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ब्रेक के बाद फिर लौटे मुख्‍यमंत्री, खेला बड़ा दावं रोक हटी, फैसलों की मांझी झड़ी

Updated at : 19 Feb 2015 6:17 AM (IST)
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ब्रेक के बाद फिर लौटे मुख्‍यमंत्री, खेला बड़ा दावं रोक हटी, फैसलों की मांझी झड़ी

पटना: पटना हाइकोर्ट की रोक हटते ही बुधवार को मांझी सरकार ने ताबड़तोड़ फैसले लिये. 01, अणो मार्ग पर पांच घंटे चली कैबिनेट की बैठक में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया. हालांकि, महिलाओं के लिए आरक्षण गजटेड पदों को छोड़ कर समूह ‘ग’ और ‘घ’ के पदों […]

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पटना: पटना हाइकोर्ट की रोक हटते ही बुधवार को मांझी सरकार ने ताबड़तोड़ फैसले लिये. 01, अणो मार्ग पर पांच घंटे चली कैबिनेट की बैठक में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया. हालांकि, महिलाओं के लिए आरक्षण गजटेड पदों को छोड़ कर समूह ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर ही लागू होगा. बैठक में चार लाख नियोजित शिक्षकों को वेतनमान के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी के गठन का फैसला किया गया है, जो इससे संबंधित तमाम पहलुओं पर विचार करेगी. समिति में कौन होंगे, इसका निर्णय नहीं किया गया है.
शाम चार बजे शुरू हुई कैबिनेट की बैठक में नौ एजेंडे पहले से प्रस्तावित थे, जबकि 13 नये एजेंडों को कैबिनेट ने कुछ ब्रेक लेने के बाद शो-मोटो (अन्यान्य) लेते हुए बाद में शामिल किया. इसमें सबसे ज्यादा कृषि और ग्रामीण विकास विभाग के एजेंडों को मंजूरी दी गयी. लंबे समय से चली आ रही राज्य पुलिसकर्मियों की मांग को मंजूर करते हुए सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को साल में 13 महीने का वेतन देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गयी.

इसका एलान जदयू सरकार के नौवें वर्ष पूरे होने पर सीएम मांझी ने की थी. मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत विधायक व विधान पार्षद अब दो करोड़ के स्थान पर अब सालाना तीन करोड़ रुपये के कार्यो की अनुशंसा कर सकेंगे. होमगार्ड के जवान 58 के बजाय अब 60 वर्ष में रिटायर होंगे. हालांकि, 50 वर्ष के बाद उन्हें फिटनेस टेस्ट देना होगा. इसके अलावा उन्हें अब प्रतिदिन 300 रुपये के बजाय 400 रुपये भत्ता मिलेगा. यात्र भत्ता भी 20 से बढ़ा कर 50 रुपये कर दिया गया है. 20 साल की लगातार सेवा करनेवाले होमगार्ड के जवानों को रिटायरमेंट के बाद डेढ़ लाख रुपये मिलेंगे. इसी तरह किसान सलाहकारों को का मानदेय छह हजार रुपये से बढ़ा कर सात हजार रुपये कर दिया गया है. पंचायतों में निजी उच्च माध्यमिक स्कूलों और इंटर कॉलेजों को मान्यता देने से संबंधित अधिनियम में संशोधन किया जायेगा. इनमें बहाली के लिए आरक्षण की व्यवस्था होगी. ग्रामीण विकास विभाग में 2007 में संविदा पर नियुक्त किये गये कर्मियों को पंचायती राज विभाग में लेखा सहायक के पदों पर बहाली में वरीयता मिलेगी.स्कूलों में ललित कला और संगीत शिक्षकों के पदों का सृजन किया गया. बाद में इन पर बहाली की जायेगी.

