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सब्भै कहै छै हम्मे विकास करबै

Updated at : 05 Oct 2015 7:39 AM (IST)
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सब्भै कहै छै हम्मे विकास करबै

बांका के आसमान में इन दिनों खूब हेलीकॉप्टर मंडरा रहे हैं. इतने कि 80 साल के बुजूर्ग के लिए भी यह चौंकाने वाला चुनावी नजारा है. हर दल, हर प्रत्याशी यह कहते हुए वोट मांग रहा है कि उन्हें वोट दीजिए, वह विकास करेंगे. लेकिन, चुनावी माहौल के बीच बांका के चौक-चौराहों पर बात मुद्दे […]

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बांका के आसमान में इन दिनों खूब हेलीकॉप्टर मंडरा रहे हैं. इतने कि 80 साल के बुजूर्ग के लिए भी यह चौंकाने वाला चुनावी नजारा है. हर दल, हर प्रत्याशी यह कहते हुए वोट मांग रहा है कि उन्हें वोट दीजिए, वह विकास करेंगे. लेकिन, चुनावी माहौल के बीच बांका के चौक-चौराहों पर बात मुद्दे से शुरू होकर जाति पर आकर ठहर जाती है. फिर बात इससे आगे नहीं निकल पाती. जिले में विधानसभा की पांच सीटें हैं. हर दिन एक दर्जन छोटी-बड़ी सभाएं हो रही हैं. चुनावी माहौल का जायजा लेती अजीत की रिपोर्ट बताती है कि हर सीट पर टक्कर कांटे की है.
बांका जिला की पांच सीटों पर पहले चरण में ही मतदान होना है. चुनाव प्रचार ने पूरी तरह जोर पकड़ लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गांधी जयंती पर बांका से चुनावी अभियान की शुरु आत की. पीएम ने बांका-अमरपुर सीमा पर समुखिया मोड़ के पास सभा को संबोधित किया. पीएम के अलावा नीतीश, लालू, राजनाथ सहित सभी दलों के नेता चुनाव प्रचार में पहुंच चुके हैं. हर दिन एक दर्जन छोटी-बड़ी सभाएं हो रही हैं. माहौल भी चुनावी हो गया है.
चुनावी चर्चा में आमलोगों की भी रूचि है. नेताओं की सभा में जुटी भीड़ का आकलन हो रहा है कि किसका पलड़ा भारी है. नेताओं के दौरे के बाद आमलोगों की दिलचस्पी भी चुनावी चर्चा में अधिक दिख रही है. पर, सबसे खास बात यह है कि चुनावी चर्चा में मुद्दे से शुरू होकर बात जाति पर आकर ठहर जाती है. हर कोई अपनी-अपनी समस्या से परेशान है. कोई उद्योग, तो कोई बिजली की बात कर रहा है, लेकिन मामला फिर वहीं जाति पर ही आकर ठहर जाता है. ऐसा नहीं है कि विकास का मुद्दा नहीं है, पर जाति एक ऐसा फैक्टर है, जिसे कोई नजरअंदाज नहीं कर पा रहा.
हर जगह जाति का जोर
बांका के गांधी चौक पर एक पान दुकान पर खैनी खरीद रहे बुजुर्ग शोभन पासवान चुनाव के संबंध में पूछने पर शुरू हो जाते हैं. कहते हैं रोजे हेलीकॉप्टर आबै छै, देखै छियै, आबरी ते गजब होय गेल छै. 80 साल उम्र होय गेलै, पैहने एत्ते हेलीकॉप्टर नय देखने रहियै. सब्भै कहै छै हमरा वोट दहो, हम्मे विकास करबै. हेलीकॉप्टर बढ़लै जरूर लेकिन विकास नांय होलै. शोभन यह भी कहते हैं कि चुनाव में विकास की बात होती है लेकिन हर जगह जाति ही दिखता है, जबकि वोट विकास के मुद्दे पर होना चाहिए. पान दुकान पर शोभन ने जब राजनीतिक चर्चा में विकास की बात छेड़ी तो पास खड़ा मुकेश यह कह कर व्यंग्य करते हुए निकल गया कि यहां कुछ कहिये और वोट तो देखिये के दीजियेगा. मुकेश का यह व्यंग्य सब कुछ बताने के लिए काफी था. शायद मुकेश का इशारा जाति की ओर था. यही कारण रहा कि मुकेश की बात सुन शोभन अपनी हंसी नहीं रोक पाये और जोर से बोले कि हमने तो अपनी उम्र गुजार ली. तुम तो अभी युवा हो. तुम लोग इस चक्कर में न पड़ो. यह सच भी है.
समुखिया का दर्द
