मुहल्लेवासियों ने ओढ़ने के लिए कंबल और सोने के लिए दरी उपलब्ध करायी
Updated at : 09 Dec 2014 8:04 AM (IST)
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रांची : रात के आठ बज रहे हैं. मतदानकर्मी अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंच चुके हैं. मतदानकर्मी जैसे ही स्कूल पहुंचे, हैरान रह गये. यहां न तो ठहरने की व्यवस्था और न ही बैठने की जगह. जिस कमरे में मतदानकर्मियों को ठहरना है, वह कमरा गंदगी से भरा पड़ा है. कमरे में बेंच तक की […]
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रांची : रात के आठ बज रहे हैं. मतदानकर्मी अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंच चुके हैं. मतदानकर्मी जैसे ही स्कूल पहुंचे, हैरान रह गये. यहां न तो ठहरने की व्यवस्था और न ही बैठने की जगह. जिस कमरे में मतदानकर्मियों को ठहरना है, वह कमरा गंदगी से भरा पड़ा है. कमरे में बेंच तक की व्यवस्था नहीं है. कमरे तो हैं, पर खिड़कियों में पल्ले नहीं हैं.
एक स्कूल तो ऐसा मिला, जहां मतदान कर्मियों को अपने पैसे से बिजली का तार खरीदना पड़ा और बिजली की व्यवस्था करनी पड़ी. बाद में किसी तरह आसपास के घरों से मिन्नत कर बैठने के लिए कुर्सियां मंगवानी पड़ी. मतदान कर्मी काम कर रहे हैं, लेकिन यह परेशानी होगी, उन्होंने सोचा नहीं था. सुबह होने में आठ घंटे बाकी हैं. कैसे कटेगी रात, यह सोच कर सभी हैरान हैं. यह स्थिति शहर के स्कूलों में बने बूथों की है. प्रभात खबर की टीम ने देर शाम शहर के कुछ स्कूलों की स्थिति का जायजा लिया.
थड़पखना राजकीयकृत मध्य विद्यालय
बूथ संख्या 269. यहां मतदानकर्मी दस्तावेजों को व्यवस्थित करने में लगे हुए हैं. अव्यवस्था से सभी परेशान हैं. बिजली नहीं हैं. एक छोटी सी एलक्ष्डी लाइट जल रही है. जिसकी रोशनी एक पन्नों तक ही सीमित है. ठंड भी इतनी, की पूरा कमरा ठंडा हो चुका है. खिड़की बड़ी है पर उसके पल्ले गायब हैं. पूरे कमरे में धूल भरा पड़ा है. यहां के मुहल्लेवासियों ने अपने घर से कंबल व सोने के लिए दरी की व्यवस्था इनके लिए की है.
राजकीय बिहारी परदा स्कूल भुताहा तालाब
शहर की हृदयस्थली श्रद्धानंद रोड स्थित विद्यालय में घोर अभाव है. यहां तीन बूथ 140,141 व 142 है. यहां की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है. यहां बिजली की व्यवस्था नहीं थी. कुछ देर तक तो एलक्ष्डी लाइट से काम किया, लेकिन जब परेशानी होने लगी, तो तीनों बूथों के मतदान कर्मियों ने बिजली की व्यवस्था की. खुद से तार खरीद कर जैसे-तैसे तार जोड़ कर बिजली की व्यवस्था की. पूरा कमरा गंदा है.
‘सर! हिंदी नहीं जानता हूं, परेशानी हो रही है’
भुताहा तालाब के राजकीय बिहारी परदा स्कूल के बूथ संख्या 141 में पीठासीन पदाधिकारी हैं. उनकी अलग परेशानी है. वह हिंदी नहीं जानते है, जबकि चुनाव आयोग के सारे दस्तावेज हिंदी में लिखे हैं. वह चुनाव संबंधी सारे दस्तावेजों को मोबाइल में डाउनलोड कर लाये हैं. उसे देख वे दस्तावेजों को भर रहे हैं. जब इस संबंध में उनसे पूछा गया, तो उन्होंने कहा: हिंदी नहीं जानते हैं, लेकिन पीठासीन पदाधिकारी बना कर भेज दिया गया, क्या करें. जिला प्रशासन ने उन्हें चुनाव में जिम्मेवारी देकर परेशानी बढ़ा दी है.
प्रशासन ने सत्तारूढ़ दल केपोस्टर-बैनर नहीं हटाये
अन्य दलों की होर्डिग्स, पोस्टर, बैनर दो दिन पहले हटा दिये गये
रांची : जिला प्रशासन ने रांची और हटिया विस के इलाकों से झामुमो के पोस्टर, बैनर व होर्डिग्स नहीं हटाये हैं. चुनाव के पूर्व निर्वाचन आयोग के निर्देश पर सभी राजनीतिक दलों का पोस्टर, बैनर और मतदाताओं को आकर्षित करनेवाली सामग्रियों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का निर्देश है. इस संबंध में संबंधित जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाची पदाधिकारी को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं. बावजूद इसके झामुमो का प्रचार बैलून, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के कट आउट नहीं हटाये गये हैं. रांची विस क्षेत्र से भी पार्टी के आधे दर्जन से अधिक होर्डिग्स, कट आउट नहीं हटाये गये हैं.
कहां-कहां से नहीं हटाये गये हैं होर्डिग्स
झामुमो के छोटे कट आउट ओवरब्रिज के नीचे से तक रांची रेलवे स्टेशन तक लगे हुए हैं. इसके अलावा लालपुर चौक में भी यह कट आउट लगा हुआ है. प्लाजा सिनेमा, थड़पखना, हनुमान मंदिर मेन रोड, अलबर्ट एक्का चौक के पास, होटल कैपिटोल हिल से आगे लगे होर्डिग्स भी नहीं हटाये गये हैं.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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