी दुनिया से यथार्थ की पड़ताल करनेवाली वेब पत्रकारिता का सफर भारत में दो दशक से ज्यादा पुराना हो चला है. इंटरनेट के जाल से समाज की ज्वलंत घटनाओं पर नजर रखने और उसका विश्लेषण करनेवाली यह पत्रकारिता सूचनाओं, समाचारों और विचारों के प्रसार का सबसे तेज और सबसे बड़ा माध्यम बन गयी है.
डिजिटल पत्रकारिता में फोन एक औजार है और सोशल मीडिया एक माध्यम. यह माध्यम अपनी पैरवी खुद करता है. यह औजार समाज के हर वर्ग, तबके और जन-जन के पास है.
यह सवाल भी उठाता है और जवाब भी तलाशता है. मुद्दे उठाता भी है और उछालता भी है. इसका स्वरूप इतना इतना बदल गया है कि इसका छोर पाना ही मुश्किल हो चला है. अस्थिरताओं के बीच एक मंथरता है, जिसमें समाज स्वयं ही स्वयं पर नजर रखे हुए है. खुद ही मुद्दा है और खुद ही समाधान. वीडियो, ऑडियो और टेक्स्ट, सब एक साथ, एक जगह, तेजी से.
यूरोप और पश्चिमी दुनिया की तुलना में बहुआयामी हो रही वेब पत्रकारिता भारत के संदर्भ में अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है. यहां हर कोई खुद को पत्रकार समझने और बताने पर आमादा. ऐसे में भारत में वेब पत्रकारिता की चुनौतियां अधिक गंभीर हो जाती हैं. ये चुनौतियां समाज, राजनीति, सत्ता, प्रशासन और व्यवस्था के सामने भी आयी हैं.
मोबाइल की छोटी सी स्क्रीन में कैद और क्षण भर में एक दूसरे से कनेक्ट होती दुनिया जिस गति से एक दूसरे तक पहुंचती है उसका अंदाजा जादुई ही है. कैमरे में रिकॉर्ड होते दृश्य और चुटकियों में अंगुलियों से टाइप होती भाषा जिन मंतव्यों, विमर्शों और सवालों के साथ पूरे विश्व के केंद्र में होती है वह वेब पत्रकारिता की अनोखी सफलता है.
मौजूं सवाल यह है कि आप वेब पत्रकारिता किसे मानेंगे? आज के समय में वेबसाइट बनाकर लिखना बहुत आसान है. क्या केवल वेबसाइट पर जाकर लिख देना ही वेब पत्रकारिता है? निश्चित ही नहीं.
पत्रकारिता कहीं भी हो रही हो, उसके मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं होना चाहिए. मूल यही कि जो भी कहा, लिखा या दिखाया जायेगा, वह पूरी ‘जवाबदेही’ के साथ होगा. यह जवाबदेही जुड़ते ही पत्रकारिता और महज सूचना के प्रसार में अंतर स्पष्ट हो जाता है.
पिछले कुछ सालों में ऐसी वेब पत्रकारिता बढ़ी है, जो मीडिया संस्थानों से संबद्ध नहीं है. हालांकि इन संस्थानों के लिए संसाधन बड़ी चुनौती है, पर ये केवल अपने चुने हुए विषयों पर कार्य करने के लिए भी स्वतंत्र हैं. जो डिजिटल पत्रकारिता मीडिया संस्थानों की वेबसाइट पर हो रही है, वहां अलग तरह की चुनौती है.
इनमें से अधिकांश की शुरुआत मूल मीडिया संस्थान के डिजिटल प्रतिनिधित्व के लिए ही हुई. समय के साथ कदमताल करने के लिए अखबार भी वेब पर अपनी उपस्थिति चाहते थे और टीवी चैनल भी. अखबार में आप तस्वीरें देख सकते हैं, खबरें और आलेख पढ़ सकते हैं.
वहीं टीवी पर आप देख, सुन और पढ़ सकते हैं, पर वही जो दिखाया जा रहा है और जब दिखाया जा रहा है. वेब ने अपने पाठकों को इससे आगे कि सहूलियत दी. अपनी पसंद और समय के अनुसार देखने, सुनने और पढ़ने की आजादी.
वेब पर पाठक कब, कहां से और क्या पढ़ रहा है, इसकी सटीक जानकारी होती है. क्या पढ़ा जा रहा है, कितनी देर पढ़ा जा रहा है, किस आयु वर्ग के पाठक पढ़ रहे हैं, वो किस शहर से आते हैं- ये सारी जानकारी होती है, इसीलिए यहां संपादकीय चुनौती भी तगड़ी है.
इस सबके साथ वेब-पत्रकारिता दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है- विश्वसनीयता और आर्थिक पक्ष. वेब पर खबरों की प्रामाणिकता एक चुनौती बनी हुई है. वह इसलिए कि सोशल साइट की सूचनाओं को वेब पत्रकारिता मान लिया गया है.
लोगों में भी जागरूकता का अभाव है. इसीलिए अपना-अपना एजेंडा चलानेवाले धीरे से सूचनाओं के इस प्रवाह में अपने मतलब की जानकारियां प्रवाहित कर देते हैं. मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों से जनता के मोहभंग ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभायी है. दूसरी बड़ी चुनौती है पैसे की.
वेब पर पाठक तो बहुत हैं पर कमाई नहीं है. अखबार और टीवी पर मिलनेवाले लाखों के विज्ञापन वेब पर हजारों के भी नहीं होते. इस चुनौती से जूझने के लिए सभी संस्थान प्रयासरत हैं. इसका यही उपाय है कि पाठक अच्छी सामग्री पढ़ने के लिए पैसे दें, तभी वेब पत्रकारिता का आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री भी वेब पर उपलब्ध होगी.
कुल मिलाकर वेब पत्रकारिता संक्रमण काल से भी गुजर रही है. लेकिन तेज गति से विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध करवाने की चुनौतियों से जूझते हुए ही वह परिपक्वता की ओर भी बढ़ रही है.
भारत में 63 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट उपभोक्ता
इनमें से 40 करोड़ शहरी
लगभग 23 करोड़ ग्रामीण
ग्रामीण उपभोक्ता तेजी से बढ़ रहे हैं
4जी ने बदली तस्वीर
43 करोड़ उपभोक्ता 4जी के
दुनिया भर में
कुल 150 करोड़ के करीब वेबसाइट्स पंजीकृत, लेकिन 20 करोड़ ही सक्रिय. इनमें न्यूज वेबसाइट की संख्या बहुत कम.
एलेक्सा साइट पर शीर्ष 100 खबरिया वेबसाइट की जानकारी मौजूद.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




