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आतंकवाद से लड़ने का सर्वोत्तम तरीका है रविन्द्रनाथ ठाकुर एवं गांधी की विचारधारा: प्रणब

Updated at : 03 Jun 2015 12:42 AM (IST)
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आतंकवाद से लड़ने का सर्वोत्तम तरीका है रविन्द्रनाथ ठाकुर एवं गांधी की विचारधारा: प्रणब

स्टॉकहोम: आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चुनौती करार बताते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि रविन्द्रनाथ ठाकुर और महात्मा गांधी द्वारा सुझाया गया सच्चाई, वार्ता और अहिंसा का मार्ग ही सर्वोत्तम है. यहां उप्पसला विश्वविद्यालय में मुखर्जी ने कहा, आतंकवाद क्या है, आतकंवाद की परिभाषा क्या है. आतंकवाद धर्म, सीमा […]

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स्टॉकहोम: आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चुनौती करार बताते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि रविन्द्रनाथ ठाकुर और महात्मा गांधी द्वारा सुझाया गया सच्चाई, वार्ता और अहिंसा का मार्ग ही सर्वोत्तम है.

यहां उप्पसला विश्वविद्यालय में मुखर्जी ने कहा, आतंकवाद क्या है, आतकंवाद की परिभाषा क्या है. आतंकवाद धर्म, सीमा या राष्ट्रीयता का सम्मान नहीं करता है. वह स्र्फि एक ही चीज में विश्वास करता है और वह है अनियंत्रित विनाश. वर्तमान में आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चुनौती है. राष्ट्रपति ने कहा कि शांति की स्थापना सिर्फ मानवीय नैतिकता एवं बुद्धिवादी एकजुटता के आधार पर की जा सकती है क्योंकि महज राजनीतिक और आर्थिक समझौते अपने दम पर दीर्घकालीन शांति की स्थापना नहीं कर सकते हैं.

ठाकुर और गांधी: क्या वैश्विक शांति में उनकी समकालीन प्रासंगिकता है, विषय पर बोलते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर को दृढ विश्वास था कि वैश्विक शांति उस वक्त तक स्थापित नहीं की जा सकती जबतक बड़े और शक्तिशाली राष्ट्र सीमा विस्तार और छोटे राष्ट्रों पर नियंत्रण की अपनी इच्छाओं को त्याग नहीं देते. राष्ट्रपति ने कहा, यदि ठाकुर वैश्विक शांति के बुद्धिवादी और आध्यात्मिक पथप्रदर्शक थे तो वह महात्मा हैं जिन्होंने दुनिया को दिखाया कि सत्याग्रह और अहिंसा का उपयोग एक न्यायपूर्ण दुनिया के निर्माण में किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, मुङो यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि रविन्द्रनाथ ठाकुर और महात्मा गांधी द्वारा सुझाया गया सच्चाई, खुलापन, संवाद और अहिंसा का मार्ग ही असहिष्णुता, कट्टरता और आतंकवाद से जूझ रही दुनिया को आगे ले जाने का सर्वोत्तम मार्ग है. उसी मंच से संबोधित करते हुए, जहां से 1921 में गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर ने नोबेल सम्मान मिलने से बाद संबोधित किया था, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उनके मूल्य और उनकी दूरदर्शिता अन्य किसी भी वक्त के मुकाबले वर्तमान में ज्यादा प्रासंगिक हैं. वह भी एक ऐसी दुनिया में जहां लोग बड़ी बेचैनी से संघर्षों और तानव का स्थायी हल खोज रहे हैं.

उन्होंने कहा, इसलिए इन मूल्यों को दूर-दूर तक, विशेष रुप से युवाओं तक फैलाने की जरुरत है. राष्ट्रपति ने कहा कि ठाकुर की नजरों में युद्ध आक्रामक पश्चिमी भौतिकतावाद का परिणाम है, जो 20वीं सदी के आरंभ में विकसित हुआ, जब विज्ञान और आध्यात्म का रिश्ता टूटा. मुखर्जी ने कहा, कवि रविन्द्रनाथ के अनुसार, पूरब और पश्चिम को समान आधार और बराबरी पर मिलना चाहिए, जहां पूरब और पश्चिम दोनों से ज्ञान की दो धाराएं फूटती हैं और उनकी एकता में एक ऐसे समान सत्य को देखा जाता है जो पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है. जैसा कि उन्होंने सारगर्भित तरीके से कहा, दुनिया पर बुद्ध ने जीत हासिल की एक्लेस्जेंडर ने नहीं. उन्होंने कहा कि ऐसा बिरले ही होता है जब दो संत, दो लोग जो ना सिर्फ अपने वक्त के लोगों को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी संबोधित करने में सक्षम होते और निकटता से काम करते हैं.

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