Yashoda Jayanti 2021: भगवान कृष्ण की पालनहार मां यशोदा की जयंती आज, ऐसे करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, सामग्री डिटेल व इस दिन का महत्व
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 04 Mar 2021 6:33 AM
Yashoda Jayanti 2021, Date And Time, Shri Krishna, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Samagri Detail, Importance: हर वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाने की परंपरा होती है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह तिथि 4 मार्च यानी आज पड़ रही है. आपको बता दें कि आज रात 12 बजकर 21 मिनट से ही इस तिथि का आरंभ हो चुका है. जो आज ही की रात 09 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण की पालनहार मां यशोदा ही थी. श्री कृष्ण को जन्म तो देवकी ने दिया था लेकिन, देखभाल और पाला था मां यशोदा ने.
Yashoda Jayanti 2021, Date And Time, Shri Krishna, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Samagri Detail, Importance: हर वर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाने की परंपरा होती है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह तिथि 4 मार्च यानी आज पड़ रही है. आपको बता दें कि आज रात 12 बजकर 21 मिनट से ही इस तिथि का आरंभ हो चुका है. जो आज ही की रात 09 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण की पालनहार मां यशोदा ही थी. श्री कृष्ण को जन्म तो देवकी ने दिया था लेकिन, देखभाल और पाला था मां यशोदा ने.
यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त
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यशोदा जयंती तिथि: 4 मार्च (गुरुवार), 2021
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यशोदा जयंती आरंभ तिथि: षष्ठी तिथि 4 मार्च की रात 12 बजकर 21 मिनट से
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यशोदा जयंती समाप्ति तिथि: 4 मार्च की रात 9 बजकर 58 मिनट पर
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आपको बता दें कि आज के दिन श्री कृष्ण भक्त विधि विधान से कृष्ण जी के अलावा मां यशोधा की भी पूजा करते हैं.
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गोकुलधाम में भगवान कृष्ण के गांव पर आज का दिन पूरे उत्साह के साथ यशोदा जयंती मनाया जाता है
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आज के दिन भक्त सबसे पहले सुबह उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करते हैं
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फिर, मां यशोदा के व्रत का संकल्प लेते हैं,
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श्री कृष्ण के साथ मां यशोदा को पूजा में अगरबत्ती फुल, तुलसी, चंदन, हल्दी, कुमकुम और नारियल के इस्तेमाल से विधि विधान से पूजा करते हैं
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यशोदा माता और श्रीकृष्ण को केले पान और सुपारी का भोग भी लगाते हैं
क्या है यह यशोदा जयंती का महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण और यशोदा माता की विधि विधान से पूजा करने से पापों का नाश होता है. साथ ही साथ संतान की प्राप्ति या उनसे जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए यह व्रत रखा जाता है.
Posted By: Sumit Kumar Verma
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