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अमरीका में महंगे हो जाएंगे ये भारतीय सामान

Updated at : 06 Jun 2019 11:16 PM (IST)
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अमरीका में महंगे हो जाएंगे ये भारतीय सामान

<figure> <img alt="हैंड बैग" src="https://c.files.bbci.co.uk/70F3/production/_107251982_hi053938484.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 5 जून से भारत को अपनी जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ प्रिफ़रेंस (जीएसपी) यानी व्यापारिक वरीयता की सूची से निकाल दिया है. </p><p>अमरीका की इस व्यापारिक सूची में 120 देश शामिल थे और पिछले साल भारत इसका सबसे बड़ा लाभार्थी था. </p><p>भारत […]

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<figure> <img alt="हैंड बैग" src="https://c.files.bbci.co.uk/70F3/production/_107251982_hi053938484.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 5 जून से भारत को अपनी जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ़ प्रिफ़रेंस (जीएसपी) यानी व्यापारिक वरीयता की सूची से निकाल दिया है. </p><p>अमरीका की इस व्यापारिक सूची में 120 देश शामिल थे और पिछले साल भारत इसका सबसे बड़ा लाभार्थी था. </p><p>भारत ने 2018 में अमरीका को 630 कोरड़ डॉलर मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया जिस पर उसे बहुत कम शुल्क देना पड़ा. </p><p>अब ये रियायत अमरीका ने ख़त्म कर दी है, इसके साथ ही कई भारतीय सामान अब अमरीका में महंगे हो जाएंगे. </p><p>भारत से अमरीकी बाज़ारों के लिए निर्यात होने वाले जिन उत्पादों पर अब 11 प्रतिशत तक शुल्क लगेगा उनमें ऑटो पार्ट्स, खाद्य सामग्री, ज़ेवरात और चमड़े के सामान होंगे. </p><p>इस शुल्क का भार भारतीय कंपनियों को तो वहन करना ही पड़ेगा, अमरीकी कंपनियों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ेगा. </p><p>क्योंकि भारतीय उत्पादों के दाम बढ़ जाएंगे और इन उत्पादों को अमरीकी कंपनियों को महंगे दामों पर खरीदना पड़ेगा. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48470314?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मैक्सिको के आप्रवासियों को रोकने के लिए ट्रंप ने लगाया टैरिफ़</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48531579?xtor=AL-%5B73%5D-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ट्रंप के झटके से भारत में नौकरियों पर ख़तरा</a></li> </ul><figure> <img alt="चमड़े के उत्पाद" src="https://c.files.bbci.co.uk/1099A/production/_107249976_d759e0c2-3099-4e9c-9b43-b2a1821cbee7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><h1>इन उत्पादों पर पड़ेगा असर</h1><p>1. कॉमर्स डिपार्टमेंट के अनुसार, फ़ार्मास्युटिकल्स एंड सर्जिकल उत्पाद, जैसे दवाएं आदि पर जीएसपी के तहत शुल्क में 5.9 फीसदी तक छूट मिलती थी. </p><p>2. चमड़े के उत्पाद, जैसे हैंड बैग आदि पर 6.1 फीसदी की छूट मिलती थी. अब इन पर 8-10 फीसदी तक शुल्क लग सकता है. </p><p>3. प्लास्टिक के सामान पर 4.8 फीसदी की छूट मिलती थी.</p><p>4. छूट ख़त्म होने के बाद ऑटो पार्ट्स पर 2-3 फीसदी का शुल्क लग सकता है.</p><p>5. केमिकल उत्पादों पर 5-7 फीसदी का शुल्क लग सकता है जबकि जूलरी और खाद्य सामग्री पर 11 फीसदी तक का शुल्क लग सकता है.</p><p>अमरीकी कंपनियों की एक संस्था कोलिशन फॉर जीएसपी अमरीकी सरकार से लगातार जीएसपी को बनाए रखने की अपील करती रही है. </p><p>इस संस्था से जुड़े दैनंदिनी कहते हैं, &quot;जिन भारतीय उत्पादों पर शुल्क लगेगा, उनमें औद्योगिक उत्पाद हैं जैसे ऑटो पार्ट्स पर 2-3 प्रतिशत शुल्क लगेगा. केमिकल उत्पादों पर 5-7 प्रतिशत, चमड़े के उत्पादों पर 8-10 प्रतिशत तक और ज़ेवरात एवं खाद्य पदार्थों पर 11 प्रतिशत तक शुल्क लग सकता है.