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मोदी का वादा : मालदीव की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मस्जिद के संरक्षण में मदद करेगा भारत

Updated at : 08 Jun 2019 7:17 PM (IST)
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मोदी का वादा : मालदीव की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मस्जिद के संरक्षण में मदद करेगा भारत

माले : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत मूंगे के पत्थरों से बनी ऐतिहासिक इमारत मालदीव की प्रसिद्ध मस्जिद के संरक्षण में मदद करेगा. मालदीव की संसद ‘द पीपुल्स मजलिस’ को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और मालदीव के बीच संबंध इतिहास से भी पुराने हैं. उन्होंने कहा कि […]

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माले : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत मूंगे के पत्थरों से बनी ऐतिहासिक इमारत मालदीव की प्रसिद्ध मस्जिद के संरक्षण में मदद करेगा. मालदीव की संसद ‘द पीपुल्स मजलिस’ को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और मालदीव के बीच संबंध इतिहास से भी पुराने हैं. उन्होंने कहा कि भारत, मालदीव की मस्जिद के संरक्षण में भी योगदान देगा, जिसे हुकुरु मिस्की के नाम से भी जाना जाता है.

मोदी ने कहा कि मूंगे से बनी ऐतिहासिक मस्जिद की जैसी मस्जिद दुनियाभर में और कहीं नहीं है. उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि मालदीव सतत विकास की दिशा में काम कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का हिस्सा बन गया है. मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलेह ने भारतीय अनुदान के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मस्जिद की मरम्मत की पेशकश के लिए भारत का आभार जताया.

एक बयान के अनुसार, उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की हालिया यात्रा और मालदीव के समकक्षों के साथ चल रहे उनके सहयोग की भी सराहना की. वर्ष 1653 में बनी मस्जिद माले के काफू अटॉल में बनी सबसे पुरानी और सबसे खूबसूरत मस्जिद है. इस मस्जिद को समुद्र-संस्कृति वास्तुकला के बेजोड़ मिसाल के तौर पर साल 2008 में यूनेस्को की विश्व विरासत सांस्कृतिक सूची में शामिल किया गया.

नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री निर्वाचित होने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर शनिवार को मालदीव पहुंचे. उनकी यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ की नीति को दी जा रही महत्ता को दर्शाती है. भारत और मालदीव के बीच संबंध तब बिगड़ गये थे, जब पिछले साल पांच फरवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने आपातकाल लागू किया था. हालांकि, सोलेह के नेतृत्व में संबंध फिर से सामान्य हो गये.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी मालदीव की यात्रा के दौरान वहां की मजलिस (संसद) से अपने ऐतिहासिक संबोधन में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर निशाना साधा है. इसके साथ ही, उन्होंने चीन को भी घेरते हुए पाकिस्तान को कर्ज के मकड़जाल में फंसाने की बात कही. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है. पीएम मोदी ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि लोग अब भी अच्छा आतंकी और बुरा आतंकी का भेद करने की गलती कर रहे हैं. पीएम ने साफ कहा कि आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना होगा.

चीन पर निशाना साधते हुए मालदीव को संदेश देते हुए मोदी ने कहा कि हम मित्र हैं और मित्रता में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है. उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारी लोगों को सशक्त बनाने के लिए है, उन्हें कमजोर करने, खुद पर निर्भरता बढ़ाने या भावी पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ लादने के लिए नहीं है.

दुनिया का नायाब नगीना है मालदीव

मजलिस में संबोधन के दौरान पीएम ने कहा कि मालदीव यानी हजार से अधिक द्वीपों की माला हिंद महासागर का ही नहीं पूरी दुनिया का एक नायाब नगीना है. इसकी असीम सुंदरता और प्राकृतिक संपदा हजारों साल से आकर्षण का केंद्र रही है. प्रकृति की ताकत के सामने मानव के अदम्य साहस का यह देश एक अनूठा उदाहरण है. उन्होंने कहा कि व्यापार, लोगों और संस्कृति के अनवरत प्रवाह का मालदीव साक्षी रहा है. राजधानी माले विशाल नीले समंदर की प्रवेश द्वारी रही है. यह स्थायी, शांतिपूर्ण और समृद्धशाली हिंद महासागर की कुंजी भी है.

मालदीव मजलिस के अध्यक्ष को दी बधाई

उन्होंने कहा कि आज मालदीव में और इस मजलिस में आपके बीच आकर अपार हर्ष हो रहा है. मजलिस ने सर्वसम्मति से मुझे निमंत्रण देने का निर्णय नशीद के स्पीकर बनने के बाद अपनी पहली ही बैठक में लिया, आपके इस गेस्चर ने हर भारतीय के दिल को छू लिया और उनका सम्मान और गौरव बढ़ाया है. इसके लिए मैं अध्यक्ष और सदन के सम्मानित सदस्यों को अपने और भारत की ओर से बधाई देता हूं.

मजलिस की ऐतिहासिक कार्यवाही का बने साक्षी

पीएम मोदी ने कहा कि आज मैं दूसरी बार मालदीव आया हूं. एक प्रकार से दूसरी बार मजलिस की ऐतिहासिक कार्यवाही का साक्षी हूं. पिछले वर्ष मैं खुशी और गर्व के साथ राष्ट्रपति सालेह के शपथ ग्रहण में शामिल हुआ था. लोकतंत्र की जीत का वह उत्सव खुले स्टेडियम में आयोजित किया गया था. चारों ओर हजारों उत्साही लोग उपस्थित थे. उन्हीं की शक्ति और विश्वास, साहस और संकल्प उस जीत का आधार थे. उस दिन मालदीव में लोकतंत्र की ऊर्जा को महसूस कर रोमांच सा का अनुभव हो रहा था. उस दिन मैंने मालदीव में लोकतंत्र के प्रति आम नागरिक के समर्पण और अध्यक्ष महोदय आप जैसे नेताओं के प्रति उनके आदर और प्यार को भी देखा और आज इस सदन में मैं लोकतंत्र के आप सब पुरोधाओं को नमन करता हूं.

मजलिस का बताया महत्व

उन्होंने कहा कि मजलिस ईंट-पत्थर से बनी इमारत नहीं है. यह लोगों का मजमा नहीं है. यह लोकतंत्र की वह ऊर्जा भूमि है, जहां देश की धड़कनें आपके विचारों और आवाज में गूंजती हैं. यहां आपके माध्यम से लोगों के सपने और आशाएं सच में बदलते हैं. यहां अलग-अलग विचारधारा और दलों के सदस्य देश में लोकतंत्र, विकास और शांति के लिए सामूहिक संकल्प को सिद्धि में बदलते हैं, ठीक उसी तरह जैसे मालदीव के लोगों ने एकजुट होकर लोकतंत्र की एक मिसाल कायम की. आपने दिखा दिया कि जीत आखिर में जनता की ही होती है. यह कोई मामूली सफलता नहीं थी. आपकी कामयाबी दुनियाभर के लिए मिसाल और प्रेरणा है.

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