बांकावासियों का दर्द यह भी है कि यहां मुद्दे तो कई सारे हैं, लेकिन ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आ रहा है, जातीय समीकरण मुख्य बिंदु बनता जा रहा है. वैसे, बांका में औद्योगीकरण सभी नेताओं के लिए चहेता वोट बैंक रहा. इसके इर्द-गिर्द स्थानीय से लेकर राजधानी तक की राजनीति रची जाती रही. इतना ही नहीं बांका की धरती ने कई ऐसे राजनीतिज्ञ दिये, जिन्होंने देश में बांका को पहचान दिलायी. इसी क्र म में बांका को रेल सेवा से जोड़ने के लिए लोग आज भी दादा (दिग्विजय सिंह) को बेसब्री से याद करते हैं. रेल तो पहुंच गयी पर अब भी ऐसी कई बड़ी योजनाएं हैं, जो शुरू तो हुई पर अंजाम तक नहीं पहुंच सकी. चुनाव के दौरान इसके शुरू नहीं होने का दर्द लोगों के चेहरे पर दिख रहा है. समुखिया मोड़ में पीएम की सभा में पहुंची सविता मुर्मू कहती हैं कि यह फैक्टरी यदि चालू हो जाती तो हमलोगों का भाग्य बदल जाता.
हर दिन जाम की समस्या
अमरपुर में किराना दुकान चलानेवाले सुभाष कहते हैं कि होना क्या है. हर बार चुनाव होता है, नेता जीत कर जाते हैं, लेकिन आप यहां पांच मिनट खड़ा नहीं रह सकते. हर दिन, हर घंटे जाम की समस्या से जूझते हैं. आज तक किसी ने समस्या के समाधान का प्रयास नहीं किया. आसपास के लगभग दो दर्जन गांवों के लोगों का यह मुख्य बाजार है लेकिन लोग यहां आने से कतराते हैं. यह पूछने पर कि क्या इस बार चुनाव में जाम मुद्दा बनेगा तो चुप्पी साध लेते हैं. इतना ही कहते हैं, कि आप भी समझते हैं. इसके बाद वह समीकरण भी बताने लगते हैं कि यहां इस बार अमुक दल का प्रत्याशी नहीं है. कार्यकर्ता भी इधर-उधर हो गये हैं. लगभग दस मिनट की बातचीत में जाम पीछे छूट जाता है और हर वाक्य में जाति शब्द ही आता है. अमरपुर बाजार के मिथिलेश की शिकायत है कि प्रत्याशी एक बार भी मिलने नहीं आया है.
युवाओं की नयी सोच
विश्वासपुर के रामानंद शर्मा एक विशेष दल का नाम ले कहते हैं कि यहां तो सॉलिड है, लेकिन बगल के गांव में दिक्कत है. हर जगह मुद्दा छूट जाता है और जाति सामने आ जाती है. इसी को आधार बता कर यहां जीत-हार की चर्चा हो रही है. इस सबके बीच भोपाल से एमबीए की पढ़ाई के बाद बांका में अपना व्यवसाय शुरू करने की तैयारी में जुटे नवनीत इस बात को लेकर आश्वस्त है कि अब जाति की बातें नहीं हो सकती. समय बदल गया है. अब विकास के नाम पर ही वोट करेंगे. युवा मुकुल पोद्दार पहली बार वोट डालेंगे. वह कहते हैं कि बांका में कई काम अधूरे हैं. यदि वे पूरे हो जाते, तो इसका श्रेय जिन्हें मिलता, उन्हें वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. धोरैया के थरहरा में कई युवा बैठ कर चर्चा में मशगूल हैं. सबके हाथ में स्मार्ट फोन है. वे चुनाव से जुड़े मजेदार काटरून देख रहे हैं. सुशील ने कहा, जो बिजली, सड़क, रोजगार की बात करेगा, जनता उसके साथ होगी.
कटोरिया विधानसभा क्षेत्र के बौंसी में जनार्दन हेंब्रम मिले. चुनाव की चर्चा पर छूटते ही बोले, अभी तो सबकी बात सुन रहे हैं. सब लोग बड़े-बड़े वायदे कर रहे हैं.
पूरी हो जाती योजनाएं, तो चमक जाता जिला
बांका की कई ऐसी योजनाएं हैं, जिन्हें पूरा कराने में नेता दिलचस्पी लेते तो जिला चमक जाता. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में करोड़ों की योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी है. समुखिया मोड़ में चंद्रशेखर सिंह ने सिरामिक फैक्टरी का शिलान्यास किया था. उनका सपना नाइट्रोजन निर्माण के लिए भी फैक्टरी बनाने का था लेकिन वह पूरा नहीं हो पाया. अधूरे भवन जर्जर हो चुके हैं. बौंसी स्थित सिरिया में पावर प्लांट निर्माण की आधारशिला रखी गयी थी. नि:शक्त पुनर्वास केंद्र का निर्माण किया गया, वह काम नहीं कर रहा है. रेडक्रॉस भवन बना कर तैयार हो गया, पर वह चालू नहीं हो पाया. पीबीएस कॉलेज के मैदान में स्टेडियम के निर्माण कार्य का सिर्फ शिलान्यास किया गया.
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