इस दिन है गणगौर तीज व्रत, जानें क्या इसका महत्व

Updated at : 14 Mar 2026 8:49 AM (IST)
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Gangaur 2026

गणगौर तीज 2026

Gangaur 2026: गणगौर तीज व्रत 2026 का पर्व 21 मार्च को मनाया जाएगा. जानें तृतीया तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत का धार्मिक महत्व और महिलाओं द्वारा किए जाने वाले गणगौर पूजन की परंपराएं.

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Gangaur 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला गणगौर पर्व उत्तर भारत के प्रमुख और आस्था से जुड़े त्योहारों में से एक है. खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और कई उत्तरी राज्यों में यह पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं और युवतियां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इसे रखती हैं.

गणगौर व्रत 2026 की सही तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि 21 मार्च 2026 को पड़ रही है. तृतीया तिथि का आरंभ 21 मार्च को देर रात 2 बजकर 30 मिनट से होगा और इसका समापन उसी दिन रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा. इसलिए इस वर्ष गणगौर तीज का व्रत शनिवार, 21 मार्च 2026 को रखा जाएगा.

गणगौर पूजा के शुभ मुहूर्त

इस पावन दिन पूजा और व्रत के लिए कुछ विशेष शुभ समय बताए गए हैं, जिनमें पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है.

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:49 बजे से 5:36 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:52 बजे तक
  • पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 7:55 बजे से 9:26 बजे तक

इन शुभ मुहूर्तों में पूजा करने से व्रत का फल अधिक शुभ माना जाता है.

गणगौर तीज का धार्मिक महत्व

गणगौर तीज का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करना है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महिलाएं माता पार्वती से अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में प्रेम की कामना करती हैं. वहीं कुंवारी कन्याएं आदर्श जीवनसाथी पाने के लिए व्रत रखती हैं और माता गौरी से आशीर्वाद मांगती हैं.

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व्रत और पूजा की तैयारी

इस दिन महिलाएं प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और घर में गणगौर यानी शिव-पार्वती की मूर्तियों को स्थापित करती हैं. इन मूर्तियों का विधि-विधान से पूजन किया जाता है. पूजा में सुहाग की सामग्री, फूल, फल और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं. कई स्थानों पर महिलाएं पारंपरिक आभूषणों और श्रृंगार की वस्तुओं की भी पूजा करती हैं, जिससे घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बना रहे. गणगौर का यह पावन पर्व भक्ति, आस्था और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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