रहस्य बने हुए हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़े ये पहलू, ‘हिस्ट्री ऑफ INA’ के पन्नों में बंद है राज

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 Jan 2023 9:28 AM

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नेताजी के साथी आबिद हसन सहित चश्मदीद गवाहों का कहना है कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक हवाई हादसे में हुई थी. इस पर यद्यपि कुछ लोगों को संदेह है. जांच के लिए गठित तीन आधिकारिक आयोगों में से एक ने भी सवाल नहीं उठाये हैं.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 126वीं जयंती पर सारा भारत-वर्ष श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है. उनके जीवन से जुड़े कुछ पहलू अब भी रहस्य बने हुए हैं. रक्षा मंत्रालय की लिखी गयी किताब ‘हिस्ट्री ऑफ आइएनए’ आज तक लोगों की नजरों से दूर है और माना जाता है कि उसमें नेताजी के बारे में कुछ खुलासे हैं. दिवंगत प्रोफेसर प्रतुल चंद्र गुप्ता के नेतृत्व में इतिहासकारों के एक दल ने शोधकर्ताओं के लेखों का संकलन कर उसे किताब की शक्ल दी है.

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वस्त किया था कि वह जुलाई 2011 में इसे प्रकाशित कर देगी, पर अब तक ऐसा नहीं किया गया है. यह रहस्य उस ‘नोट’ की प्रति से और गहरा गया है, जिसे विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कथित तौर पर लिखा था और उसे तृणमूल कांग्रेस सांसद व नेताजी पर लंबे समय से शोध कर रहे सुखेंदु शेखर राय के ‘लेटर बॉक्स’ में डाल दिया गया. लिखा गया कि लेख के प्रकाशन से ‘क्षेत्र में किसी भी देश के साथ भारत के संबंध प्रभावित नहीं होंगे. नेताजी बोस की मौत से संबंधित पृष्ठों (186-191) के अधिक विवादास्पद होने की संभावना है.’ राय की ओर से साझा किये गये ‘नोट’ के अनुसार, “दुर्भाग्यवश वर्तमान खंड से (बोस की मृत्यु के) विषय में कोई स्पष्टता नहीं मिली और बस एक विचार साझा किया गया कि शायद नेताजी सुभाष चंद्र बोस विमान दुर्घटना में जीवित बच गये थे.’ इस नोट की विश्वसनीयता की प्रभात खबर पुष्टि नहीं करता.

नेताजी के साथी आबिद हसन सहित चश्मदीद गवाहों का कहना है कि सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक हवाई हादसे में हुई थी. इस पर यद्यपि कुछ लोगों को संदेह है. जांच के लिए गठित तीन आधिकारिक आयोगों में से एक ने भी सवाल नहीं उठाये हैं. बकौल सांसद सुखेंदु शेखर राय, ‘मैंने जनवरी 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सब इंगित करते हुए एक पत्र लिखा और किताब जारी करने की गुहार लगायी थी. आज तक उस पर प्रत्युत्तर नहीं मिला.’ उन्होंने यह भी बताया, इस कथित ‘नोट’ के निष्कर्ष में कहा गया है कि विदेश मंत्रालय को ऐसे प्रकाशन पर राजनीतिक दृष्टि से कोई आपत्ति नहीं हो सकती.’

प्रोफेसर गुप्ता मराठा इतिहास के प्रसिद्ध विशेषज्ञ थे, जो बाद में शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति बने. उन्हें भारतीय राष्ट्र सेना उर्फ आजाद हिंद फौज (आइएनए) के सैन्य इतिहास पर लिखने को चुना गया था. नेताजी के परिवार के अधिकतर सदस्यों यथा उनकी बेटी अनीता बोस फाफ और परपोते व इतिहासकार सुगत बोस मानते हैं कि नेताजी की मृत्यु 1945 में ताइपे विमान हादसे में हो गयी थी. कई लोगों की मांग है कि विमान दुर्घटना के बाद जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी अस्थियों को भारत लाकर डीएनए टेस्ट कराया जाये, ताकि इस मुद्दे का हमेशा के लिए हल हो सके.

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