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दक्षिण कोरिया : बच्चों को मिसाइल हमलों से बचने की दी जा रही ट्रेनिंग

Updated at : 30 Apr 2017 8:36 AM (IST)
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दक्षिण कोरिया : बच्चों को मिसाइल हमलों से बचने की दी जा रही ट्रेनिंग

उत्तरी कोरिया अपने पांच परमाणु मिसाइल परीक्षण के बाद छठे परमाणु कार्यक्रम की तैयारी में लगा हुआ है और लगातार सैन्य प्रदर्शन कर रहा है. इन गतिविधियों के फलस्वरूप पड़ोसी द कोरिया में संभावित हमले से बचाव की तैयारी हर जगह चल रही है. उ कोरिया की सीमा से 50 मील दूर स्थित सोल में […]

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उत्तरी कोरिया अपने पांच परमाणु मिसाइल परीक्षण के बाद छठे परमाणु कार्यक्रम की तैयारी में लगा हुआ है और लगातार सैन्य प्रदर्शन कर रहा है. इन गतिविधियों के फलस्वरूप पड़ोसी द कोरिया में संभावित हमले से बचाव की तैयारी हर जगह चल रही है. उ कोरिया की सीमा से 50 मील दूर स्थित सोल में रहने वाले के 2.5 करोड़ लोग जानते हैं कि वेलोग युद्ध के नजदीक हैं. जानिए, क्या हैं जमीनी हालात.

आजकल सियोल के स्कूलों में रबड़ के पीले रंग के मास्क पहने बच्चे मॉक ड्रिल करते नजर आते हैं. इन बच्चों व स्कूल के शिक्षकों को उत्तर कोरिया से अचानक होनेवाले मिसाइल हमलों से बचने के मद्देनजर यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह उनके रुटीन में शामिल है. युद्ध छिड़ने के संभावित खतरे को देखते हुए सोल में बचाव की तैयारी शुरू है. फिर भी लोग विचलित होने के बजाय सब कुछ सामान्य रहने का दावा कर रहे हैं. एक शिक्षक हुन जिंगुन अपने कुछ बच्चों को लेकर वार मेमोरियल आये हुए हैं. वह बताते हैं कि वर्तमान हालात को देखते हुए आपातकालीन स्थिति में बचाव को लेकर बच्चों को तैयार करना हमारी जिम्मेवारी है, लेकिन वे डरे हुए बिल्कुल नहीं हैं.

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सोल एक घनी आबादी वाला शहर है. यहां की सड़कों पर व्यस्त यातायात है. यहां के रेस्टोरेंट और बार भी खचाखच भरे रहते हैं. अलग बात है कि शॉपिंग कॉम्पलेक्सों में मिसाइल हमले से बचाव के लिए शेल्टर भी बनाये गये हैं. इसके बावजूद लोगों के चेहरे पर शिकन नहीं है. लोग मई में नये राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर व्यस्त हैं. वहीं एक चुनावी सर्वेक्षण बताता है कि दक्षिण कोरिया के मतदाता राष्ट्रीय सुरक्षा के बजाय आर्थिक नीति में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं. उत्तरी सीमा पर आर्टिलयरी और रॉकेट एक कतार में तैनात कर दिये गये हैं. यूएस की चेतावनी के बाद उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इस इलाके का दौरा भी किया है.

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* लोग मान रहे- नहीं बढ़ेगा तनाव
एक 30 वर्षीय कंस्ट्रक्शन मैनेजर चुन-हो-पिल बताते हैं कि मैं अपने काम में काफी व्यस्त हूं. युद्ध छिड़ने जैसी बातें होती रहती हैं. इसके लिए कारोबार छोड़ कर बैठा नहीं जा सकता है. जब ऐसी स्थितियां आयेगी, तब देखा जायेगा. उन्होंने पानी के बोतलों का स्टॉक अपने घर में जमा नहीं किया है, न ही रासायनिक हमलों से बचने के लिए मास्क खरीदकर रखा है.
असैन्य क्षेत्र से पांच मील दूर स्थित मुनसेन शहर में रहने वाले 72 वर्षीय ग्वान कहते हैं कि मैं यहां काफी सालों से रह रहा हूं और 50 साल से तनाव जारी है, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि तनाव इतना बढ़ जायेगा. मुझे यहां कोई डर नहीं है. वह आश्वस्त हैं कि आगे हालात ऐसे ही रहेंगे. साथ ही वह इस संभावित खतरे को लेकर खुद को भाग्यवादी भी बताते हैं और कहते हैं कि अगर युद्ध होता भी है तो उन्हें यहां से निकलने के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पायेगा. ऐसे में हमलोग झटके में खत्म हो जायेंगे.
सोल की एक फिजियो थेरेपिस्ट किम युन कहती हैं कि मेरे पास कुछ मरीज आये, जिन्होंने उत्तर कोरिया की ओर से संभावित युद्ध के कारण दबाव की शिकायत की. इस पर किम ने लोगों को बाजार से अधिक मात्रा में खाद्य पदार्थ और पानी खरीद कर स्टॉक कर लेने को कहा, लेकिन लोगों ने बावजूद इसके कुछ नहीं किया. फिर भी किम कहती हैं कि मैं कोई खतरा महसूस नहीं करती हूं, क्योंकि यह स्थायी नहीं है.
* चिंतित हैं द कोरिया के बुजुर्ग
इस देश के पुराने लोगों के पास शीत युद्ध की काफी स्मृतियां हैं. चुनाव में ऐसे लोग प्योंगप्योंग से संबंध को लेकर अधिक चिंतित हैं जो पिछले 60 साल से तनावपूर्ण है. टेगपोल पार्क में बैठे तीन बुजुर्गों ने बताया कि हमने कोरियन युद्ध को झेला है और हमें डर है कि आगे कुछ भी हो सकता है. क्योंकि शांति संधि पर कभी भी औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हो पाये हैं.
इसलिए आज दक्षिण कोरिया के युवा भले ही समझते हों कि युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं बनेगी. लेकिन, हम जानते हैं कि ऐसा नहीं है. पहले भी इसी तरह तनाव बढ़ा और युद्ध हुए हैं. वहीं अधिकतर सोलवासी सोचते हैं कि यह ऐसे ही चलता रहेगा. क्योंकि प्योंगप्योंग की धमकियां सिर्फ धमकी तक ही सीमित रहेगी. यह धरातल पर कभी नहीं उतर सकती.
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