गुजरात चुनाव: जो वलसाड जीतेगा, वही सूबे में लहराएगा जीत का परचम

Updated at : 03 Dec 2017 7:36 AM (IST)
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गुजरात चुनाव: जो वलसाड जीतेगा, वही सूबे में लहराएगा जीत का परचम

!!वलसाड से अंजनी कुमार सिंह!! वलसाड चौक पर मोरारजी देसाई म्यूजियम के सामने खड़े सुरेश वागिया चुनाव के विषय में कहते हैं- जो वलसाड जीतेगा, वही गुजरात जीतेगा. उनकी बात सुनते ही पास खड़े निमेष भाई पंचाल सीधे भाजपा की सरकार बनने की भविष्यवाणी कर देते हैं. इस चौक से कुछ ही दूरी पर कांग्रेस […]

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!!वलसाड से अंजनी कुमार सिंह!!

वलसाड चौक पर मोरारजी देसाई म्यूजियम के सामने खड़े सुरेश वागिया चुनाव के विषय में कहते हैं- जो वलसाड जीतेगा, वही गुजरात जीतेगा. उनकी बात सुनते ही पास खड़े निमेष भाई पंचाल सीधे भाजपा की सरकार बनने की भविष्यवाणी कर देते हैं. इस चौक से कुछ ही दूरी पर कांग्रेस का दफ्तर है, जहां पर उपाध्यक्ष भोला पटेल जातियों के वोट बैंक को समझाते हुए अपनी पार्टी की जीत का दावा करते हैं. दूसरी तरफ, भाजपा दफ्तर में चेतन भाई आदिवासी, मछुआरे और कोली समाज के वोट बैंक के आधार पर पूरे वलसाड में भाजपा की जीत का दावा करते हैं.

वलसाड सीट को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस सीट पर जिस पार्टी को जीत नसीब होती है, उसकी राज्य में सरकार बनती है. 1975 से लेकर अब तक के चुनाव नतीजे इस मान्यता को पुष्ट करते हैं. यही नहीं, लोकसभा चुनाव में भी वलसाड सीट जीतने वाली पार्टी केंद्र में सरकार बनाती रही है. आजादी के बाद से अब तक ऐसा ही होता आया है.

वलसाड की पहचान मशहूर आम अलफांसो (हापुस) से है. यहां के गांवों में आम के बगीचे खूब हैं, जिन पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था टिकी है. केमिकल हब वापी भी है. केंद्रशासित प्रदेश दमन और दादरा नगर हवेली पास ही है. स्वतंत्रता सेनानी भूलाभाई देसाई यहीं के निवासी थे. नेहरू-गांधी परिवार का भी यहां से पुराना नाता है. फिरोज गांधी का परिवार वलसाड का ही रहनेवाला था. इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोरारजी देसाई का गांव भी यहीं है. इस लिहाज से गुजरात के राजनीतिक युद्ध में वलसाड काफी महत्वपूर्ण है.

कांग्रेस नेता इकवाल शेख बताते हैं कि भाजपा सरकार इलाके का अपेक्षित विकास नहीं कर पायी है. लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है. वहीं भाजपा के केतन भाई कहते हैं कि कांग्रेस समाज काे बांटकर चुनाव जीतने की कोशिश में लगी हुई है. हालांकि, आम लोग दोनों नेताओं के तर्क से पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहे हैं. भरत भाई राजपूत कहते हैं कि, इस बार मुकाबला थोड़ा कड़ा है, लेकिन भाजपा की बढ़त है. इसके उलट यासीन सिद्दीकी शेख कहते हैं कि आम लोगों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ा है, क्योंकि किसान और युवा परेशान हैं. वलसाड में आदिवासी परंपरागत तौर पर कांग्रेस के साथ रहे हैं. लेकिन, इस बार हालात बदले हुए हैं. भाजपा आदिवासियों को अपने पाले में लाने की भरसक कोशिश कर रही है. इस बार यहां से कांग्रेस से नरेंद्र टंडेल, तो भाजपा से विधायक भरत भाई पटेल हैं. पटेल ने पिछली बार कांग्रेस के धर्मेश पटेल को 36 हजार मतों से हराया था.

वलसाड से 20 किमी दूर धरमपुर (अजजा)विस क्षेत्र है. पिछली बार तीन सुरक्षित सीटों में से कांग्रेस ने दो पर बाजी मारी थी. इस बार लड़ाई कांटे की है. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा यहां पर रोड शो कर चुके हैं. कांग्रेस के आदिवासी नेता भी प्रचार को आनेवाले हैं.

उपेक्षा का शिकार मोरारजी देसाई का जन्म स्थान

वलसाड शहर से 7-8 किलोमीटर दूर है मोरारजी देसाई का गांव लीलापुर भदेली. पूर्व प्रधानमंत्री का पैतृक मकान (जिसमें उनका जन्म हुआ था) जर्जर है. प्राईमरी स्कूल की हालत भी कुछ वैसी ही है. हां! उनके सम्मान में वहां पर उनकी एक मूर्ति लगी है. पैतृक आवास किसी दूसरे देसाई परिवार रतिलाल नाथु भाई देसाई को बेच दिया गया है. अब यह परिवार भी इसे बेचना चाहता है. परिवार के पंकज देसाई कहते हैं, यदि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री के आवास को लेकर उनके सम्मान में कुछ करना चाहती है, तो वह बातचीत के लिए तैयार है. गांव की ही तृप्ति देसाई का कहना है, मोरारजी देसाई को जैसा सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पाया है.

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