स्पेस साइंस में बनाएं करिेेेयर

Updated at : 17 Feb 2019 4:09 AM (IST)
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स्पेस साइंस में बनाएं करिेेेयर

एस्ट्रोनॉमी यानी स्पेस साइंस ब्रह्मांड की रिसर्च से जुड़ा साइंस है. इसमें पृथ्‍वी के वायुमंडल के बाहर होने वाली आकाशीय गतिविधियों और उनके निर्माण आदि से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में अध्ययन किया जाता है. खासकर यह एक ऐसा सेक्टर है, जिसको भविष्य में चुनौतीपूर्ण और रोजगार क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है. […]

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एस्ट्रोनॉमी यानी स्पेस साइंस ब्रह्मांड की रिसर्च से जुड़ा साइंस है. इसमें पृथ्‍वी के वायुमंडल के बाहर होने वाली आकाशीय गतिविधियों और उनके निर्माण आदि से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में अध्ययन किया जाता है. खासकर यह एक ऐसा सेक्टर है, जिसको भविष्य में चुनौतीपूर्ण और रोजगार क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है. यह जितना रोचक है, उतनी ही यह मेहनत की भी मांग करता है.

अंतरिक्ष में भारत की उड़ान

भारत की अंतरिक्ष गतिविधियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं. चांद के रहस्यों को खोजने के लिए भारत ने चंद्रयान-1 लांच किया था, तो वहीं आने वाले समय में चंद्रयान-2 लांच करने की योजना है. भारत की 2015 तक चांद पर नए कदम बढ़ाने की योजना है.

योग्यता

स्पेस साइंस में अपना करियर बनाने के लिए आपको मैथ्‍स, फिजिक्‍स, केमेस्‍ट्री में ग्रेजुएट होना जरूरी है. कई यूनिवर्सिटी स्पेस साइंस में ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट कोर्स भी करवाती हैं. कई संस्थानों में तो स्पेस साइंस को लेकर शोध भी किए जा सकते हैं. इसरो में एमएससी, बीएससी, एमई और पीएचडी कर चुके स्टूडेंट्स के लिए बेहतरीन मौके हैं. इसके अलावा, इसरो में बीएससी और डिप्लोमा कर चुके स्‍टूडेंट्स को भी एडमिशन मिलता है.

स्पेस साइंस में हैं कई स्कोप

स्पेस साइंस के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर सकते हैं, जैसे- एस्ट्रोफिजिक्स, गैलैक्टिक साइंस, स्टेलर साइंस, रिमोट सेंसिंग, हाइड्रोलॉजी, कार्टोग्राफी, नॉन अर्थ प्लैनेट्री साइंस , बायॉलॉजी ऑफ अदर प्लेनेट्स, एस्ट्रोनॉटिक्स, स्पेस कोलोनाइजेशन, क्लाइमेटोलॉजी. आने वाले समय को देखें तो स्पेस साइंस में अच्‍छा स्कोप है. इस फील्ड में स्पेस साइंटिस्ट के अलावा मेट्रोलॉजिकल सर्विस, एनवायरनमेंटल मॉनिटरिंग, एस्ट्रोनॉमिकल डाटा स्टडी के साथ भी जुड़ा जा सकता है.

कुछ प्रमुख कोर्स

बीटेक इन स्पेस साइंस (चार वर्षीय)

बीएससी इन स्पेस साइंस (तीन वर्षीय)

एमटेक इन स्पेस साइंस (दो वर्षीय)

एमएससी इन स्पेस साइंस (दो वर्षीय)

एमई इन स्पेस साइंस (दो वर्षीय)

पीएचडी इन स्पेस साइंस (तीन वर्षीय)

साइंस पर कमांड जरूरी

विषयों खासकर फिजिक्स का बेहतर ज्ञान होना जरूरी है . कम्प्यूटर की अच्छी जानकारी व इंजीनियरिंग के बेसिक्स पर मजबूत पकड़ उन्हें काफी आगे तक ले जाती है. कम्युनिकेशन व राइटिंग स्किल्स, प्रेजेंटेशन तैयार करने का कौशल हर मोड़ पर सम्यक सहायता दिलाता है. इसके अलावा प्रोफेशनल्स को परिश्रमी, धर्यवान व जिज्ञासु प्रवृत्ति का बनना होगा, क्योंकि इससे संबंधित अधिकांश कार्य रिसर्च अथवा आकलन पर आधारित होते हैं .

प्रमुख संस्थान

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, तिरुवनंतपुरम

वेबसाइट- www.iist.ac.in

बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची

वेबसाइट- www.bitmesra.ac.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंग्लुरू

वेबसाइट- www.iisc.ernet.in

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई

वेबसाइट- www.univ.tifr.res.in

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, भुवनेश्वर

वेबसाइट- www.niser.ac.in

आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जरवेशनल साइंसेज, नैनीताल

वेबसाइट- www.aries.ernet.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंग्लुरू

वेबसाइट- www.iiap.res.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर

वेबसाइट- www.iitk.ac.in

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