इतने दिनों बाद पाकिस्तान को क्यों आने लगी मुंबई हमले व आतंकी हाफिज सईद की याद?

Updated at : 21 Feb 2017 12:26 PM (IST)
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इतने दिनों बाद पाकिस्तान को क्यों आने लगी मुंबई हमले व आतंकी हाफिज सईद की याद?

इस्लामाबाद : पाकिस्तान में लगातार हो रहे आंतकी हमलों के बीच पाकिस्तानी आवाम में आतंकवाद को लेकर मंथन शुरू हो गया है. पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ने का डर सताने लगा है.शहाबज कलंदर दरगाह में आत्मघाती हमले के बाद एक फिर से सवाल खड़े होने लगे कि आखिर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान […]

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान में लगातार हो रहे आंतकी हमलों के बीच पाकिस्तानी आवाम में आतंकवाद को लेकर मंथन शुरू हो गया है. पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ने का डर सताने लगा है.शहाबज कलंदर दरगाह में आत्मघाती हमले के बाद एक फिर से सवाल खड़े होने लगे कि आखिर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान क्या नीति अपनाये.आज पाकिस्तान के रक्षा मंत्रीख्वाजा आसिफ ने कहा कि मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद सिर्फ भारत ही नहीं पाकिस्तान के लिए भी बड़ा खतरा है. 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले के 8 साल बीत जाने के बाद पाकिस्तान के हुक्मरान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकारा कि हाफिज सईद पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है.

लंबे अर्से से पाकिस्तान हाफिज सईद को बतौर आतंकी मानने से हिचकिचाता रहा है लेकिन अमेरिका की नयी सरकार के दबाव में हाफिज सईद को आखिरकार नजरबंद करना पड़ा. 65 साल का हाफिज सईद जमात-उल-दावा का पुराना नेता है. 1994 में हाफिज सईद ने भारतीय सुरक्षा बलों से लड़ने और कश्मीर में अलगाववाद को समर्थन करने के लिए लश्कर-ए-तैयबा नाम का संगठन बनाया. साल 2008 में जब मुंबई हमले में 160 लोग मारे गये तब अमेरिका ने हाफिज सईद के सिर पर 10 मिलीयन डॉलर का इनाम रखा. यूएस सरकार और संयुक्त राष्ट्र हाफिज सईद को आतंकवादी मानती है लेकिन तमाम प्रतिबंधों के बावजूद हाफिज सईद की सक्रियता पाकिस्तान में कम नहीं हुई. वह खुलेआम ट्रेनिंग कैंपों का दौरा करता रहा और भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है. पाकिस्तान के आम लोगों में पकड़ बनाये रखने के लिए हाफिज सईद धर्मार्थ काम भी करता रहा है. प्रतिबंध के दौरान ही उसने पाकिस्तान में कई रैलियों का आयोजन किया.

भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर हाफिज सईद पिछले तीस सालों से सक्रिय है. 70 के दशक में हाफिज सईद ने अफगानिस्तान जाकर आतंकी शिविर में ट्रेनिंग हासिल की. उसी दौरान उसकी मुलाकात डा अबद्ल्लाह आजम, ओसामा बिन लादेन के सलाहकार से हुई. 2006 आते-आते हाफिज सईद बड़े पैमाने पर आतंकी शिविरों का संचालन करने लगा. खासतौर से इन आतंकी कैंपों के फंडिग में हाफिज सईद ने अहम भूमिका निभायी. पाकिस्तान के अंदर आतंकी संगठनों की मजबूती की वजह वहां की आर्मी की सांठगांठ भी रही. पाकिस्तानी आर्मी आमतौर पर इन संगठनों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधयों के लिए करता रहा है.

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