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UP Panchayat Election 2021 : आरक्षण से बदला सियासी समीकरण, मुलायम सिंह यादव का परिवार सैफई से बाहर

Updated at : 04 Mar 2021 9:50 PM (IST)
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UP Panchayat Election 2021 : आरक्षण से बदला सियासी समीकरण, मुलायम सिंह यादव का परिवार सैफई से बाहर

UP Panchayat Election News उत्तर प्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनावों (UP Panchayat Chunav 2021) को लेकर सूबे में सियासी सरगर्मियां तेज हो गयी है. वहीं, मंगलवार को जारी हुई नई आरक्षण सूची को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है. दरअसल, पंचायत चुनाव में आरक्षण ने ऐसा समीकरण सेट कर दिया है, जिससे कई बड़े सियासी परिवारों के हाथ से कुर्सी फिसलने जा रही है. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के परिवार का नाम भी शामिल हो गया है. दरअसल, सैफई सीट एससी महिला के लिए आरक्षित हुई है.

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UP Panchayat Election News उत्तर प्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनावों (UP Panchayat Chunav 2021) को लेकर सूबे में सियासी सरगर्मियां तेज हो गयी है. वहीं, मंगलवार को जारी हुई नई आरक्षण सूची को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है. दरअसल, पंचायत चुनाव में आरक्षण ने ऐसा समीकरण सेट कर दिया है, जिससे कई बड़े सियासी परिवारों के हाथ से कुर्सी फिसलने जा रही है. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के परिवार का नाम भी शामिल हो गया है. दरअसल, सैफई सीट एससी महिला के लिए आरक्षित हुई है.

गौर हो कि पिछले 25 वर्षों से सैफई ब्लॉक प्रमुख सीट पर लगातार मुलायम सिंह यादव के परिवार का कब्जा था. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के गृहक्षेत्र सैफई ब्लॉक प्रमुख की सीट इस बार अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई है. इससे मुलायम परिवार को तगड़ा झटका लगा है. बता दें कि साल 1995 में सैफई ब्लॉक बना है. जिसके बाद से ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर मुलायम सिंह के परिवार परिवार का कब्जा रहा है, लेकिन इस बार उनके परिवार से बाहर कोई सदस्य इस कुर्सी पर काबिज होगा.

दरअसल, ब्लॉक प्रमुख की सीट की तरह सैफई प्रधान का पद भी एससी के लिए आरक्षित हो गया है, जिसके चलते इस बार मुलायम सिंह यादव के बचपन के साथी दर्शन यादव के परिवार के हाथों से ग्राम प्रधानी की कमान निकल जाएगी. वह पहली बार 1972 में सैफई के ग्राम प्रधान बने थे और तब से लेकर पिछले चुनाव तक यानी लगातार 48 साल तक वह प्रधान रहे. अक्टूबर 2020 में उनके निधन के बाद जिलाधिकारी ने उनके परिवार की बहू को प्रधान पद की जिम्मेदारी सौंप दी थी. हालांकि, इस बार यह सीट मुलायम के के मित्र के परिवार के हाथ से बाहर निकल जाएगी.

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने नए सिरे से पंचायत चुनाव की आरक्षण की प्रक्रिया को लागू किया और जो सीटें कभी एससी के लिए आरक्षित नहीं रही हैं उनको प्राथमिकता पर एससी के लिए आरक्षित कराने का फरमान जारी किया था. इसी जद में सैफई ब्लॉक प्रमुख और ग्राम पंयाचत सहित सूबे की तमाम सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई हैं. जिसके चलते तमाम नेताओं की जिला पंचायत, ग्राम पंचायत और ब्लॉक प्रमुख सीट पर कायम सियासी वर्चस्व इस बार टूट गया है.

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