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दो माह के अंदर दूसरा सबसे बड़ा ग्लोबल साइबर अटैक, कई नामी-गिरामी कंपनियां चपेट में, भारत पर असर नहीं

Updated at : 27 Jun 2017 10:30 PM (IST)
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दो माह के अंदर दूसरा सबसे बड़ा ग्लोबल साइबर अटैक, कई नामी-गिरामी कंपनियां चपेट में, भारत पर असर नहीं

कीव/नयी दिल्ली : कुछदिन पहले हुए ‘वॉनाक्राई रैनसमवेयर’ हमले से साइबर वर्ल्ड अभी उबरा भी नहीं था कि एक बार फिर मंगलवार को पूरी दुनिया पर बड़ा साइबर अटैक होने की खबर है. ब्रिटिश विज्ञापन एजेंसी डब्ल्यूपीपी समेत दर्जनों कंपनियां इससे प्रभावित हुई हैं. इसका सबसे बुरा असर यूक्रेन में हुआ है. वहां सरकारी मंत्रालयों, […]

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कीव/नयी दिल्ली : कुछदिन पहले हुए ‘वॉनाक्राई रैनसमवेयर’ हमले से साइबर वर्ल्ड अभी उबरा भी नहीं था कि एक बार फिर मंगलवार को पूरी दुनिया पर बड़ा साइबर अटैक होने की खबर है. ब्रिटिश विज्ञापन एजेंसी डब्ल्यूपीपी समेत दर्जनों कंपनियां इससे प्रभावित हुई हैं. इसका सबसे बुरा असर यूक्रेन में हुआ है. वहां सरकारी मंत्रालयों, बिजली कंपनियों और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में बड़ी खराबी आयी है. यूक्रेन का सेंट्रल बैंक, सरकारी बिजली वितरक कंपनी यूक्रेनेर्गो, विमान निर्माता कंपनी एंतोनोव और दो डाक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. राजधानी कीव की मेट्रो में पेमेंट कार्ड काम नहीं कर रहे हैं. कई पेट्रोल स्टेशनों को काम-काज रोकना पड़ा है. रूस की शीर्ष तेल उत्पादक कंपनी रोजनेफ्ट समेत कई बड़ी कंपनियों ने भी कहा है कि वे साइबर अटैक से प्रभावित हुई हैं. हालांकि, इस साइबर अटैक के भारत में प्रभाव को लेकर अभी कोई खबर नहीं आयी है.

रोजनेफ्ट ने बयान जारी कर कहा है उसके ‘आईटी सिस्टम्स इस साइबर हमले के शिकार हुए हैं.’ माना जा रहा है कि यह साइबर अटैक रैनसमवेयर जैसा ही गंभीर हो सकता है. कंपनी ने कहा कि स्थिति का आकलन किया जा रहा है और जरूरी उपाय किये जा रहे हैं. कंपनी ने कहा कि बड़े साइबर अटैक ने उसके सर्विस सिस्टम को प्रभावित किया है. मॉस्को स्थित एक साइबर सिक्युरिटी फर्म आईबी ने कहा कि उसे रूस और यूक्रेन में समान रूप से पीड़ित लोगों की जानकारी मिली है. वहीं, डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन स्थित ग्लोबल शिपिंग कंपनी ने कहा कि उसका कंप्यूटर सिस्टम भी साइबर अटैक से प्रभावित हुआ है.

ये भी पढ़ें: साइबर हमलावरों ने 40,000 कंप्यूटरों में किया रैनसमवेयर का अटैक, दुनिया के 150 देशों में भारत तीसरा सबसे बड़ा शिकार

सरे यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर वैज्ञानिक ऐलन वुडवर्ड ने कहा, ‘यह हमला रैनसमवेयर के एक हिस्से का ही एक प्रकार हो सकता है.’ उन्होंने कहा, ‘जब इसके कुछ पहलुओं पर काबू पा लिया गया तो इसी साल अपराधियों ने इसे अपडेट किया था. रैनसमवेयर का नाम पेट्या था और इसके अपडेटेड वर्जन को पेट्रवैप कहा गया.’ रूसी तेल निर्माता कंपनी और डेनमार्क की शिपिंग कंपनी मैयास्क ने भी तकनीकी गड़बड़ी की शिकायत की है. कोपेनहेगन में मुख्यालयवाली कंपनी मैयास्क ने कहा, ‘हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि कई व्यापारिक इकाइयां साइबर हमले की वजह से काम नहीं कर पा रही हैं. स्पेन की मीडिया की खबरों केे अनुसार, कई मल्टीनेशनल कंपनियां जैसे मॉन्डेलेज और कानूनी कंपनी डीएलए पाइपर भी हमले की चपेट में हैं. कंस्ट्रक्शन का सामान बनानेवाली फ्रांसीसी कंपनी सेंट गोबेन ने भी ऐसी शिकायतें की हैं.

जानकारों के मुताबिक, यह हमला यूक्रेन से किया गया हो सकता है अौर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके स्पेन और भारत समेत अन्य देशों में भी फैलने की संभावना है. यह अटैक जिन देशों को अपनी चपेट में ले चुका है उसके बुनियादी ढांचे को तहस-नहसकर देगा. हालांकि, अभी इस अटैक के कारणों का पता नहीं चल सका है. आरंभिक रिपोर्टों के अनुसार यह हमला एक ही समय में यूक्रेन और रूस में किया गया.

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