कश्मीरः बंदिशों और कर्फ़्यू से राहत, ख़ौफ़ का माहौल बरक़रार

Updated at : 22 Aug 2019 10:51 PM (IST)
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कश्मीरः बंदिशों और कर्फ़्यू से राहत, ख़ौफ़ का माहौल बरक़रार

<figure> <img alt="श्रीनगर में बंद दुकान" src="https://c.files.bbci.co.uk/13204/production/_108404387_7175afb8-2dd2-49ff-aadb-1fbd63d419e5.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>श्रीनगर में एक बंद दुकान के बाहर बैठकर अख़बार पढ़ते स्थानीय लोग</figcaption> </figure><p>केंद्र सरकार के भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के फ़ैसले को 18 दिन हो चुके हैं लेकिन घाटी में ज़िंदगी अभी पटरी पर नहीं लौट सकी है.</p><p>बंदिशों और […]

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<figure> <img alt="श्रीनगर में बंद दुकान" src="https://c.files.bbci.co.uk/13204/production/_108404387_7175afb8-2dd2-49ff-aadb-1fbd63d419e5.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>श्रीनगर में एक बंद दुकान के बाहर बैठकर अख़बार पढ़ते स्थानीय लोग</figcaption> </figure><p>केंद्र सरकार के भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के फ़ैसले को 18 दिन हो चुके हैं लेकिन घाटी में ज़िंदगी अभी पटरी पर नहीं लौट सकी है.</p><p>बंदिशों और कर्फ़्यू को नरम कर दिया गया है. यानी आने-जाने की पूरी आज़ादी है. बावजूद इसके कारोबारी और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां सामान्य नहीं हो सकी हैं.</p><p>श्रीनगर के लाल चौक, जामा मस्जिद और चंद अन्य इलाक़ों के अलावा बाक़ी इलाक़ों से पाबंदियां लगभग हटा ली गई हैं.</p><p>लेकिन सरकार की पूरी कोशिशों के बावजूद ना ही स्कूलों में पढ़ने के लिए सारे बच्चे आ रहे हैं और ना ही कारोबारी अपनी दुकाने खोल रहे हैं.</p><p>सरकार पिछले की रोज़ से हर चंद कोशिश कर रही है कि कम से कम आठवीं क्लास तक के बच्चे स्कूल आ पाएं.लेकिन सड़कों से स्कूली बसें नदारद हैं. </p><p>ग़ौर करने की बात ये भी है कि अलगाववादी नेतृत्व जेल में है या नज़रबंद है. किसी संगठन ने हड़ताल या बंद की कोई कॉल भी नहीं दी है. बावजूद इसके लोग दुकानें नहीं खुल पा रही हैं.</p><p>बुधवार को हमने कई ज़िलों में दर्जनों स्कूलों का दौरा किया और देखा कि वहां पर सरकार के आदेश का पालन करते हुए कर्मचारी तो आते हैं लेकिन बच्चे नहीं आते.</p><p>कश्मीर के गांवों में घूमों तो एक ख़ौफ़नाक ख़ामोशी नज़र आती है. हम कई गांवों में गए. हमें दक्षिण कश्मीर में ऐसे कई गांव नज़र आए जहां ना ही सुरक्षा बल तैनात थे और ना ही लोग अपने घरों के बाहर नज़र आ रहे थे.</p><h1>जुमे की नमाज़ के बाद प्रदर्शन का आह्वान</h1><figure> <img alt="श्रीनगर में तैनात जवान" src="https://c.files.bbci.co.uk/18024/production/_108404389_da2bbc8e-9af5-4ec2-9bb7-e2f857a883fa.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>एक इलाक़े में ऐसे पोस्टर नज़र आए हैं जिनमें लोगों से जुमे की नमाज़ के बाद प्रदर्शन करने की अपील की गई है. हालांकि ये पोस्टर अधिकारिक तौर पर हुर्रियत या किसी अन्य संगठन की ओर से जारी नहीं किए गए लगते हैं. इन पर न उनकी मुहर है ना लोगो है.</p><p>एक पोस्टर सौरा के इलाक़े में लगाया गया है. ये वहीं इलाक़ा है जहां बड़ा प्रदर्शन हुआ था और जिसकी ख़बर बीबीसी ने प्रसारित की थी. पोस्टर में लोगों से जुमे की नमाज़ के बाद प्रदर्शन करने के लिए कहा गया है. </p><p>हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है कि ये पोस्टर हुर्रियत की ओर से लगवाया गया है या किसी और की ओर से, क्योंकि इसकी पुष्टि करने के लिए हुर्रियत का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं है.</p><p>हुर्रियत के अधिकतर नेता या तो जेल में हैं या नज़रबंद हैं. हुर्रियत के दफ़्तरों पर भी ताले लगे हैं. </p><h1>गिरफ़्तारियों की पुष्टि नहीं</h1><figure> <img alt="श्रीनगर में बंद दुकान" src="https://c.files.bbci.co.uk/4B8C/production/_108404391_1e0511dd-abca-4483-bdb7-2a5a03389cab.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>प्रशासन ने तीन स्तर पर गिरफ़्तारियां की हैं. फ़ैसला लिए जाने से पहले ही अलगाववादी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. फ़ैसला लेने के बाद महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला समेत बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया. इसके बाद उन लोगों की गिरफ़्तारी के आरोप हैं जो सरगर्म हो सकते थे. </p><p>हमारी मुलाक़ात एक ऐसी महिला से हुई जो अपने जवान बेटे को हिरासत में लिए जाने का दावा कर रही थी. उनके बुज़ुर्ग अंधे ससुर अपनी बात कहते हुए रो रहे थे. लेकिन इस गिरफ़्तारी की हम अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं कर सके.</p><p>अधिकारियों से जब भी हम गिरफ़्तारियों के बारे में सवाल करते हैं हर बार यही जवाब दिया जाता है कि इस बारे में जानकारी बाद में साझा की जाएगी. </p><p>अन्य पत्रकार भी यही सवाल करते हैं लेकिन अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं देते.</p><h1>ख़ौफ का माहौल</h1><figure> <img alt="लाहौर में कश्मीर के लिए प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/9006/production/_108407863_1a7aaee3-7af8-4ab8-93f4-29567c56638d.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>जब हम लोगों से बात करते हैं कि तो सबका यही सवाल होता है कि आगे क्या होगा. </p><p>स्थानीय लोग सब भविष्य को लेकर असमंजस में हैं साथ ही लोगों में एक तरह का ख़ौफ़ हैं. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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