पाकिस्तान आम चुनाव : प्रत्याशियों को भायी ‘जीप’, 65 ने मांगा यही चुनाव चिह्न

Updated at : 10 Jul 2018 8:59 AM (IST)
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पाकिस्तान आम चुनाव : प्रत्याशियों को भायी ‘जीप’, 65 ने मांगा यही चुनाव चिह्न

नेशनल कंटेंट सेल पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने जा रहे आम चुनाव में उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न के रूप में ‘जीप’ कुछ इस कदर भायी है कि पंजाब प्रांत में कम-से-कम 65 प्रत्याशियों ने इस चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए अपना दावा पेश किया है. अकेले एक चिह्न पर इतने सारे उम्मीदवारों के […]

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नेशनल कंटेंट सेल

पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने जा रहे आम चुनाव में उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न के रूप में ‘जीप’ कुछ इस कदर भायी है कि पंजाब प्रांत में कम-से-कम 65 प्रत्याशियों ने इस चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए अपना दावा पेश किया है. अकेले एक चिह्न पर इतने सारे उम्मीदवारों के खड़े होने से ‘जीप’ अचानक से चर्चा में आ गयी है. इस चिह्न से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने वालों में पीएमएल एन के बागी प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक है.

निवर्तमान सरकार में आंतरिक मामलों के मंत्री रहे चौधरी निसार अली खान और प्रांतीय मंत्रालय के जईम कादरी भी इसी चिह्न से चुनाव लड़ने वाले हैं. पाकिस्तान चुनाव आयोग द्वारा प्रत्याशियों की अंतिम सूची प्रकाशित किये जाने के बाद, कुछ दिन पूर्व पीएमएल एन के 11 उम्मीदवारों ने पार्टी का टिकट लौटा दिया था और पार्टी के चुनाव चिह्न ‘शेर’ के बदले ‘जीप’ की मांग की है. इतना ही नहीं, अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच भी जीप काफी लोकप्रिय हो गयी है.

मरियम नवाज ने जीप वालों को कहा ‘खालाई मखलूक’

जीप की लोकप्रियता पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने कहा है कि जो लोग जीप चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ने वालों को वोट करेंगे, उनका वोट ‘खालाई मखलूक’(एलियंस) को जायेगा. नवाज शरीफ ने भी आश्चर्य जताते हुए कहा कि मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्यों सभी लोग जीप की सवारी करना पसंद कर रहे हैं.

ट्रांसजेंडरों को कहा जाता है ‘ख्वाजा सिरास’

पाकिस्तानी सरकार ने 2009 में ट्रांसजेंडरों को कानूनी मान्यता प्रदान की थी. वहां उन्हें ‘ख्वाजा सिरास’ कहा जाता है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब पांच लाख ट्रांसजेंडर हैं.

चुनाव आयोग ने दिये विशेष अधिकार

पाकिस्तान चुनाव आयोग ने ट्रांसजेंडरों को खास अधिकार प्रदान किये हैं. वह पुरुष अथवा महिला, किसी भी लाइन में खड़ी हो सकती हैं. लाइन में उन्हें प्राथमिकता दी जायेगी. अगर वे चाहें तो लाइन से निकलकर पहले अपना वोट डाल सकती हैं.

13 ने कराया था नामांकन, चार बचीं मैदान में

‘आप मुझे एक मौका दें. मैं पहली बार चुनाव लड़ रही हूं. आपका हर एक वोट मेरी पहचान को ताकत देगा.’ राजधानी इस्लामाबाद की बड़ी इमाम इलाके की गलियों में ट्रांसजेंडर नदीम कशिश आने जाने वालों से वोट देने की अपील कर रही है. चुनाव में वह पूर्व पीएम शाहिद खाकान अब्बासी और इमरान खान को चुनौती दे रही हैं. उनके हाथ में पार्टी का चुनावी लीफलेट है जिसमें वह लोगोंे से जल संरक्षण की अपील कर रही हैं. चुनाव में 13 ट्रांसजेंडरों ने नामांकन भरा था, लेकिन फंड की कमी से नौ ने अपना नाम वापस ले लिया है.

40 लाख अहमदिया नहीं डाल पायेंगे वोट
पाकिस्तान में अहमदी खुद को मुस्लिम कहते हैं पर पाकिस्तान का संविधान इससे इनकार करता है. इसका नतीजा यह हुआ है कि वह देश में होने जा रहे चुनाव में वोट नहीं दे पायेंगे. अधिकारिक तौर पर पाकिस्तान में दो लाख 91 हजार (1998 की पकिस्तानी जनगणना के अनुसार) अहमदी रहते हैं. दूसरी स्वतंत्र एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान में अहमदियों की संख्या करीब 40 लाख है.

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