ePaper

हरियाणा विधानसभा में एक गांव के पांच विधायक

Updated at : 25 Oct 2019 11:04 PM (IST)
विज्ञापन
हरियाणा विधानसभा में एक गांव के पांच विधायक

<p>हरियाणा की राजनीति में देवीलाल ब्रांड का क़द काफी बड़ा रहा है. लेकिन करीब एक साल पहले इस ब्रांड की राजनीतिक हैसियत को बड़ा झटका लगा था जब देवीलाल द्वारा स्थापित पार्टी- इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) के दो टुकड़े हो गए थे.</p><p>एक तरफ़ हैं ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला जिनके बेटे […]

विज्ञापन

<p>हरियाणा की राजनीति में देवीलाल ब्रांड का क़द काफी बड़ा रहा है. लेकिन करीब एक साल पहले इस ब्रांड की राजनीतिक हैसियत को बड़ा झटका लगा था जब देवीलाल द्वारा स्थापित पार्टी- इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) के दो टुकड़े हो गए थे.</p><p>एक तरफ़ हैं ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला जिनके बेटे दुष्यंत चौटाला जननायक जनता पार्टी की अगुवाई कर रहे हैं और दूसरी तरफ़ खुद ओमप्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला जिनपर INLD के 19 विधायकों की बागडोर संभालने की ज़िम्मेदारी थी. </p><p>पार्टी टूटने के बाद लोग देवी लाल परिवार की राजनीति के भविष्य पर सवाल उठाने लगे थे. लेकिन हरियाणा की रोचक राजनीति ने इस बार पंजाब से सटे सिरसा ज़िले के चौटाला गांव से एक नहीं पांच विधायकों को हरियाणा विधानसभा में बैठा दिया. </p><p>इनमें सबसे अहम बनकर उभरे हैं अजय चौटाला के पुत्र दुष्यंत चौटाला और उनकी मां नैना चौटाला जो पहले आईएनएलडी पार्टी में थे और बाद में अपनी नई पार्टी जेजेपी बना ली. </p><p>दूसरी तरफ़ कांग्रेस के बाग़ी रंजीत चौटाला, जो रनिया से निर्दलीय विधायक चुने गए हैं. डबवाली से युवा चेहरे अमित सिहाग कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं. वो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. केवी सिंह के बेटे हैं और चौटाला गांव के ही देवी लाल ब्रांड का हिस्सा हैं. </p><p>और सबसे अलग तरीके की राजनीति और अपने अडिग स्वभाव के लिए जाने जाने वाले अभय चौटाला है जो इस बार फिर से सिरसा ज़िले की ऐलनाबाद विधानसभा से चुनकर विधान सभा में बैठेंगे.</p><h1>दुष्यंत चौटाला</h1><p>अब हरियामा में किंगमेकर कहे जाने वाले दुष्यंत चौटाला हरियाणा से बाहर वालों के लिए नया नाम हो सकते हैं, लेकिन उनका राजनीतिक सफर 2013 में ही अनौपचारिक तौर पर शुरू हो गया था, जब उनके पिता अजय चौटाला को 1999 -2000 जेबीटी घोटाले में दस साल की सज़ा हो गयी थी. </p><p>दुष्यंत उस समय विदेश में पढ़ाई कर रहे थे और बीच में ही हरियाणा आकर राजनीतिक विरासत को संभालना पड़ा.</p><p>जब देश में 2014 में नरेंद्र मोदी की आंधी में उत्तर भारत में बड़े-बड़े राजनेता हार गए थे, तब दुष्यंत हिसार से युवा सांसद चुने गए. अगले पांच साल तक वो अपने काम के लिए और सोशल मीडिया फॉलोइंग के लिए जाने गए. </p><p>अक्टूबर 2018 में जब ओम प्रकाश चौटाला ने उन्हें और उनके भाई को आईएनएलडी से निष्कासित कर दिया, तो दिसंबर 2018 में दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी यानी जेजेपी बना ली.</p><p>जेजेपी के बैनर तले वो 2019 का आम चुनाव लड़े, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. </p><p>लेकिन इस विधान सभा चुनाव में दुष्यंत की पार्टी ने दस सीटों पर जीत दर्ज की है.</p><p>दुष्यंत खुद जींद ज़िले के उचाना कला सीट से बीजेपी की प्रेम लता को हराकर चुनाव जीते है. प्रेम लता पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह की पत्नी हैं और इस सीट से ओम प्रकाश चौटाला भी चुनाव जीत चुके हैं.</p><h1>नैना चौटाला</h1><p>नैना चौटाला, पूर्व विधायक अजय चौटाला की पत्नी और दुष्यंत चौटाला की मां हैं, जो 2014 में पहली बार डबवाली सीट से विधायक चुनी गयी थीं. </p><p>उससे पहले तक नैना चौटाला का दायरा घर तक ही सीमित था. चौटाला परिवार में राजनीति में आने वाली वो पहली महिला थीं. </p><p>जब डबवाली से विधायक उनके पति अजय चौटाला को 2013 में जेल हो गयी तो उनकी जगह नैना ने आईएनएलडी की टिकट से चुनाव लड़कर जीता.