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बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लायेगी तृणमूल कांग्रेस

Updated at : 21 May 2021 5:49 PM (IST)
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बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लायेगी तृणमूल कांग्रेस

बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता तलाश रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता तलाश रही है. इसमें महाभियोग प्रस्ताव शामिल है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच टकराव के बीच तृणमूल कांग्रेस ने श्री धनखड़ को हटाने अथवा उनके खिलाफ संसदीय कार्रवाई का हर संभावित रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है.

पार्टी के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने बताया कि राज्यपाल के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग लाने की तैयारी की जा रही है. इसमें उनकी भूमिका को लेकर चर्चा होगी. इसके अलावा संसद में मोशन की भी तैयारी की जा रही है. चूंकि राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती.

दरअसल, नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में ममता बनर्जी की कैबिनेट के दो सहयोगियों सहित चार बड़े नेताओं को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है. यह सब कुछ संभव हुआ है राज्यपाल की अनुमति की वजह से. इसलिए तृणमूल कांग्रेस अब राज्यपाल के खिलाफ भी आखिरी लड़ाई के लिए तैयार है.

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आरोप है कि जगदीप धनखड़ अति सक्रिय रहते हैं और राज्य के अधीनस्थ मामलों में भी दखलअंदाजी करते हैं. पिछले साल के आखिरी दिनों में पार्टी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिखकर राज्यपाल को हटाने की मांग की थी, लेकिन वह चिट्ठी अबू तक स्वीकृत नहीं हुई है.

बंगाल में राज्यपाल और सरकार के बीच होता रहा है टकराव

  • 1967 में राज्यपाल धर्मवीर के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री अजय मुखर्जी का भी टकराव हुआ था.

  • माकपा के बड़े नेता प्रमोद दासगुप्ता का भी टकराव राज्यपाल बीडी पांडे के साथ हुआ था, जिसकी वजह से उन्होंने राज्यपाल का नाम ‘बांग्ला दमन पांडे’ रख दिया था.

  • राज्यपाल एपी शर्मा के साथ तत्कालीन वाममोर्चा सरकार का 1984 में जबर्दस्त टकराव हुआ था. तब राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव इतना बढ़ गया था कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र को चिट्ठी लिखकर साफ किया था कि राज्यपाल की कोई जरूरत नहीं है.

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इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल कहते हैं कि राज्यपाल को अति सक्रियता नहीं दिखानी चाहिए. अगर किसी मुद्दे को लेकर उन्हें समस्या है, तो वह अपनी रिपोर्ट केंद्र को दे सकते हैं, लेकिन जिस तरह से वर्तमान राज्यपाल ट्विटर और सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह चुनी हुई सरकार को उपेक्षित करने जैसा है.

तृणमूल सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि राज्यपाल का पद वैधानिक है और इसके अधिकार केवल लोगों के हित के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, न कि सरकार को परेशान करने के लिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्यपाल के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के लिए पार्टी हरसंभव कदम उठायेगी और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाया जायेगा.

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Posted By: Mithilesh Jha

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