कैबिने की बैठक में मांझी खेमे के सभी आठ मंत्री शामिल हुए. खास यह कि जितनी देर कैबिनेट चली, पूर्व सांसद साधु यादव, निर्दलीय विधायक पवन जायसवाल समेत अन्य मांझी खेमे के अन्य कई समर्थक सीएम हाउस के अंदर बैठे रहे.
राम बालक महतो हटे, विनोद कुमार कंठ बने नये महाधिवक्ता
मांझी सरकार ने महाधिवक्ता राम बालक महतो को हटा कर उनके स्थान पर हाइकोर्ट के वरीय अधिवक्ता विनोद कुमार कंठ को नया महाधिवक्ता बनाने का निर्णय लिया है. संविधान के विशेषज्ञ माने जानेवाले श्री कंठ बागी विधायकों की सदस्यता बहाल करने में उनकी ओर से बहस की थी.महतो को नीतीश सरकार ने 2010 में महाधिवक्ता नियुक्ति किया था.

पर फैसले बहुमत के बाद ही होंगे लागू
पटना: पटना हाइकोर्ट ने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को बड़ी राहत दी है. मुख्य न्यायाधीश एल नरसिम्हा रेडी और न्यायाधीश विकास जैन के खंडपीठ ने मुख्यमंत्री श्री मांझी की ओर से दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि मुख्यमंत्री होने के नाते मांझी कोई भी फैसला ले सकते हैं. विषय चाहे नीतिगत हो या वित्तीय, उन्हें निर्णय लेने का अधिकार होगा. लेकिन, इन फैसलों पर अमल 21 फरवरी के बाद ही हो पायेगा. कोर्ट के निर्णय के अनुसार मांझी सरकार के निर्णयों पर अमल उनकी सरकार को विधानसभा में बहुमत मिल जाने के बाद हो पायेगा.
राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने 20 फरवरी को मुख्यमंत्री श्री मांझी को अपनी सरकार का बहुमत विधानसभा में साबित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट के इस आदेश के बाद मांझी कैबिनेट को नीतिगत फैसले लेने का अधिकार मिल गया है. कोर्ट के संशोधित फैसले के कुछ ही देर बाद मांझी के सरकारी आवास 01, अणो मार्ग पर राज्य कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये. इसके पहले सोमवार को पटना हाइकोर्ट के न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी और समरेंद्र प्रताप सिंह के खंडपीठ ने मांझी सरकार पर नीतिगत और वित्तीय फैसले लेने पर रोक लगा दी थी. जदयू प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार की याचिका पर कोर्ट ने यह रोक लगायी थी.