</p><p>अजय चौटाला की पूरे हरियाणा में राजनीतिक पकड़ होने के बावजूद नैना ने अपने आपको डबवाली सीट तक ही सीमित रखा और कभी बाहर के लोगों के सामने पब्लिक मीटिंग नहीं की. </p><p>लेकिन करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने महिलाओं के लिए ‘हरी चुनरी की चौपाल’ नाम से कार्यक्रम शुरू किया और अपनी पकड़ मज़बूत की. </p><p>जब 2019 का विधानसभा चुनाव आया तो नैना ने अपनी डबवाली की सीट छोड़कर भिवानी ज़िले की बाढड़ा सीट से चुनाव लड़ा और जीत लिया. जेजेपी के दस विधायकों में से एक नैना भी हैं.</p><h1>अभय चौटाला</h1><p>अभी एक साल पहले अभय चौटाला हरियाणा में 19 विधायकों की पार्टी, आईएनएलडी की अगुवाई करने वाले सदन में विपक्ष के नेता थे और उनकी पार्टी टूटने के बाद और विधान सभा चुनाव के परिणाम के बाद वो अपनी पार्टी से अकेले विधायक चुने गए हैं. बाकी सभी सीटों पर उनके प्रत्याशी चुनाव हार गए.</p><p>साल 2000 में राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले अभय चौटाला, पहली बार सिरसा ज़िले के रोड़ी हलके से विधायक चुनकर गए थे. </p><p>फिर अभय ने 2009 का ऐलनाबाद से उपचुनाव जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया और फिर दोबारा से ऐलनाबाद से चुनाव जीता. </p><p>जैसे ही गुरुवार को चुनाव का नतीजा आया, अभय सिंह चौटाला ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वो ये तो नहीं कह सकते कि सरकार किस पार्टी कि बनेगी पर वो कांग्रेस पार्टी के साथ कभी नहीं जाएंगे.</p><p>उन्होंने ये भी कहा कि जेजेपी को भी कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाना चाहिए क्योंकि कांग्रेस के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा के समय में ही उनके पिताजी ओम प्रकाश चौटाला और भाई अजय चौटाला को सज़ा मिली थी और उसमें हुड्डा का हाथ था.</p><p>2019 वाले चुनाव ने अभय की जीत पर उनको विधानसभा तो पंहुचा दिया लेकिन देवी लाल की विरासत की लड़ाई में वो अपने भतीजे जेजेपी से पिछड़ गए.</p><h1>रंजीत सिंह</h1><p>देवी लाल के तीसरे बेटे रंजीत सिंह को 1989 तक हरियाणा में वो रुतबा हासिल था, जो बाद में ओम प्रकाश चौटाला को हासिल हुआ. </p><p>क्योंकि जब देवी लाल को उप प्रधानमंत्री बनने का न्योता मिला, तो उनके सामने प्रश्न यही था कि हरियाणा कि बागडोर वो किसे सौंपकर जाएं. एक तरफ थे उनके बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला और दूसरी तरफ थे रंजीत सिंह. </p><p>रंजीत सिंह देवी लाल सरकार में कृषि मंत्री रह चुके थे और देवी लाल का काम संभालते थे. ज़्यादातर विधायकों का मत उनको हासिल था, दूसरी तरफ चौटाला जो कि अपनी मेहनत और कार्यकर्ताओं पर पकड़ के कारण जाने जाते थे. </p><p>देवी लाल ने ओम प्रकाश चौटाला को चुना और रंजीत सिंह लोक दल से अलग होकर कांग्रेस में चले गए. दो बार रानिया विधानसभा से हार का सामना कर चुके रंजीत को इस बार कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की. </p><p>रंजीत को एक बार राज्य सभा भी भेजा जा चुका है. रंजीत सिंह पहले ऐसे निर्दलीय विधायक हैं जिनका वीडियो बीजेपी नेताओं के साथ वायरल हुआ और जिसमें वो भाजपा को समर्थन देने की बात कहते नज़र आ रहे हैं.</p><h1>अमित सिहाग</h1><p>अमित सिहाग का परिचय उनके पिता डॉक्टर केवी सिंह के कारण है. </p><p>सिंह पहले डबवाली से चुनाव लड़ते रहे और कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री के ओएसडी भी रह चुके हैं. </p><p>डॉक्टर केवी सिंह के पिता का नाम गणपत राम था, वो साहब राम के बेटे थे जो देवी लाल के भाई थे.</p><p>अमित सिहाग यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और इस बार उनका मुक़ाबला देवी लाल परिवार के ही आदित्य चौटाला से था.</p><p>आदित्य देवी लाल के सबसे छोटे पुत्र जगदीश के पुत्र हैं. वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और अमित सिहाग से चुनाव हार गए. </p><p>डबवाली सीट पर पिछले चुनाव में लोकदल की नैना चौटाला ने चुनाव जीता था, लेकिन इस बार उन्होंने अपना राजनीतिक करियर बनाने के लिए भिवानी की बाढड़ा सीट को चुना और वहां से जीत हासिल की. </p><p>कांग्रेस ने भी देवी लाल की विरासत को ध्यान में रखकर युवा चेहरे अमित सिहाग को मौका दिया था और उन्होंने बीजेपी के आदित्य चौटाला को पटखनी देकर साबित कर दिया कि डॉ. केवी सिंह के परिवार का राजनीतिक असर अभी कम नहीं हुआ है.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola