इन शब्दों के प्रयोग में बरतें सावधानी दौड़ना और भागना

Published at :03 Jul 2014 12:37 PM (IST)
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इन शब्दों के प्रयोग में बरतें सावधानी दौड़ना और भागना

रामचंद्र वर्मा के अनुसार दौड़ना ‘धोर्’ से बने ‘धोरण’ से विकसित हुआ है. ‘धोर्’ का अर्थ दौड़ना तथा ‘धोरण’ का अर्थ तीव्र या द्रुत गति से आगे बढ़ना है. उनके अनुसार पुरानी हिंदी में यह ‘धौरना’ एवं स्थानिक बोलियों में ‘धौड़ना’ के रूप में प्रचलित है. दूसरी तरफ ‘हिंदी व्युत्पत्ति कोश’ के अनुसार दौड़ ‘धाव’ […]

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रामचंद्र वर्मा के अनुसार दौड़ना ‘धोर्’ से बने ‘धोरण’ से विकसित हुआ है. ‘धोर्’ का अर्थ दौड़ना तथा ‘धोरण’ का अर्थ तीव्र या द्रुत गति से आगे बढ़ना है. उनके अनुसार पुरानी हिंदी में यह ‘धौरना’ एवं स्थानिक बोलियों में ‘धौड़ना’ के रूप में प्रचलित है.

दूसरी तरफ ‘हिंदी व्युत्पत्ति कोश’ के अनुसार दौड़ ‘धाव’ से बने ‘धावन’ से विकसित है और दौड़ में ‘ना’ लग कर दौड़ना क्रिया बनी है. इस कोश में इसके प्राकृत और अपभ्रंश रूप क्रमश: ‘धावण’ और ‘दाउद’ बताये गये हैं. दौड़ना का अर्थ जल्दी-जल्दी पैर उठाते हुए बहुत तेजी से आगे बढ़ना है. नसों में खून का दौड़ना तरल पदार्थ का किसी ओर तेजी से बढ़ना है. शरीर में विष का दौड़ना विष का प्रभाव व्याप्त होना है. किसी उद्देश्य की सिद्धि के लिए भी दौड़ने की क्रिया संपन्न होती है; जैसे- इस सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के लिए कोसों दूर से लोग दौड़े चले आ रहे हैं. मछलियों का पानी में इधर-उधर दौड़ना लाक्षणिक प्रयोग है. निगाह दौड़ना और मन दौड़ना का आशय बहुत जल्दी किसी दूर की जगह पर पहुंच जाना है. कागज पर कलम भी दौड़ती है. तात्पर्य यह कि एकाएक किसी वस्तु का वेग से गति पकड़ना भी दौड़ना है.

रामचंद्र वर्मा के अनुसार भागना संस्कृत के ‘भज्’ धातु से बना है. ‘भज्’ का एक अर्थ भयभीत होकर इधर-उधर हटना या विचलित होना है. दूसरी तरफ ‘हिंदी व्युत्पत्ति कोश’ के अनुसार भागना ‘भज्’ से बने ‘भगA’ से विकसित हुआ है. ‘भज्’ का अर्थ छिन्न-भिन्न करना और ‘भगA’ का अर्थ छिन्न-भिन्न किया हुआ है. इस कोश में इसका विकास क्रम प्राकृत में ‘भग्ग’ और अपभ्रंश में ‘भग्गिअ’ दिया गया है. किसी खतरे से बचने के लिए जल्दी-जल्दी चल कर किसी सुरक्षित स्थान की ओर जाना भागना है. किसी काम से पीछा छुड़ाने के लिए टलने या हटने का प्रयास करना भी भागना है; जैसे-कठिन काम देखते ही वह भागने के प्रयास में लग जाता है. किसी कार्य को बुरा समझ कर उससे बिल्कुल दूर रहना भी भागना है; जैसे- ईमानदार आदमी बेईमानी से सदैव दूर भागता है. यह कहीं दूर चले जाने का ऐसा प्रयास है, जिसमें लौटने की संभावना बहुत कम रहती है; जैसे- दो बच्चों की मां प्रेमी के संग भाग गयी.

इन दोनों में फर्क यह है कि भागना में किसी स्थान से हट कर ओझल हो जाने का भाव है, जबकि दौड़ना इतनी तेज गति से चलना है कि पैर जमीन पर पूरी तरह नहीं जम पाते. कुछ लोग दौड़ना के स्थान पर भी भागना क्रिया का प्रयोग करते देखे जाते है; जैसे- जा भाग कर अमुक सामान ले आ. लेकिन, भागना के साथ जाने की संगति तो बैठती है, लौट कर आने की नहीं. रामचंद्र वर्मा ने भी लिखा है, ‘प्राय: लोग भ्रम से दौड़ना के अर्थ में भागना क्रिया का प्रयोग करते हैं,जो ठीक नहीं है.’ इन दोनों का एक साथ प्रयोग होगा- उसने भागते हुए चोर को दौड़ कर पकड़ लिया.

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