बड़े फैसले
सरकारी नौकरी में महिलाओं को 35 फीसदी आरक्षण
नियोजित शिक्षकों को वेतनमान के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन
सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को अब साल में 13 महीने का वेतन
किसान सलाहकारों का मानदेय बढ़ा, अब हर माह मिलेंगे 7000
होमगार्ड अब 60 साल में रिटायर्ड, मानदेय और यात्र भत्ता भी बढ़ा
सभी 46 हजार राजस्व ग्राम में एक-एक स्वच्छता कर्मी होंगे, मिलेगा 5000 मासिक मानदेय
स्कूलों में ललित कला और संगीत शिक्षकों के पद का सृजन
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत अब विधायक व विधान पार्षद साल में कर सकेंगे तीन करोड़ तक की अनुशंसा
राम बालक महतो को हटा कर विनोद कुमार कंठ को बनाया गया नया महाधिवक्ता
कपरूरी ठाकुर शोध संस्थान की होगी स्थापना
स्वामी सहजानंद सरस्वती शोध संस्थान खुलेगा
बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को एमएसीपी के तहत द्वितीय वित्तीय उन्नयन
मनरेगा के तहत सामाजिक अंकेक्षण कराने के लिए एक स्वतंत्र निदेशालय
सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन कार्यक्रम के तहत 13.08 करोड़ मंजूर
कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत मेले से बाहर से यंत्र खरीदने पर किसानों को अनुदान
पटना के उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान को सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत निबंधन
बिहार पशुपालन सेवा के आठ पदाधिकारियों को अधिकाल वेतनमान
सुपौल जिले के राघोपुर में पॉलिटेक्निक की स्थापना के लिए 48.36 करोड़
पुपरी में पॉलिटेक्निक की स्थापना के लिए 50.56 करोड़
कृषि विभाग में आजीविका परियोजना के तहत 6.65 करोड़ जारी
वैशाली जिले के नगमा पटेरी गांव में ओपी की स्थापना
मिड डे मील के अंतर्गत रसोइये को एक हजार रुपये प्रति माह मानदेय देने के लिए केंद्र सरकार को अनुशंसा
सुन्नी वक्फ बोर्ड को 1.5 करोड़ और शिया वक्फ बोर्ड को 80 लाख रुपये अनुदान
मदरसों में कंप्यूटरीकरण को बढ़ावा देना
उर्दू निदेशालय में खाली पड़े पदों को भरा जायेगा
मुफ्त बिजली पर 10 हजार करोड़
राज्य में किसान परिवारों की कुल संख्या 1.25 करोड़ है. इसमें करीब 98 फीसदी या 1.22 करोड़ किसान ऐसे हैं, जिनके पास पांच एकड़ या इससे कम जमीन है. अगर इन्हें बिजली मुफ्त दी जाती है, तो इससे करीब 10 हजार करोड़ का बोझ बढ़ेगा. अगर एक किसान रोजाना कृषि कार्यो के लिए औसतन 10 यूनिट बिजली की खपत करता है, तो 1.22 करोड़ परिवार रोजाना 12.20 करोड़ यूनिट रोजाना की खपत होगी. अगर बिजली की औसत लागत प्रति यूनिट 2.50 रुपये भी मान की जाये, तो इस पर रोजाना करीब 30.5 करोड़ रुपये की लागत आयेगी. इस तरह महीने में 915 करोड़ रुपये महीना और सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपये का
बोझ बढ़ेगा.
विधायक फंड : 600 करोड़ का बोझ
राज्य सरकार विधायक फंड को दो से बढ़ाकर तीन करोड़ कर दिया गया है. इससे सरकारी खजाने पर 600-700 करोड़ रुपये सालाना का बोझ बढ़ेगा.
वर्तमान वित्तीय स्नेत की स्थिति
राज्य में वर्तमान वित्तीय स्नेतों में केंद्रीय कर में राज्य की हिस्सेदारी से प्राप्त होने वाले रुपये, वित्त आयोग से आवंटन और राज्य के आंतरिक टैक्स स्नेत (मसलन, वाणिज्य कर, खनन, परिवहन समेत अन्य) प्रमुख हैं. इसमें इस वर्ष केंद्रीय टैक्स में राज्य की हिस्सेदारी 41 करोड़ रुपये प्राप्त होना था, लेकिन अभी तक महज 30 हजार करोड़ रुपये ही आये हैं. केंद्र की इस कटौती का असर भी यहां के योजना आकार पर पड़ता है. इसके अलावा राज्य के आंतरिक स्नेत से करीब 29 हजार करोड़ रुपये एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें अभी तक 25 हजार करोड़ रुपये आ चुके हैं. फिर भी चार हजार करोड़ रुपये का गैप है. इस तरह के छोटे गैप के कारण राज्य का बजट प्रभावित हो सकता है.
घोषणाओं की राह कठिन
मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की घोषणाओं की बड़ी-बड़ी झड़ी भले ही फिलहाल लोगों को बड़ी राहत देने वाली जरूर लग रही हैं, लेकिन इनका व्यापक असर राज्य के बजट पड़ेगा. इससे योजना का आकार छोटा होगा. यानी योजना मद में रुपये खर्च करने के लिए पैसे कम पड़ेंगे. योजना आकार छोटा होने पर राज्य में विकासात्मक कार्यो की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. नयी योजनाएं शुरू करने में काफी परेशानी होगी. बड़ी योजनाएं शुरू ही नहीं हो पायेंगी. राज्य के आय के स्नेत सीमित हैं. ऐसे में अगर इस तरह के खर्च एकदम से बढ़ जायेंगे, तो वित्तीय स्थिति पर काफी प्रभाव पड़ेगा.
31850
करोड़ सालाना बोझ बढ़ेगा 12 व 13 फरवरी को की गयी घोषणाओं से
101850
करोड़ का हो जायेगा गैर-योजना मद
140000
करोड़ का है पेश होनेवाला बजट
38150
करोड़ बचेंगे योजना आकार के लिए, जो मौजूद योजना आकार 40 हजार करोड़ से भी कम होगा
घोषणाएं महज राजनीतिक
मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की ओर से जो घोषणाएं की जा रही हैं, वो केवल राजनीतिक हैं. राज्य की आर्थिक व्यवस्था में ये धरातल पर नहीं टिकती हैं. अभी जो घोषणाएं हो रही हैं, वो आनेवाली सरकार के राह में कांटे के समान होंगी. अर्थशा का व्यक्ति होने के नाते मैं ये कहूंगा, जो घोषणाएं हाल में मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने की हैं, इससे लाखों लोगों को फायदा होगा. लेकिन सवाल ये है कि घोषणाओं के अमल में आनेवाला हजारों करोड़ रुपये कहां से आयेगा?
डॉ रामभरत ठाकुर अध्यक्ष, पीजी अर्थशास्त्र विभाग, एलएनएमयू, दरभंगा
वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ायेगा
आम जनता इन घोषणाओं का भले ही स्वागत करे, लेकिन बिना रिसोर्स के बारे में समुचित तरीके से विचार किये इन घोषणाओं से वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ा सकता है. हाल में की गई बेतरतीब घोषणाएं ‘वेल थॉउट’ (अच्छी तरह सोची-समझी) घोषणाएं नहीं हैं. इससे राज्य में आर्थिक असंतुलन उत्पन्न हो सकता है. बजट असंतुलित होगा. अगर योजना आकार बहुत छोटा हो गया, तो राज्य में तमाम विकासात्मक कार्यो की रफ्तार ठहर जायेगी. इससे राज्य का विकास नहीं हो पायेगा.
प्रो. राजलक्ष्मी, प्रोफेसर, अर्थशास्त्र, पटना विश्वविद्यालय
इच्छा से अर्थशास्त्र नहीं चलता
इस तरह की घोषणाएं राज्य की लालसा हो सकती है. परंतु इच्छा से अर्थशास्त्र नहीं चलता है. इसके लिए टिकाऊ कदम उठाने की जरूरत है. बिहार का ग्रोथ रेट पिछले आठ साल में काफी बढ़ा है. यहां की अर्थव्यवस्था काफी प्रयास के बाद ‘आइसीयू’ से बाहर आयी है. इसे बढ़ाने की जरूरत है. ऐसे में अगर इस तरह के कदम सोच-समझ कर नहीं उठाये गये, तो फिर वैसी ही स्थिति आने का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में अगर अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, तो इसे संभालना बेहद मुश्किल हो जायेगा.
प्रो नलिन, अर्थशास्त्री, आइआइटी

सीएम पद की गरिमा को देखते हुए कोर्ट ने दिया आदेश : जदयू
प्रदेश जदयू ने कहा कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की हैसियत से फैसले लेने पर रोक हटाने का पटना हाइकोर्ट का आदेश सीएम पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ अजय आलोक ने बयान जारी कर कहा कि मांझी सरकार को इससे सीख लेनी चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत दी कि उन्हें अगले 48 घंटे में कोई बड़ी घोषणा और निर्णय नहीं लेना चाहिए, वरना यह बेशर्मी की हद हो जायेगी.
नीतीश के जदयू विधानमंडल दल के नेता चुने जाने पर फैसला 23 को
पटना. पटना हाइकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी राहत दी. कोर्ट ने नीतीश कुमार को जदयू विधानमंडल दल के नेता के रूप में चुने जाने को चुनौती देनेवाली याचिका की सुनवाई 23 फरवरी तक के लिए टाल दी है. अब 23 फरवरी को इस पर सुनवाई होगी. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के निर्देश पर जदयू विधानमंडल दल की बैठक में नीतीश कुमार को विधानमंडल दल का नया नेता चुना गया था, जिसे मांझी समर्थकों ने कोर्ट में चुनौती दी है.
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