तिग्मांशु धूलिया ने क्यों कहा- इरफान खान के जाने के बाद मैं थम सा गया हूं

फिल्म ‘‘पान सिंह तोमर’’ के लिए तिग्मांशु धूलिया को पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था, जबकि इरफान खान को उनके शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला. देश में बनी कुछ सर्वश्रेष्ठ बायोपिक में से एक समझी जानी वाली इस फिल्म में इरफान ने डाकू पान सिंह का किरदार निभाया था.
निर्देशक तिग्मांशु धूलिया का मानना है कि उनके करीबी मित्र और अभिनेता इरफान खान की मौत के बाद मायानगरी में उनका सफर थम सा गया है. धूलिया की पहली निर्देशित फिल्म “हासिल” (2003) और बाद में “पान सिंह तोमर” (2012) में इरफान खान मुख्य किरदार में थे. वह मानते हैं कि कुछ किरदार केवल इरफान ही निभा सकते थे.
फिल्म ‘‘पान सिंह तोमर’’ के लिए धूलिया को पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था, जबकि इरफान खान को उनके शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला. देश में बनी कुछ सर्वश्रेष्ठ बायोपिक में से एक समझी जानी वाली इस फिल्म में इरफान ने डाकू पान सिंह का किरदार निभाया था.
धूलिया (55) ने पीटीआई-भाषा को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इरफ़ान एक ऐसे अभिनेता थे, जिनके लिए किरदार लिखना बहुत अच्छा लगता था. मैं उनके लिए जटिल किरदारों और स्थितियों को गढ़ना पसंद करता था, क्योंकि मुझे पता था कि वह इसे समझने और इसे निभाने में सक्षम थे. मेरा मानना है कि ऐसा कोई और अभिनेता नहीं है, जिसके पास यह समझ हो.”
उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि उनके जीवन के आखिरी दो सालों में हमने साथ काम करने की बात नहीं की थी. हालांकि उस दौरान इरफान काफी व्यस्त थे. लेकिन अब अगर मुझे कुछ करने की महत्वाकांक्षा भी है, तो मैं इसे कभी नहीं कर पाऊंगा क्योंकि वह अब हमारे साथ नहीं हैं.” धूलिया ने कहा, “एक कलाकार के रूप में वह मुझे और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे. जब से वह हमें छोड़कर गए हैं, मैं थम सा गया हूं. यह सबसे बड़ी समस्या है.’’
उन्होंने कहा, “मैं युवा निर्देशकों से हमेशा यह कहता हूं कि आप शुरू में जो भी करें, उसे पैसे के लिए न करें, बस उसे सर्वश्रेष्ठ तरीके से करें. चाहे वह कारगर हो या न हो, यह अलग बात है. आप हमेशा अपनी पहली फिल्म के लिए याद किए जाओगे.”
तिग्मांशु धूलिया की पहली फिल्म ‘‘हासिल’’ 16 मई को बीस साल पूरे कर लेगी. इस फिल्म को अपने करियर के लिए मील का पत्थर बताते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘हासिल’’ की रिलीज के बाद कई निर्माताओं ने बड़ी फिल्मों के लिए उनके साथ अनुबंध किए लेकिन वे फिल्में नहीं चलीं. इनमें सनी देओल की पीरियड ड्रामा ‘‘गुलामी’’ भी थी. उन्होंने कहा ‘‘मुझे पता नहीं कि मेरे साथ क्या हुआ. ‘चरस’ के बाद सात साल तक मेरे पास कोई फिल्म नहीं थी. कुछ फिल्मों के साइनिंग अमाउंट की वजह से मैंने इतना समय गुजार लिया. जो काम मिला, वह इसलिए मिला क्योंकि मैंने ‘हासिल’ बनाई थी. वरना लोग मुझे भूल गए होते.’’
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‘‘हासिल’’ छात्र राजनीति पर आधारित थी. इसी विषय पर धूलिया ने ‘‘गरमी’’ की पटकथा लिखी और फिल्म का निर्देशन किया जो 21 अप्रैल को रिलीज होगी. उन्होंने कहा ‘‘तैयारी बहुत पहले से थी. 20 साल के अंतराल के बाद, समाज में हो रहे घटनाक्रम का नए नजरिये से विश्लेषण करना दिलचस्प होगा.’’ ‘‘गरमी’’ की निर्माता स्वरूप संपत और हीमल अशोक ठक्कर हैं. फिल्म में मुकेश तिवारी, विनीत कुमार और व्योम यादव ने काम किया है.
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