Corona Effect : खाली हुआ महानगर का सबसे बड़ा ब्लड बैंक, खून की कमी से जूझ रहे हैं मरीज

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Mar 2020 3:25 AM

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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) अब ब्लड बैंकों पर कहर ढाने लगा है. ब्लड बैंकों में रक्त की कमी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है. राज्य सरकार के तमाम निर्देशों के बाद भी लोग रक्तदान करने से कतरा रहे हैं. रक्तदान शिविरों का आयोजन भी नहीं हो पा रहा है. इससे ब्लड बैंकों के पास आवश्यक बल्ड संग्रह नहीं हो पा रहा है.

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शिव कुमार राउत, कोलकाता : वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) अब ब्लड बैंकों पर कहर ढाने लगा है. ब्लड बैंकों में रक्त की कमी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है. राज्य सरकार के तमाम निर्देशों के बाद भी लोग रक्तदान करने से कतरा रहे हैं. रक्तदान शिविरों का आयोजन भी नहीं हो पा रहा है. इससे ब्लड बैंकों के पास आवश्यक बल्ड संग्रह नहीं हो पा रहा है. इसका खामियाजा थैलेसीमिया व हीमोफिलिया रोग से पीड़ित बच्‍चों को भी भुगतना पड़ रहा है. गौरतलब है कि इस रोग से पीड़ित बच्चों को हर महीने खून चढ़ाना आनिवार्य होता है. महामारी जैसी हालत में ऐसे मरीज खून के लिए दर-दर भटक रहे हैं. उल्लेखनीय है कि यहां राज्य सरकार के 84 ब्लड बैंक हैं, जबकि निजी 35 व केंद्र सरकार द्वारा संचालित 16 ब्लड बैंक चलते हैं. हर साल करीब 15 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन 11 लाख यूनिट रक्त का ही संग्रह हो पाता है. अभी सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोलकाता के सेंट्रल ब्लड बैंक का स्टॉक भी खाली हो गया है.

स्वास्थ्य विभाग के निर्देशिका का भी असर नहीं : लॉक डाउन के दौरान महानगर कोलकाता के साथ ही राज्य के अन्य हिस्सों में भी खून की कमी न हो, इसके लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से गत सोमवार को एक निर्देशिका जारी की गयी थी. इसके अनुसार रक्तदान शिविरों का आयोजन करनेवालों को एक शिविर में अधिक से अधिक 30 लोगों से ही रक्तदान कराने का निर्देश दिया गया है और यह भी कि एक साथ चार से पांच रक्तदाता से रक्त लिया जा सकता है. रक्तदान शिविर के दौरान भीड़ ना हो, इसके लिए एक मेडिकल ऑफिसर व अधिक से अधिक तीन वालंटियर एक मीटर की दूरी पर तैनात रह सकते हैं. लेकिन इस सरकारी निर्देश के बाद भी स्वयंसेवी संगठन ब्लड डोनेशन कैंपों का आयोजन नहीं करा पा रहे हैं.

90 फीसदी रक्तदान शिविर पड़े ठप्प : एक स्वयंसेवी संगठन के सदस्य ने बताया कि महानगर में लॉकडाउन के दौरान पुलिस एक जगह लोगों को इकट्ठा नहीं होने दे रही है. पर रक्तदान शिविरों में एक साथ कई लोग इकट्ठा हो जाते हैं. इसके लिए माइकिंग करके भी लोगों को शिविरों तक बुलाया जाता है. लेकिन इस बंदी के दौरान जहां एक ओर जरूरत के सामान खरीदने में लोग व्यस्त हैं, तो पर दूसरी तरफ ब्लड डोनेशन के लिए पुलिस माइकिंग की अनुमति नहीं दे रही है. इस वजह से 90 फीसदी रक्तदान शिविरों का आयोजन ही नहीं हो पा रहा है. कुछ स्वयंसेवी संगठन कुछ क्लब के सदस्यों से संपर्क कर सीधे ब्लड बैंकों में ही रक्तदान करवा रहे हैं.

