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पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?

Updated at : 19 Dec 2019 10:52 PM (IST)
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पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?

<figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/10204/production/_110225066_78a59dd4-41cf-4c88-863b-4e01283fcc0e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति और रिटायर्ड जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को देशद्रोह के मामले में दी गई फांसी की सज़ा लोगों के दिमाग़ में कई सवाल खड़े कर रही है. </p><p>सोशल मीडिया और टीवी बहसों में इससे जुड़े सवाल उठाए जा […]

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<figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/10204/production/_110225066_78a59dd4-41cf-4c88-863b-4e01283fcc0e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति और रिटायर्ड जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को देशद्रोह के मामले में दी गई फांसी की सज़ा लोगों के दिमाग़ में कई सवाल खड़े कर रही है. </p><p>सोशल मीडिया और टीवी बहसों में इससे जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं. </p><p>राजनीति से जुड़े लोग हों या पाकिस्तानी आर्मी के प्रतिनिधि, सभी फ़ैसले के बारे में चर्चा कर रहे हैं और भविष्य में इसके परिणामों के बारे में सोच रहे हैं. </p><p>विशेष अदालत से परवेज़ मुशर्रफ़ को दोषी ठहराए जाने के बाद अब पीटीआई सरकार का अगला क़दम क्या होगा, और अब उनका बचाव कौन करेगा? ये समझने के लिए बीबीसी ने कुछ क़ानूनी विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों से बात करने की कोशिश की. </p><p>विशेष अदालत के फ़ैसले के मुताबिक़, जनरल रिटायर्ड परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला तीन नवंबर 2007 को पाकिस्तान में आपातकाल लगाने से जुड़ा हुआ है. मुशर्रफ़ ने देश में आपातकाल घोषित कर संविधान को निलंबित कर दिया था.</p><p>और उन्हें पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद VI के तहत मौत की सज़ा सुनाई गई है. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/15024/production/_110225068_672460a4-82f1-4723-95ff-f4425f81e8e7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><h1>परवेज़ मुशर्रफ़ और संघीय सरकार के पास क्या विकल्प हैं?</h1><p>पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर ख़ान ने बयान दिया है कि अगर अपील दायर की जाती है तो सरकार पूर्व सैन्य प्रमुख का अदालत में बचाव करेगी. </p><p>क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुना देता है, तो संसद के पास ये शक्ति है कि वो ‘एक्ट ऑफ पार्लियामेंट’ लागू कर सज़ा को रोक सकती है. </p><p>उनके मुताबिक़ विशेष अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने से पहले मुजरिम को तीस दिन के अंदर कोर्ट के सामने &quot;आत्म समर्पण&quot; करना होता है. </p><p>संविधान से जुड़े मामले और आपराधिक मामले देखने वाले वकील अजमद शाह कहते हैं कि संविधान के उल्लंघन करने के दोषी ठहराए गए परवेज़ मुशर्रफ़ को 2016 में घोषित अपराधी की सूची में डाला गया, क्योंकि वो विशेष अदालत में पेश ही नहीं होते थे. &quot;ऐसे में मुशर्रफ़ और किसी आम अपराधी के बीच बड़ा अंतर है.&quot; </p><p>अजमद शाह कहते हैं कि अगर परवेज़ मुशर्रफ फ़ैसले के 30 दिन के अंदर अपील दायर नहीं करते, तो विशेष अदालत का फ़ैसला अंतिम होगा. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/1B8C/production/_110225070_be8a5828-925e-49ef-9729-00703de48254.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>फ़ैसले के ख़िलाफ़ संघ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की बात पर वो कहते हैं कि न्यायिक इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि अगर फ़ैसला आवेदक के पक्ष में आता है, तो वो फ़ैसले को चुनौती देने के लिए उच्च अदालतों में जाएगा और कहेगा कि फ़ैसला उसके पक्ष में क्यों दिया गया. </p><p>ये याद रखना चाहिए कि संघीय सरकार, परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह के मामले में याचिकाकर्ता थी और याचिका, गृह सचिव की ओर से दायर की गई थी और विशेष अदालत ने अपने फ़ैसले में संघीय सरकार की पोजिशन को महत्व दिया है. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/69AC/production/_110225072_b53a26b6-d158-4fb9-b179-d0198cd182a3.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>क्या परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है? </h1><p>पूर्व अटॉर्नी जनरल इरफ़ान क़ादिर कहते हैं कि मौजूदा सरकार पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ संविधान के उल्लंघन से जुड़े मामले को ठीक से हैंडल नहीं कर पाई.