&quot;</p><p>उनका कहना है कि जीएसपी से भारत को हटाने से अमरीका की उन छोटी कंपनियों के खर्चे बढ़ जाएंगे जो भारतीय उत्पादों को बिना शुल्क आयात कर लेती थीं.</p><figure> <img alt="मोदी और ट्रंप" src="https://c.files.bbci.co.uk/157BA/production/_107249978_f96ae6e4-8a82-4036-af35-8a4adbccf0fa.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p><strong>700 करोड़ रु</strong><strong>पये</strong><strong> तक शु</strong><strong>ल्क</strong></p><p>इनमें कई उत्पाद ऐसे हैं जो भारत से विशेष तौर पर आयात किए जाते थे, जैसे विशेष खाद्य सामग्री, ज़ेवरात और चमड़े से बने सामान.</p><p>दैनंदिनी कहते हैं कि खर्चे बढ़ जाने से कर्मचारियों की संख्या भी घटानी पड़ सकती है. उनका कहना है कि अमरीकी कंपनियों को इस बात की भी चिंता है कि क्या भारत भी इसके जवाब में शुल्क लगाएगा. </p><p>अगर ऐसा होता है तो अमरीकी कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी. </p><p>एक अनुमान के मुताबिक भारतीय उत्पादों पर अमरीका 10 करोड़ डॉलर (क़रीब 700 करोड़ रुपये) तक का शुल्क लगा सकता है. </p><p>लेकिन जानकार कहते हैं कि भारत और अमरीका के बीच जहां 90 अरब डॉलर का व्यापार होता है वहां जीएसपी का हिस्सा बहुत ही कम है. </p><p>जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर प्रवीण कृष्णा कहते हैं, &quot;अमरीकी उद्योग इस बात पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं ज़ाहिर कर रही है तो इसका कारण है कि उनके सामने मैक्सिको के साथ शुल्क का मामला ज्यादा बड़ा है. ऑटो पार्ट्स का सबसे ज्यादा कारोबार मैक्सिको के साथ होता है, जिस पर इस समय बड़ा संकट है.&quot;</p><p>वो कहते हैं कि भारत के साथ व्यापार पर बहुत कम क़रीब 3-4 फीसदी का शुल्क जो लगेगा वो मैक्सिको के सामने कुछ नहीं है. </p><p>लेकिन इसका भी असर भारत पर पड़ना तय है क्योंकि इन दिनों भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है. </p><figure> <img alt="चमड़ा उद्योग" src="https://c.files.bbci.co.uk/22D3/production/_107251980_987b163e-406e-4bf1-bf14-b21837db3672.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><h1>अमरीका का आरोप</h1><p>पिछली तिमाही में वृद्धि दर 20 तिमाहियों में सबसे निचले पायदान पर है. सबसे तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था का रुतबा भारत से छिन चुका है. विकास दर 6 प्रतिशत से नीचे आ चुकी है.</p><p>वरिष्ठ बिज़नेस पत्रकार शिशिर सिन्हा ने बीबीसी से कहा कि निर्यात पर असर पड़ने का मतलब विदेशी मुद्रा में भी कमी होगी. </p><p>वो कहते हैं, &quot; इसक अलावा ये भी देखना होगा कि इससे हमारी मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर और रोज़गार पर क्या असर पड़ेगा.&quot;</p><p>अमरीका का कहना है कि उसने भारतीय उत्पादों को जो वरीयता दी है, उसके जवाब में भारत ने अमरीकी उत्पादों पर शुल्क कम नहीं किए. </p><p>अमरीका लंबे समय से कहता रहा है कि उसके डेयरी से संबंधित खाद्य पदार्थों और मेडिकल उपकरणों को भारतीय बाज़ार तक पहुंच नहीं हो पा रही है. </p><p>प्रोफ़ेसर प्रवीण कृष्णा बताते हैं, &quot;जबकि भारत का कहना है कि जो दूध अमरीका से आता है वो सर्टिफ़डाइड होना चाहिए कि उसके उत्पादन के दौरान एनिमल प्रोटीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है.&quot;</p><p>असल में अमरीका में दुधारू पशुओं के चारे में कहीं न कहीं मांस के प्रोटीन का इस्तेमाल किया जाता है और भारत धार्मिक कारणों से इस पर सफ़ाई चाहता है. </p><p>वो कहते हैं कि मेडिकल उपकरणों के मामले में भी भारत का कहना है कि वो बहुत महंगे होते हैं और उनकी क़ीमत तय होनी चाहिए. </p><p><strong>(सलीम रिज़वी से इनपुट के साथ.)</strong></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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