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मॉडर्न टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से बनाया रूपा को ग्लोबल ब्रांड, जानें इनकी सक्‍सेस स्‍टोरी

Updated at : 15 Oct 2018 7:10 AM (IST)
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मॉडर्न टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से बनाया रूपा को ग्लोबल ब्रांड, जानें इनकी सक्‍सेस स्‍टोरी

प्रह्लाद राय अग्रवाल चेयरमैन मॉडर्न टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से बनाया रूपा को ग्लोबल ब्रांड रूपा एंड कंपनी लिमिटेड एवं रूपा डाइंग एंड प्रिंटिंग प्राइवेट लिमिटेड रूपा एंड कंपनी लिमिटेड और रूपा डाइंग एंड प्रिंटिंग प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रह्लाद राय अग्रवाल बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. वर्तमान में रूपा गार्मेंट्स, इनरवियर व कैजुअल वियर में […]

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प्रह्लाद राय अग्रवाल चेयरमैन
मॉडर्न टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से बनाया रूपा को ग्लोबल ब्रांड
रूपा एंड कंपनी लिमिटेड एवं रूपा डाइंग एंड प्रिंटिंग प्राइवेट लिमिटेड
रूपा एंड कंपनी लिमिटेड और रूपा डाइंग एंड प्रिंटिंग प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रह्लाद राय अग्रवाल बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. वर्तमान में रूपा गार्मेंट्स, इनरवियर व कैजुअल वियर में देश का नंबर वन ब्रांड है.
श्री अग्रवाल की दूरदृष्टि और व्यापारिक कुशलता ने रूपा ब्रांड को न केवल भारत के बाजार में सर्वाधिक लोकप्रिय ब्रांड के रूप में स्थापित किया है, वरन वैश्विक बाजार में भी रूपा ने अपनी छाप छोड़ी है. कोलकाता में कोलंबिया के मानद कौंसुल जनरल प्रह्लाद राय अग्रवाल से पुरुषोत्तम तिवारी की बातचीत का प्रमुख अंश :
Q व्यवसाय में कैसे आना हुआ ?
व्यवसाय में शौक से नहीं, मजबूरी से आया. पहले ही बताया कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. कोलकाता के महात्मा गांधी रोड पर पिताजी की एक छोटी सी पार्टनरशिप में होजिअरी की दुकान थी. 1956 की बात है. तब मैं बीकॉम में पढ़ता था. कॉलेज से सीधे काली गोदाम स्थित मारवाड़ी वासा में खाने के लिए चला जाता. वहीं से पिताजी की दुकान पर कुछ घंटे बैठता. 1957 में बिनोद होजिअरी के नाम से बनियान का उत्पादन शुरू किया. पहले जॉब वर्क करता था. शुरू में प्रतिदिन चार-पांच बनियान ही बनाता था. बाद में बाजार की मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाता गया.
Q व्यवसाय में पहला ग्रोथ कब आया ?
बिहार की भूमि से मेरे व्यापार में पंख लगे. 1958 की बात होगी. मैं एक दर्जन बनियान लेकर समस्तीपुर गया. शुरू-शुरू में छोटे-बड़े दुकानदार मुझसे मिलते नहीं थे. तीन-चार घंटे इंतजार करवाते थे. उत्पाद खरीदने में कोई रुचि नहीं दिखाते थे. समस्तीपुर के एक दुकानदार ने मेरे उत्पाद की गुणवत्ता को ठीक से परखा-समझा और मुझे 24 दर्जन गंजी का ऑर्डर दे दिया. मेरी आंखें खुशी से भर आयीं. इस तरह बिहार के बाजार में मेरा उत्पाद धीरे-धीरे बिकने लगा. उस समय डोरा ब्रांड की धूम मची हुई थी. मेरा कोई अपना ब्रांड नहीं था, लेकिन बिना ब्रांड के गुणवत्ता के बल पर मेरा उत्पाद बिकने लगा. आज भी रूपा के उत्पाद बिहार में सबसे ज्यादा बिकते हैं.
Q रूपा ब्रांड बाजार में कब- कैसे आया ?
लगभग 10 वर्षों के व्यवसाय के बाद अनुभव किया कि मेरा जो उत्पाद है, वह ब्रांडेड उत्पादों से गुणवत्ता के मामलों में कहीं भी पीछे नहीं है. बाजार के विशेषज्ञों और ग्राहकों से बातचीत के आधार पर मैंने 968 में अपने उत्पादों को रूपा ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा. 1995 में कुछ कारणों से हमारे उत्पादों की बिक्री में कमी हो गयी और हमारी चिंता बढ़ने लगी. मैंने जमीनी स्तर पर सभी कारणों का समाधान किया. लगभग स्थिति को नियंत्रित करने में छह महीने लग गये. धीरे-धीरे अपनी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाता गया और बाजार में छा गया.
Q अपने उत्पादों का विस्तार कैसे किया ?
पहले हमारी कंपनी पुरुषों के अंडरवियर व बनियान का उत्पादन करती थी. 1970 में महिलाओं के अंत:वस्त्रों के उत्पादन क्षेत्र में भी हमने कदम बढ़ाया. अब हम पुरुष, महिला व बच्चों के लिए अंडर वियर गारमेंट के साथ-साथ स्पोर्टी प्रोडक्ट भी बना रहे हैं. रूपा एंड कंपनी द्वारा कई ब्रांडों का उत्पादन किया जा रहा है, जिसमें फ्रंटलाइन, फ्रंटलाइन किड्स, यूरो, सॉफ्टलाइन, सॉफ्टलाइन लेगिंग्स, फूटलाइन, मैक्रोमैन, टोरिडो, थर्मोकॉट, जॉन व बमचम्स शामिल हैं.
Q इसमें विज्ञापनों की कितनी भूमिका रही ?
व्यावसायिक उत्पादों को बढ़ाने में गुणवत्ता के साथ-साथ विज्ञापन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. आज का युग स्पर्धा का युग है. इसमें टिके रहने के लिए व्यवसाय की जितनी भी जरूरते हैं, उसे पूरा करने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए. फिलहाल रूपा के विभिन्न उत्पादों के ब्रांड अंबेस्डर रणवीर सिंह, रणवीर कपूर, अनुष्का शर्मा, सिद्धार्थ मल्होत्रा जैसे स्टार कलाकार हैं.
Qआपके उत्पाद को ग्राहक क्यों खरीदे ?
मैं ग्राहकों व विशेष कर नई पीढ़ी की पसंद के अनुसार, उनके फैशन व स्टाइल के अनुरूप उत्पाद बनाता हूं. आधुनिक फैशन के मद्देनजर हम समय-समय पर उत्पादों का इनोवेशन करते रहते हैं और बाजार में सर्वोच्च गुणवत्ता का उत्पाद बनाते हैं, जिससे हमारे उत्पादों के प्रति ग्राहकों की विश्वसनीयता हमेशा बनी रहे. रही बात कीमत की तो, हमारे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के होते हैं, लेकिन इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की तुलना में कम होती है. हम समाज के सभी वर्ग के लोगों का ध्यान रखते हुए उत्पाद बनाते हैं.
Qव्यावसायिक जीवन की कुछ यादगार बातें? शुरू-शुरू में कॉलेज के बाद अपनी छोटे से कारखाने में आता, खुद सफाई करता और चार-पांच गंजी बनवाता. बाद में पांच दर्जन बनाने लगा. जब मुझे समस्तीपुर में एक दुकानदार भाई से 24 दर्जन गंजी का ऑर्डर मिला तब उस समय मैं खुशी के मारे उछल गया, वैसी खुशी आज तक नहीं मिली. उन खुशियों के आधार पर ही रूपा परिवार की खुशी टिकी है.