</p><p>उनके मुताबिक़ विशेष अदालत के फैसले से पहले, संघीय अदालत ज़रूरत पड़ने पर मामला वापस ले सकती थी, क्योंकि क़ानून के मुताबिक, अभियोजन अपनी अपील वापस ले सकती है, जबकि ऐसा नहीं किया गया. </p><p>उन्होंने कहा कि अदालतें अभियोजन का काम नहीं कर सकतीं. </p><p>बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी मुशर्रफ़ की फांसी की सज़ा को बरकरार रखता है और अटॉर्नी जनरल राय देते हैं कि न्यायिक फ़ैसला लागू नहीं किया जाना चाहिए, तो संघीय सरकार इसपर अमल करेगी. </p><p>इरफ़ान क़ादिर कहते हैं कि जब वो अटॉर्नी जनरल थे, उन्होंने नैब के चेयरमैन फसीह बुख़ारी को राय दी थी कि नेशनल रिकन्सिलेशन ऑर्डिनेंस (एनआरओ) पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के कुछ बिंदुओं को लागू नहीं किया जाना चाहिए. और उनकी राय को माना गया था. </p><p>वो कहते हैं कि दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि अगर न्यायिक फ़ैसले में कुछ खामिया होती हैं तो, संसद उस फैसले को लागू होने से रोकने के लिए प्रावधान कर सकती है. </p><p>इरफ़ान कादिर कहते हैं कि न्यायिक फ़ैसले ‘एक्ट ऑफ पार्लियामेंट’ से पलटे जा सकते हैं; जब न्यायशास्त्र और क़ानून बनाने वाले आमने सामने होते हैं तो कानून बनाने वालों की राय को तरजीह दी जाती है. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/105EC/production/_110225076_06ed0dd8-3104-4ea6-9a91-7d28ad0c44c7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>देश के संविधान का उल्लंघन करने वाले देशद्रोही? </h1><p>पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद छह के मुताबिक़, अगर कोई व्यक्ति संविधान का उल्लंघन करता है या उसके ख़िलाफ़ साजिश करता है तो, 23 मार्च, 1956 के बाद, इसे देशद्रोह का मामला माना जाता है और दोषी को उम्र क़ैद या फांसी की सज़ा दी जाती है. </p><p>हालांकि, इरफ़ान क़ादिर कहते हैं कि जब वो अटॉर्नी जनरल थे, तब उन्होंने पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ द्रेशद्रोह के मामले की कार्यवाही शुरू नहीं होने दी थी. </p><p>इरफ़ान कादिर कहते हैं कि उन्होंने पूर्व चीफ़ जस्टिस जवाद एस. ख्वाजा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच से कहा था कि पूर्व सैन्य प्रमुख ने संविधान का उल्लंघन किया है, लेकिन हर संविधान का उल्लंघन देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/1540C/production/_110225078_177f24a9-dfdc-466a-820a-c58d1069f567.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>क्या परवेज़ मुशर्रफ़ की गैर-मौजूदगी में अपील दायर की जा सकती है? </h1><p>आपराधिक मामलों में, अपराधियों को सुप्रीम कोर्ट में 30 दिन के अंदर अपील दायर करनी होती है. </p><p>लेकिन पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता फैसल चौधरी सवाल उठाते हैं कि अगर पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ़ की गैर-मौजूदगी में उन्हें मौत की सज़ा दी जा सकती है तो, उनकी गैर-मौजूदगी में इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर क्यों नहीं की जा सकती? </p><p>उन्होंने कहा कि नैब मामलों में फैसले अभियुक्त की गैर-मौजूदगी में दे दिए गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया. </p><p>दूसरी ओर, अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर ने घोषणा है कि सुप्रीम कोर्ट में विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी जाएगी, उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में नहीं रखा गया. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान: परवेज़ मुशर्रफ़ की फांसी रुक सकती है?" src="https://c.files.bbci.co.uk/1F74/production/_110225080_b9295679-4dcb-45a9-a79d-e425f12bc831.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><h1>सुप्रीम कोर्ट में परवेज़ मुशर्रफ़ का केस कौन लड़ेगा? </h1><p>अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर परवेज़ मुशर्रफ़ के वकील रहे हैं और उन्होंने विशेष अदालत में भी उनका केस देखा है. अब वो अभियोजन पक्ष की ओर से फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पाकिस्तान के चीफ लॉ ऑफिसर के तौर पर पेश होंगे. </p><p>पूर्व सैन्य प्रमुख के कुछ वकीलों ने भी घोषणा की है कि वो फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, लेकिन अभी ये साफ नहीं है कि क्या वो सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेंगे. </p><p>सत्ताधारी पार्टी के कुछ सदस्यों ने अटॉर्नी जनरल के काम को लेकर चिंता जताई है. </p><p>पहचान ज़ाहिर ना करने की शर्त पर पीटीआई के एक शीर्ष सदस्य ने बीबीसी से कहा कि जिस तरह से अटॉर्नी जनरल ने सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाने के मामले को सुप्रीम कोर्ट में हैंडल किया, उससे कुछ पार्टी नेताओं के मन में संदेह पैदा हुआ है. </p><p>वो दावा करते हैं कि मामले को सुप्रीम कोर्ट में ठीक से ना रखे जाने की वजह से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और उसके सहयोगियों को शर्मिंदगी सहनी पड़ी. </p><p>सत्ताधारी पार्टी एक सदस्य ने कहा कि जिस तरह से खैबर पख्तूनख्वाह में सेना की ओर से चलाए जा रहे डिटेंशन सेंटर्स पर पेशावर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को अनुचित ढंग से हैंडल किया गया, उसने कुछ पार्टी नेताओं ने मन में संदेह पैदा किया. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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