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मंदिर के लिए रेल से असम से गुजरात जाएंगे हाथी

Updated at : 21 Jun 2019 10:58 PM (IST)
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मंदिर के लिए रेल से असम से गुजरात जाएंगे हाथी

<figure> <img alt="मंदिर के हाथी" src="https://c.files.bbci.co.uk/16222/production/_107485609_a0338b22-2e5b-4973-b058-bf6143082220.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>मंदिर के एक रीति रिवाज़ में शामिल होने के लिए असम सरकार चार हाथियों को 3100 किलोमीटर दूर अहमदाबाद भेज रही है. </p><p>पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने हाथियों की इस जोख़िम भरी यात्रा को लेकर सवाल उठाए हैं.</p><p>पूर्वोत्तर भारत के असम प्रांत के तिनसुखिया शहर से […]

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<figure> <img alt="मंदिर के हाथी" src="https://c.files.bbci.co.uk/16222/production/_107485609_a0338b22-2e5b-4973-b058-bf6143082220.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>मंदिर के एक रीति रिवाज़ में शामिल होने के लिए असम सरकार चार हाथियों को 3100 किलोमीटर दूर अहमदाबाद भेज रही है. </p><p>पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने हाथियों की इस जोख़िम भरी यात्रा को लेकर सवाल उठाए हैं.</p><p>पूर्वोत्तर भारत के असम प्रांत के तिनसुखिया शहर से इन हाथियों को गुजरात के अहमदाबाद पहुंचाया जाना है. ये भारत के एक छोर से दूसरे छोर की यात्रा होगी. </p><p>रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने भारतीय रेलवे से हाथियों की यात्रा की व्यवस्था करने के लिए कहा है. रेलवे अधिकारी इसके लिए डब्बा खोज रहे हैं. </p><p>अभी इन हाथियों की यात्रा की तारीख तो तय नहीं हुई है लेकिन माना जा रहा है कि वो चार जुलाई से पहले अहमदाबाद पहुंच जाएंगे. </p><p>यहां इन्हें जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा में हिस्सा लेना है. हाथियों की ये ट्रेन यात्रा तीन-चार दिनों तक की होगी. </p><p>गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी भी हाथियों से सज़ी इस रथयात्रा में शामिल होते रहे हैं. </p><p>हालांकि मंदिर अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस रथयात्रा में इस बार हिस्सा नहीं ले रहे हैं.</p><figure> <img alt="हाथी" src="https://c.files.bbci.co.uk/067A/production/_107485610_1d26a583-ce4a-4a5c-85b5-f9f2a77b98aa.jpg" height="383" width="624" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>हाथियों को भारत में संरक्षित प्रजाति का दर्जा प्राप्त है</figcaption> </figure><p>मंदिर के ट्रस्टी महेंद्र झा ने बीबीसी को बताया है कि मंदिर प्रशासन इस बार दो महीने के लिए असम से हाथी उधार मंगा रहा है क्योंकि मंदिर के अपने तीन हाथियों की वृद्धावस्था की वजह से बीते साल मौत हो गई है.</p><p>लेकिन कार्यकर्ताओं और संरक्षणवादियों का कहना है कि हाथियों की रेलयात्रा की ये योजना न सिर्फ़ क्रूरता है बल्कि पूरी तरह अमानवीय भी है. ख़ासकर जब तापमान यात्रा के अधिकतर हिस्से में 40 डिग्री से ज़्यादा हो. </p><p>गुवाहाटी में रहने वाले संरक्षणवादी कौशिक बरुआ कहते हैं, &quot;उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकतर हिस्से में भीषण गर्मी है. रेलयात्रा के दौरान लोगों की गर्मी की वजह से मरने की रिपोर्टें भी आई हैं.