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दक्षिण भारत में हो सकती है अधिक बारिश : UN

Updated at : 11 Dec 2015 2:13 PM (IST)
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दक्षिण भारत में हो सकती है अधिक बारिश : UN

संयुक्त राष्ट्र : वैश्विक तापमान में बदलाव लाने वाले अल नीनो के कारण दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक बारिश जारी रह सकती है तथा इससे और बाढ आने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. परामर्श के अनुसार एशिया और प्रशांत में इस बार अल नीनो मौसम […]

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संयुक्त राष्ट्र : वैश्विक तापमान में बदलाव लाने वाले अल नीनो के कारण दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक बारिश जारी रह सकती है तथा इससे और बाढ आने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. परामर्श के अनुसार एशिया और प्रशांत में इस बार अल नीनो मौसम प्रणाली के 1998 के बाद से अब तक की सबसे मजबूत प्रणालियों में से एक के रुप में प्रबल होने की आशंका है और यह स्थिति 2016 की शुरुआत तक बनी रहेगी. परामर्श में जलवायु जोखिम से निपटने के लिए दीर्घकालीन अनुकूलन रणनीतियां बनाने, समय पर इसे कमजोर करने और पूर्व चेतावनी के मामले में क्षेत्रीय सहयोग की अपील की गई है.

अल नीनो पर थर्ड एडवाइजरी नोट में कहा गया है कि 2015-2016 में अल नीनो का प्रभाव कंबोडिया के उपरी स्थानों, मध्य एवं दक्षिण भारत, पूर्वी इंडोनेशिया, मध्य एवं दक्षिणी फिलीपीन, मध्य एवं पूर्वोत्तर थाईलैंड जैसे कुछ इलाकों में और भी अधिक भीषण हो सकता है. इस नोट को एशिया एवं प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक आयोग और अफ्रीका एवं एशिया के लिए क्षेत्रीय एकीकृत बहु खतरा पूर्व चेतावनी प्रणाली आरआईएमईएस ने संयुक्त रुप से जारी किया है.

रिपोर्ट के अनुसार, खासकर भारत और श्रीलंका समेत कई दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में भारी बारिश के कारण बाढ़ आने की आशंका है जबकि पापुआ न्यू गिनी, तिमोर-लेस्ते और वानुअतु समेत कई प्रशांत द्वीप सूखे की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं जिससे पानी की कमी और खाद्य असुरक्षा पैदा हो गई है. 2015-2016 अल नीनो के 1997-1998 के बाद की सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में से एक के रुप में प्रबल होने की आशंका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका और दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है तथा इससे खासकर शहरी इलाकों में और बाढ आने की आशंका है. भारत में सबसे भीषण बाढ चेन्नई में आई है. वहां बाढ के कारण कई लोगों की मौत हो गई है.

तमिलनाडु में 21.7 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि दक्षिणपूर्वी भारत और उत्तरी श्रीलंका के बडे इलाकों में 7.9 इंच से अधिक बारिश हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2015 से रिकॉर्ड बारिश ने भीषण बाढ की स्थिति पैदा कर दी है जिसके कारण बडी संख्या में लोगों की मौत हुई है. परामर्श में कहा गया हैकि हालांकि इस बारे में कोई विस्तृत वैज्ञानिक खोज नहीं की गई है कि क्या 2015-2016 के अल नीनो और चेन्नई शहर में आई बाढ के बीच कोई सीधा संपर्क है या नहीं लेकिन इस बारे में आम सहमति है कि मजबूत अल नीनो परिस्थितियों के कारण दक्षिण एशिया में पूर्वोत्तर मॉनसून मौसम के दौरान असाधारण बारिश हुई है. यह इस ओर संकेत देता है कि भारत में मौसम के चरम पर पहुंचने की घटनाओं का संबंध अल नीनो से है. परामर्श में कहा गया है कि दिसंबर 2015 से फरवरी 2016 तक शीतकाल में मालदीव और श्रीलंका समेत दक्षिण भारत और दक्षिण एशिया में सामान्य से अधिक बारिश जारी रह सकती है.

इसमें कहा गया है कि पेरिस में मौजूदा संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में अल नीनो के प्रभावों पर चर्चा की गई और कुछ देश इस संबंध में कदम उठा रहे हैं. परामर्श में इस संबंध में अहम दिशानिर्देश दिए गए हैं. दिशानिर्देशों में कहा गया हैकि आपसी सहयोग के साथ मिलकर काम करने से ही एशिया -प्रशांत क्षेत्र आपदा से निपटने में वास्तव में सक्षम हो सकता है और भविष्य में स्थायी विकास हासिल कर सकता है.

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