दक्षा वैदकर
एक नगर में एक व्यक्ति इस वजह से मशहूर हो गया कि उसका चेहरा मनहूस है. ऐसा उस नगर में रहनेवाले लोग कहते थे. यह बात जब राजा के पास पहुंची, तो इस धारणा पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ. राजा ने उस व्यक्ति को अपने महल में रख लिया और सुबह उठते ही उस व्यक्ति का मुंह देखा. इसके बाद राजा अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त हो गये. व्यस्तता इतनी अधिक थी कि उस दिन राजा भोजन भी न कर सके. शाम होते ही उन्हें पूरा यकीन हो गया कि यह व्यक्ति वाकई में मनहूस है. उन्होंने उस व्यक्ति को फांसी पर चढ़ाने का आदेश दे दिया.
राजा के मंत्री को यह बात पता चली, तो वह राजा से मिले. मंत्री ने राजा से कहा, आप इस निर्दोष को दंड क्यों सुना रहे हैं? राजा ने कहा, इस मनहूस का चेहरा सुबह देखने के बाद आज सुबह से ही भोजन नसीब नहीं हुआ.
मंत्री ने कहा, क्षमा करें महाराज! इस व्यक्ति ने भी सबसे पहले आपका मुंह देखा और शाम को उसे मृत्युदंड सुनाया गया. अब आप ही तय करें कि कौन ज्यादा मनहूस है, आप या वो? राजा को मंत्री की बात समझ आ गयी और उस व्यक्ति को मृत्यु दंड नहीं दिया गया और ससम्मान विदा किया गया. यह कहानी सीख देती है कि किसी भी व्यक्ति का चेहरा मनहूस नहीं होता. वह तो भगवान की देन है. मनहूसियत हमारे देखने या सोचने के ढंग में होती है. यह नजरिया आपको पीछे धकेलता है और नजरिया सही हो तो जिंदगी बेहतर बन जाती है.
वैसे यह बात दूसरी जगहों पर भी हम लागू कर सकते हैं. कई बार लोग बिल्ली के रास्ता काटने का अपशगुन समझते हैं. कहते हैं कि बिल्ली रास्ता काट गयी, अब कोई न कोई दुर्घटना होगी.
जबकि, यह बहुत सामान्य-सी बात है कि बिल्ली एक जानवर है. वह भी यहां से वहां, कहीं न कहीं तो चल कर जायेगी ही. दिन में हजार बार यहां से वहां जायेगी. कई बार वह आपके सामने सड़क पार नहीं करती, तो आपको पता भी नहीं चलता. फिर भी आप वह सड़क तो पार करते ही हैं न? तो फिर आपके सामने उसने सड़क पार कर ली, तो क्या बिगड़ गया? आप अंधविश्वास को छोड़ें और अपनी गाड़ी चलाने पर ध्यान दें.
daksha.vaidkar@prabhatkhabar.in
बात पते की..
– ‘आज का दिन ही खराब है, न जाने सुबह किसकी शक्ल देख ली’ ऐसी बातें बोलना बंद करें. यह सब अंधविश्वास फैलाता है, जो ठीक नहीं है.
– आप जैसे कर्म करते हैं, वैसा फल पाते हैं. आपके साथ जो कुछ भी बुरा हुआ, वह आपकी वजह से हुआ. दूसरों को दोष देना बंद करें.
