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सिनेमा का लोकतंत्र बचायेगा सभ्यता

Updated at : 15 Sep 2019 2:12 AM (IST)
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सिनेमा का लोकतंत्र बचायेगा सभ्यता

अजित राय वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अमेरिका में ‘द न्यू हॉलीवुड फिल्म मेकिंग वेव’ के अगुआ फिल्मकार टेरेंस मलिक की नयी फिल्म ‘अ हिडेन लाइफ’ की इन दिनों खूब चर्चा है. इसे इसी साल 72वें कान फिल्म समारोह के मुख्य प्रतियोगिता खंड में दिखाया गया था और अमेरिका में यह आगामी 13 दिसंबर को रिलीज होगी. […]

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अजित राय

वरिष्ठ फिल्म समीक्षक
अमेरिका में ‘द न्यू हॉलीवुड फिल्म मेकिंग वेव’ के अगुआ फिल्मकार टेरेंस मलिक की नयी फिल्म ‘अ हिडेन लाइफ’ की इन दिनों खूब चर्चा है. इसे इसी साल 72वें कान फिल्म समारोह के मुख्य प्रतियोगिता खंड में दिखाया गया था और अमेरिका में यह आगामी 13 दिसंबर को रिलीज होगी.
यह फिल्म हिटलर के नाजी दौर (1939-1943) की घटनाओं पर आधारित है. ‘द ट्री आॅफ लाइफ’ (2011) के लिए कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का ‘पाम डि ओर’ और बर्लिन फिल्म समारोह में ‘गोल्डन बीयर’ का पुरस्कार जीतनेवाले टेरेंस मलिक ने इतिहास के आईने में वर्तमान का चेहरा दिखाया है, जहां देश पागल भीड़ में बदलते जा रहे हैं.
ऑस्ट्रिया के सुदूर पहाड़ी गांव का किसान फ्रैंज जगस्ट्राटर अपनी पत्नी फानी और तीन बच्चियों के साथ खुश है. ईसाई धर्म में गहरी आस्था के बावजूद वह विवेकशील है और अपनी आत्मा की आवाज पर काम करता है. जर्मनी में हिटलर के आने और द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ जाने के बाद आस्था और देशभक्ति की परिभाषाएं बदलने लगती हैं. फ्रैंज न सिर्फ नाजी फौजियों को चंदा देने से मना करता है, वरन हिटलर के प्रति आस्था प्रकट करने से भी इनकार करता है.
वह युद्ध के खिलाफ है. वह यहूदी नहीं है, पर उनके प्रति नफरत की राजनीति और सरकारी कार्रवाई के खिलाफ है. गांव में उसे राष्ट्रद्रोही घोषित कर उसका बहिष्कार किया जाता है. उसका धर्म तो उसके साथ है, पर राजनीति उसके खिलाफ हो जाती है. उस पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाता है और अंततः उसे फांसी दे दी जाती है.
टेरेंस मलिक ने अपने मुख्य किरदार फ्रैंज जगस्ट्राटर को ईसा मसीह की तरह रचा है. फ्रैंज को कई बार कहा जाता है कि वह माफीनामे पर दस्तखत कर हिटलर की नीतियों को कबूल कर ले और खुशी खुशी घर जाये.
लेकिन, फ्रैंज पूछता है कि यदि एक उसके विरोध से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता तो पुलिस, जज, कोर्ट, सरकार और सेना उसके विरोध में एकजुट क्यों है? वह अंतिम सांस तक अपने विचारों के साथ अडिग रहता है. अपनी पत्नी और बच्चों से बेइंतहा मुहब्बत करनेवाला एक साधारण किसान ईसा मसीह की तरह सूली पर चढ़ना कबूल करता है.
फिल्म का अधिकतर हिस्सा वाॅयस ओवर कमेंट्री में है, जिसमें फ्रैंज और उसकी पत्नी फानी के बीच की चिट्ठियों का आदान-प्रदान है. किसान के जीवन और प्रकृति के साथ उसके आध्यात्मिक रिश्ते को भव्यता के साथ फिल्माया गया है.
राष्ट्रवादी जुनून में पागल देश की वास्तविक वीडियो फुटेज देखते हुए डर लगता है. बर्लिन के थीगल जेल के दृश्य दिल दहलानेवाले हैं. हिटलर के नाजी दौर के उन्मादी माहौल में टेरेंस मलिक ने दांपत्य, घर, खेत, चर्च, पहाड़, पानी, आसमान, जंगल, हवा और रोशनी के प्रेम की सघन कविताओं का भव्य दृश्य रचा है.
मरने के ठीक पहले हम उसे याद करते हैं, जिसे हम बेइंतहा प्यार करते हैं. फ्रैंज भी याद करता है- ‘हमारा घर था, मां थी, गांव था, खेत थे, जंगल थे, आसमान, बादल, पानी और चर्च था.’ उसकी तीन छोटी बच्चियों की छवियां हमें करुणा से भर देती हैं.
टेरेंस मलिक अपनी इस फिल्म से ज्यादा फिल्म निर्माण की नयी शैलियों को लेकर चर्चा में हैं. उनकी कास्टिंग, छायांकन, साउंड तकनीक, संपादन, पटकथा और अभिनय शैली की चर्चा हो रही है. आज एक कला माध्यम के रूप में सत्ता की तानाशाही का सबसे अधिक विरोध सिनेमा ही कर रहा है.
विश्व प्रसिद्ध फिल्मकार और इस साल कान फिल्म समारोह की जूरी के अध्यक्ष अलेजांद्रो गोंजालेज ईनारितु कहते हैं कि आज दुनियाभर में लोकतंत्र गायब हो रहा है, लेकिन सिनेमा में लोकतंत्र कायम है. अमेरिका और मैक्सिको के बीच दीवार का निर्माण एक नये विश्व युद्ध को जन्म दे सकता है. ईनारितु कहते हैं कि सिनेमा का लोकतंत्र ही हमारी सभ्यता को बचायेगा.
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