दूसरी बात कि शुरू-शुरू में जब मैं अपने उत्पाद को बेचने के लिए बिहार के विभिन्न जिलों में जाता था, उस समय ट्रेन में आरक्षण के लिए पैसे नहीं थे. ट्रेन में बहुत भीड़ होती थी. कभी-कभी तो शौचालय के पास गमछा बिछा कर गहरी नींद में सो जाता, क्योंकि दिनभर बाजार में घूमते-घूमते थक जाता. सवेरे स्टेशन पर ही चापाकल से पानी निकाल कर स्नान करता और ठेलेवाले के पास नाश्ता व भोजन करता. कई रातें तो स्टेशन पर ही बीतीं.
व्यवसाय में एक समय तो इतना व्यस्त हो गया कि कब कोलकाता आया और कब कोलकाता से बाहर चला गया, इसका भी पता नहीं चलता. यहां तक कि रक्षा बंधन के दिन कुछ मिनट के लिए बहन से राखी बंधवाने के लिए आता. मेरी मां छोटी देवी कहती थीं, क्या कमाई कर रहा है कि राखी बंधवाने का भी समय नहीं है. भाग्य ने साथ दिया, आज किसी चीज का अभाव नहीं.
Qईश्वर पर कितना भरोसा करते हैं ?
ईश्वर पर मैं शत-प्रतिशत भरोसा करता हूं. मुझसे तो ज्यादा ठेला-रिक्सावाला चलानेवाला मजदूर मेहनत करता हूं. मैं भी मेहनत करता हू पर भगवान की कृपा से भाग्य ने साथ दिया और बिना किसी विशेष पूंजी से शुरू किया गया व्यापार आज लगभग 1100 करोड़ रुपये का हो गया है.
Q परिवार की कितनी भूमिका है ?
व्यापार को बढ़ाने में परिवार की बड़ी भूमिका है. पिताजी बैजनाथ सोभासरिया ने मुझे व्यवसाय की बारीकियों को समझाया साथ ही जीवन में अनुशासन भी. क्वालिटी मेंटेन और ग्राहकों से बातचीत का तौर-तरीका सीखाया. मेरे दोनों भाई, घनश्याम सोभासरिया और कुंज बिहारी अग्रवाल, मुझसे कंधा से कंधा मिलाकर व्यवसाय के विस्तार में जुटे हैं. गर्व हो रहा है कि मेरे पुत्र सुरेश व रमेश, मंझले भाई घनश्याम के पुत्र मुकेश, मनीष और रजनीश तथा छोटे भाई कुंजबिहारी के पुत्र रवि और विकास, रूपा के उत्पादों को नया आयाम और पंख देने में सक्रिय हैं. बच्चों की सक्रियता और सजगता को देख कर आनंद आता है.
Qएक व्यवसायी का सामाजिक सरोकार क्या होना चाहिए?
प्रत्येक व्यवसायी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसे जो सफलता मिली है. उसके व्यवसायिक सफलता में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है. समाज के सहयोग के बिना न तो कोई व्यक्ति खड़ा हो सकता है, न चल सकता है.
सफलता के सूत्र…
कड़ी मेहनत, गुणवत्ता को प्राथमिकता देना, कस्टमर सर्विस एवं भगवान की कृपा. आधुनिक ट्रेंड और फैशन के अनुसार, प्रत्येक वर्ग के ग्राहकों की पसंद के अनुसार उत्पाद बनाना. और हम अपने उत्पादों में विश्व स्तरीय विदेशों में निर्मित सूती लूम का प्रयोग करते हैं.
गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं करते. कंपनी की सफलता में ग्राहकों और वितरकों की ही मुख्य भूमिका है. रुपा परिवार के सदस्यों का सकारात्मक दृष्टि सफलता का मंत्र बन चुका है. मेरी हर सफलता में धर्मपत्नी शांति देवी की मौन साधना साथ रही है.
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