उन दिनों के लिए इको फ्रेंडली व कहीं ज्यादा सुविधाजनक मेंस्ट्रुअल कप
Updated at : 07 Aug 2018 6:15 AM (IST)
विज्ञापन

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को चिंता रहती है कि कहीं कपड़ों पर दाग न लग जायें. बार-बार सैनेटरी पैड्स बदलने को लेकर भी वे अक्सर परेशान रहती है. टैम्पॉन का इस्तेमाल भी एक अनकम्फर्टेबल फीलिंग देता है और भागते-दौड़ते समय दिक्कत महसूस होती है. लेकिन नये दौर में मेंस्ट्रुअल कप एक ऐसा बेस्ट ऑप्शन है, […]
विज्ञापन
पीरियड्स के दौरान महिलाओं को चिंता रहती है कि कहीं कपड़ों पर दाग न लग जायें. बार-बार सैनेटरी पैड्स बदलने को लेकर भी वे अक्सर परेशान रहती है. टैम्पॉन का इस्तेमाल भी एक अनकम्फर्टेबल फीलिंग देता है और भागते-दौड़ते समय दिक्कत महसूस होती है.
लेकिन नये दौर में मेंस्ट्रुअल कप एक ऐसा बेस्ट ऑप्शन है, जिसका इस्तेमाल करने से वह राहत महसूस कर सकती हैं. खासकर जो लड़कियां स्पोर्ट्स में हिस्सा लेती हैं, उनके लिए तो यह बहुत उपयोगी है. मेंस्ट्रुअल कप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि टैम्पॉन की तरह इसके इस्तेमाल से टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम होने का खतरा नहीं होता है.
यह एक तरह का बैक्टीरिया होता है, जो एक ही टैम्पॉन को लंबे समय से इस्तेमाल करने से पैदा होता है. भारत जैसे विकासशील देशों में जहां खासकर ग्रामीण महिलाओं को सैनेटरी पैड्स के अभाव में रोगों से जूझना पड़ता है, उनके लिए तो यह एक वरदान की तरह है. इसके बारे में उन्हें जागरूक किया जाना चाहिए.
कैसा है यह कप : मेंस्ट्रुअल कप विभिन्न आकारों में सेट के रूप में मिलते हैं, ताकि एक गंदा हो जाने के बाद दूसरा उपयोग हो. यह थर्माप्लास्टिक एलेस्टोमेर, सिलिकॉन या लेटेक्स से बना होता है, जो स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के हिसाब से अनुकूल है. ये कप घंटी के आकार के व बहुत ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं.
चूंकि यह रियूजेबल होता है, इसलिए न तो फेंकने की टेंशन होती है और न ही यह गंदगी फैलाता है. टैम्पॉन से रैशेज और एलर्जी होने की हमेशा शिकायत रहती है. मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन से निर्मित होने से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. जबकि सैनेटरी पैड में प्लास्टिक और केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, जिससे कैंसर और इन्फेक्शन होने का डर रहता है.
कैसे करें यूज : स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ ज्योत्सना गुप्ता कहती हैं, यह कप यूज करने में बहुत ही आसान है और इसमें कोई डिसकम्फर्ट फील नहीं होता. ये अलग-अलग साइज में आते हैं. किशोरियों को छोटे साइज का कप इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, जबकि बड़ी उम्र की महिलाओं को बड़े साइज का.
बाकी यह इस पर भी निर्भर करता है कि ब्लीडिंग कितनी हो रही है, उसे अनुसार कप लिया जा सकता है. साथ ही डिलीवरी के बाद अक्सर महिलाओं का वजाइना लूज हो जाता है, तो उन्हें बड़ा मेंस्ट्रुअल कप इस्तेमाल करना पड़ता है.
मेंस्ट्रुअल कप को आसानी से फोल्ड करके वजाइना में रखा जा सकता है. इसे सी-शेप में फोल्ड कर वजाइना में रखा जाता है. इस कप के बीच वाले हिस्से को दोनों उंगलियों के बीच में रखकर दबाएं और इस कप को सी आकार में मोड़ कर वजाइना में इंसर्ट करना होता है. एक बार फिट होने के बाद यह अपने आप खुल जाता है और वजाइना की दीवारों से चिपक जाता है.
हां, ध्यान रहे कि यह ठीक से वजाइना में फिट हो जाये और इसके लिए कई बार घुमाना भी पड़ता है, ताकि वह वजाइना में पूरी तरह से खुल जाये. इसमें पीरियड्स के समय होने वाली ब्लीडिंग का रक्त एकत्र होता रहता है. जब यह भर जाये तो इसे निकालकर साफ करके रख लें और दूसरे कप का प्रयोग करें. 5 से 12 घंटे तक एक मेंस्ट्रुअल कप प्रयोग में आ सकता है और दुबारा धोकर इसे फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है.
सफाई का रखें ध्यान
अपना मेंस्ट्रुअल कप घर में किसी और को इस्तेमाल न करने दें. हर महीने पीरियड्स के समय पहले इसे अच्छे से उबाल कर साफ कर लें. इससे इसके अंदर गंदगी एवं जीवाणु नहीं रहेंगे. कप खरीद कर लाने के बाद सबसे पहले इसे साफ़ पानी में रखें, फिर इसे साबुन से धोकर फिर से गर्म पानी में डालकर आधे घंटे तक रखना चाहिए. ऐसा करने से कप कीटाणु रहित हो जायेगा. इसे वजाइना में लगाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से साबुन से साफ कर लेना चाहिए.
कुछ तथ्य
एक महिला द्वारा पूरे मेंस्ट्रुअल पीरियड के दौरान इस्तेमाल किये गये सैनेटरी नैपकिन्स से करीब 125 किलो नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा बनता है. 2011 में हुई एक रिचर्स के मुताबिक देश में हर माह 9000 टन मेंस्ट्रुअल वेस्ट उत्पन्न होता है, जो सबसे ज्यादा सैनेटरी नैपकिन्स से आता है. इतना कचरा हर महीने धरती के अंदर धंसा जा रहा है, जिससे पर्यावरण को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचता है.
क्या है इसकी खासियत
मेंस्ट्रुअल कप टैम्पॉन या सैनेटरी पैड्स की तरह रक्त को एब्जॉर्ब नहीं करता, जिसके कारण इन कपों का इस्तेमाल करने से किसी तरह के इन्फेक्शन होने की संभावना नहीं रहती है. इन्हें घर पर स्टरलाइज किया जा सकता है और सबसे बड़ी बात है कि ये कप चार-पांच साल तक खराब नहीं होते हैं. यह मेंस्ट्रुअल हाइजीन के हिसाब से सबसे प्रभावी विकल्प है और यही कारण है कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां और महिलाएं इसका प्रयोग इन दिनों कर रही हैं.
आप चाहे जिम जाएं, ऑफिस या घर में काम करें, इन्हें पहनने का कोई एहसास नहीं होता और न ही बार-बार बदलने या कहीं दाग-धब्बे लगने की टेंशन. इसे लगाकर आप स्विमिंग कर सकती हैं और लंबी यात्राओं में भी आराम महसूस करेंगी. इससे पहनने से ब्लड का संपर्क हवा से नहीं होता, इसलिए दुर्गंध भी नहीं फैलती. यह वजाइना की प्राकृतिक नमी को खत्म नहीं करता.
(बातचीत : सुमन बाजपेयी)
प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




