शारदीय नवरात्र कल से, अमृत योग में स्थापित होंगे कलश, घोड़े पर आयेंगी मां भगवती
Updated at : 30 Sep 2016 6:35 AM (IST)
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शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू होगा. इस बार नवरात्र 11 दिनों का है. दस दिनों तक मां दुर्गा की पूजा होगी. वहीं, 11वें दिन विजयादशमी मनायी जायेगी. नवरात्र पर दस दिनों तक मां की आराधना का संयोग कई वर्षों बाद बना है. इस बार मां का आगमन घोड़े पर होगा, जबकि विदाई मुर्गा पर होगी. […]
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शारदीय नवरात्र शनिवार से शुरू होगा. इस बार नवरात्र 11 दिनों का है. दस दिनों तक मां दुर्गा की पूजा होगी. वहीं, 11वें दिन विजयादशमी मनायी जायेगी. नवरात्र पर दस दिनों तक मां की आराधना का संयोग कई वर्षों बाद बना है. इस बार मां का आगमन घोड़े पर होगा, जबकि विदाई मुर्गा पर होगी. पंडितों की मानें तो मां का घोड़े पर आगमन शुभ नहीं है. देश में कलह, मार, युद्ध और किसी बड़े नेता की मौत हो सकती है. मां दुर्गा की विदाई भी अशुभ है. पंडित विनोदानंद झा ने बताया कि मां का आगमन और प्रस्थान दोनों ही अशुभ है. देश और राज्यों को भारी नुकसान होगा. मां की आराधना कलश स्थापना से शुरू होगी. इस बार अमृत योग में कलश स्थापित किये जायेंगे.
द्वितीय पूजा दो दिन होगी. इसके बाद हर दिन एक-एक पूजा होगी. बंगाली पद्धति में मां दुर्गा की पूजा षष्ठी से शुरू होगी. बंगाली अखाड़ा और रामकृष्ण मिशन में सात अक्तूबर से मां की पूजा शुरू की जायेगी. दुर्गापूजा के दौरान हर दिन मां के हर रूप की पूजा की जाती है.
कुंवारी पूजन का विशेष महत्व
दुर्गापूजा में कुंवारी पूजन का विशेष महत्व है. दस दिनों तक खासकर अष्टमी के दिन कुंवारी पूजन का काफी महत्व है. 10 साल से कम उम्र की बेटियों को मांग दुर्गा का रूप मान कर भक्त उनकी पूजा-अर्चना करते हैं.
बंगाली पद्धति के अनुसार कुंवारी पूजन के लिए छह महीने पहले ही एक कुंवारी बेटी को चुन लिया जाता है. बंगाली अखाड़ा के अनुसार मंदिर में एक कुंवारी बेटी को चुन लिया गया है. अष्टमी के दिन पूरे विधि विधान के साथ मां की पूजा की तरह कुंवारी की पूजा की जाती है. कई भक्त घरों में भी कुंवारी पूजन करते हैं. दुर्गापूजा में मां की आराधना कई तरह से भक्तों द्वारा की जाती है.
250 महिलाएं निकालेंगी कलश यात्रा : शहर के मठ-मंदिरों में भी नवरात्र की तैयारी चल रही है.मंदिरों की साफ-सफाई और सजाने का काम चल रहा है. बास घाट स्थित मां सिद्धेश्वरी मंदिर में एक अक्तूबर को कलश यात्रा निकाली जायेगी. कलश यात्रा में 250 महिलाएं एक ही रंग के परिधान में होंगी. मंदिर के सचिव शैलेंद्र प्रसाद ने बताया कि यह मंदिर 75 साल पुराना है. इस बार मंदिर में 250 कलश स्थापित किये जायेंगे. कलश स्थापना के दिन 250 महिलाएं दरभंगा हाउस से जल भर कर कलश लायेंगी और मंदिर में उसे स्थापित किया जायेगा.
कब-कब क्या होगा
1 अक्तूबर प्रथम पूजा, कलश स्थापना
2 अक्तूबर द्वितीय व रेमंत पूजा
3 अक्तूबर द्वितीय पूजा (तिथि वृद्धि)
4 अक्तूबर तृतीया पूजा
5 अक्तूबर चतुर्थी पूजा
6 अक्तूबर पंचमी पूजा
7 अक्तूबर षष्ठी पूजा
8 अक्तूबर महासप्तमी, पट खुलेंगे
9 अक्तूबर महाअष्टमी
10 अक्तूबर महानवमी
11 अक्तूबर विजया दशमी या दशहरा
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