&quot;</p><p>&quot;जिस डिब्बे में हाथियों को भेजा जाएगा उसमें तापमान निंयत्रित नहीं होगा. इसे किसी यात्री गाड़ी के पीछे जोड़ा जाएगा जो हो सकता है सौ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से चल रही हो. ऐसे में आप हाथियों के दर्द को समझ ही सकते हैं.&quot;</p><figure> <img alt="हाथी" src="https://c.files.bbci.co.uk/7BAA/production/_107485613_190422b1-01c9-484c-b510-0e3ffb38b072.jpg" height="351" width="624" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>बरुआ कहते हैं कि ये यात्रा हाथियों के लिए ख़तरनाक भी साबित हो सकती है.</p><p>&quot;उन्हें गर्मी का दौरा पड़ सकता है, धक्का लग सकता है, यहां तक की उनकी मौत भी हो सकती है.&quot;</p><p>&quot;क़ानून के तहत हाथियों को यहां से वहां ले जाने में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि सभी काग़ज़ी कार्रवाई पूरी की जा रही है. लेकिन पशु कल्याण कहां हैं?&quot;</p><p>इसी बीच, असम से कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई ने भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है.</p><p>अपने पत्र में गोगोई ने लिखा है, &quot;लगभग आधा देश बीते छह दशकों के सबसे भीषण सूखे को झेल रहा है. ये हाथियों की यात्रा के लिए मुश्किल समय परिस्थितियां हैं. हाथियों को पानी की कमी हो सकती है और उनकी त्वचा भी सूख सकती है.&quot;</p><p>&quot;इसलिए मैं केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और राज्य सरकार से इस फ़ैसले को वापस लेने की मांग करता हूं.&quot;</p><p>भारत में जंगली और पालतू हाथी एक संरक्षित प्रजाति हैं. इनके लाने ले जाने को लेकर सख़्त दिशानिर्देश हैं. </p><p>वन्यजीव विज्ञानी डॉ. बिभूति प्रसाद लहकर ने बीबीसी से कहा, &quot;नियमों के मुताबिक किसी भी हाथी को तीस किलोमीटर से अधिक पैदल नहीं चलाया जा सकता है या एक बार में छह घंटे से अधिक उससे यात्रा नहीं करवाई जा सकती है.&quot;</p><figure> <img alt="हाथी" src="https://c.files.bbci.co.uk/549A/production/_107485612_cab6ccc2-8b88-416d-b3a9-6992f48bdbd4.jpg" height="351" width="624" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>इस विवाद पर अभी तक असम के वन्यजीव अधिकारियों ने कोई टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने ही हाथियों के परिवहन के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए हैं.</p><p>एक वन्यजीव विशेषज्ञ के मुताबिक विरोध के बाद ‘अधिकारी प्लान बी यानि दूसरी योजना पर काम कर रहे हैं.'</p><p>कुछ ने राय दी है कि इन हाथियों को ट्रकों में भेजा जाए ताकि वो सहूलियत के हिसाब से रास्ते में रुककर आराम कर सकें. </p><p>यात्रा में उनके साथ वन विभाग के पशु जीव विशेषज्ञों को भेजने की भी योजना है ताकि उनकी देखभाल की जा सके.</p><p>हालांकि बरुआ कहते हैं, &quot;गुजरात को इन हाथियों की ज़रूरत नहीं है. वन्यजीव क़ानून वन्यजीवों के प्रदर्शन पर रोक लगाते हैं. क़ानून के तहत हाथियों की प्रस्तुति प्रतिबंधित है. सर्कसों में, चिड़ियाघरों में उनके प्रदर्शन पर रोक है. तो फिर मंदिरों को हाथियों का प्रदर्शन करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? क्या हाथियों के कोई अधिकार नहीं हैं?&quot;</p><p>&quot;हम गणेश की पूजा करते हैं, वो भगवान हैं. तो फिर हाथी भी भगवान का ही रूप हैं, उन्हें इस क्रूरता से मंदिर में क्यों ले जाया जा रहा है?&quot;</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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