एक पैर से बड़ा डांसर बनने की राह पर दौड़ रही रेखा
आपने हजारों बार यह लाइन सुनी होगी कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों मे जान होती है। पंखो से कुछ नही होता हौसलों से उढ़ान होती है.
आपने हजारों बार यह लाइन सुनी होगी कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों मे जान होती है। पंखो से कुछ नही होता हौसलों से उढ़ान होती है. इस पूरी लाइन को सच करके दिखाने वाले विरले ही मिलते हैं और जब ऐसे लोगों से आपका रब्ता होता है, तो आपके मन मस्तिष्क में यह लाइन खुद ब खुद आ जाती है. हौसले की ऐसी ही कहानी है 19 साल की रेखा मिश्रा.
आपके शहर में
बलियापुर मुख्यालय से 9 किमी दूर वीरसिंहपुर पंचायत के शीतलपुर मिश्रा टोला के रहने वाले किसान कृष्णा मिश्रा की 19 साल की बेटी रेखा मिश्रा पूरे इलाके में किसी परिचय की मोहताज नहीं है. उनका एक पैर नहीं है लेकिन वह अपने हौसलों के दम पर पूरे आसमां मे सैर करने की ताकत रखती है.
अपनी कला और हौसले के दम पर एक पैर न होने के बावजूद वह इस तरह नांचती हैं कि आपके कदम भी थिरकने लगें. इनके बनाये गये वीडियो सोशल मिडिया में धूम मचा रहे है. बेहतर डांस के लिए 5 साल पूर्व पर्जन्य बीएड कॉलेज बलियापुर व दो साल पूर्व एसएसएलएनटी कॉलेज धनबाद के कार्यक्रमों में पुरस्कार से उन्हें नवाजा गया है. प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय शीतलपुर में भी पुरस्कृत हुई है.
एक हादसे में रेखा मिश्रा ने अपना एक पैर खो दिया. साल 2014 में अक्तूबर महिना में पश्चिम बंगाल के एक गांव में मेला देखने गयी थी. जव वो वापस लौट रहीं थी तो पश्चिम बंगाल के दुबड़ा पाड़ा के बीच गुड़गुड़िया मे सड़क हादसे मे उनका पर बुरी तरह जख्मी हो गया, चिकिसको को उसका पैर काटना पड़ा.
घटना आठ साल बीत जाने के वावजूद अभी तक मुआवजा नहीं मिला. मामला अब भी कोर्ट में है – रेखा मिश्रा को डांस का शौख था इस कमी को उन्होंने अपने हौसले और सपने के बीच आने नहीं दिया टीवी और मोबाइल से वह डांस सिखती रहीं और आज अपने दम पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हो रहीं है. रेखा मिश्रा एसएसएलएनटी धनबाद मे होस्टल में रहकर बीएससी कर रही है. अब भी वह बड़ा डांसर बनने के सपने के राह पर दौड़ रहीं है .
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