सबसे बड़े ब्लड बैंक में रक्त नदारद : मानिकतल्ला स्थित राज्य के सबसे बड़े सेंट्रल ब्लड बैंक में भी रक्त की कमी है. इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लड ट्रांस्फ्यूशन मेडिसिन एंड इम्यूनो हीमैटोलॉजी नामक इस संस्थान में करीब एक हजार यूनिट रक्त संग्रह कर रखने की क्षमता है. प्रतिदिन यहां से 200 से 250 यूनिट रक्त बाहर जाता है. लॉक डाउन से पहले ब्लड बैंक को रक्त संग्रह करने के लिए अंतिम बार गत रविवार को चंदननगर बुलाया गया था. वहां से ब्लड बैंक को करीब 40 यूनिट रक्त मिला था. गुरूवार को इस ब्लड बैंक का स्टॉक खत्म हो गया है. कोलकाता के दूसरे सरकारी व निजी ब्लड बैंकों में भी खून की कमी है. इसके अलावा लायंस क्लब के भी दो ब्लड बैंक हैं. इन दोनों का भी स्टॉक अब समाप्त हो चुका है.

एक ही ग्रुप वाले व्यक्ति से लिया जा रहा है ब्लड : सेंट्रल ब्लड बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि ब्लड की क़िल्लत को देखते हुए मरीज के परिजनों से ही रक्तदान करवाया जा रहा है. मरीज के रक्त ग्रुप वाले व्यक्ति से ही रक्त लिया जा रहा है. इसके बाद ब्लड की जरूरती जांच के बाद उस मरीज के नाम से ब्लड इश्यू किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब एक ही ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति से रक्त लेकर मरीज को दिया जा रहा है.

स्वेच्छा से करें रक्तदान : इस ब्लड बैंक के एक अधिकारी के बताया कि काफी कोशिश के बाद बेलियाघाटा इलाके में एक स्वयंसेवी संगठन द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में इन्हें बुला गया. यहां 40 लोग रक्तदान कर सकते हैं. इसके अलावा अगर आम लोग चाहें, तो वे सीधे सेंट्रल ब्लड बैंक में आ कर भी रक्तदान कर सकते हैं, ताकि इस कठिन समय में रोगियों को खून की कमी के चलते पैदा हो रहे संकट से जूझना न पड़े.

सरकार उठाये आवश्यक कदम

कोरोना वायरस के खतरे के चलते इन दिनों रक्तदान शिविर नहीं लगाये जा रहे. ऐसे में सरकार रक्तदान करनेवालों को विशेष छूट दे तथा रक्तदान शिविर लगाने के लिए जगह निर्धारित कर दे. जहां तक बात थैलेसीमिया व हीमोफीलिया पीड़ित मरीजों की है, तो उन्हें प्रतिमाह दो से तीन बार रक्त की जरूरत पड़ती है. इस बात का ध्यान प्रशासन को रखना चाहिए. सीएम स्वयं ही राज्य की स्वास्थ्य मंत्री भी हैं. आशा है कि इस विषय को गंभीरता से लिया जायेगा, ताकि रक्तदान के लिए लोग आगे आ सकें.

देवाशीष शील , ड्रग कंट्रोल विभाग के पूर्व अधिकारी व सरकारी कर्मचारी परिषद के संयोजक.

क्लब के सदस्यों से कराया जा रहा है रक्दान

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉक डाउन में लोग अपने घरों ने नहीं निकल रहे हैं. इस वजह से सभी ब्लड बैंकों में खून की कमी दिख रही है. खून की कमी कैसे दूर की जाये, इसके लिए लायंस क्लब के सदस्यों से ब्लड डोनेट करवाया जा रहा है. ब्लड क्लेक्शन के लिए मोबाइल वैन भी है. एक ही कॉलोनी या किसी हाउसिंग में सात-आठ लोग अगर ब्लड डोनेट कराना चाहते हैं, तो उक्त वैन को ऐसे लोगो के पास भेजा जा सकता है.

कैलाश खंडेलवाल, चैयरमैन, ब्लड बैंक, लायंस क्लब, कोलकाता.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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