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लातेहार के टाना भगतों को पशुधन योजना से गाय मिली, पर काफी कम कीमत पर दूध बेचने को हैं मजबूर, कैसे होगा विकास

Updated at : 08 Jul 2021 6:14 PM (IST)
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लातेहार के टाना भगतों को पशुधन योजना से गाय मिली, पर काफी कम कीमत पर दूध बेचने को हैं मजबूर, कैसे होगा विकास

Jharkhand News (लातेहार) : झारखंड सरकार टाना भगतों के आर्थिक विकास के लिए कई कल्याणकारी योजना शुरू की है. इन योजनाओं में एक टाना भगत पशुधन योजना शामिल है. इस योजना के तहत सभी टाना भगत परिवार को 4 दुधारू गाय दिया जाना है. लेकिन, दूध की सही कीमत नहीं मिलने से परेशान हैं.

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Jharkhand News (चंद्रप्रकाश सिंह, लातेहार) : झारखंड सरकार टाना भगतों के आर्थिक विकास के लिए कई कल्याणकारी योजना शुरू की है. इन योजनाओं में एक टाना भगत पशुधन योजना शामिल है. इस योजना के तहत सभी टाना भगत परिवार को 4 दुधारू गाय दिया जाना है. लेकिन, दूध की सही कीमत नहीं मिलने से परेशान हैं.

इस योजना के तहत सरकार ने टाना भगतों को गाय दिया और गाय से उत्पादित दूध को बेचने के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया. जिले में मेधा डेयरी दूध संग्रह करने का काम करती है. मेधा डेयरी टाना भगतों के द्वारा उत्पादित दूध का मूल्य मात्र 6 से 9 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से भुगतान करती है. ऐसे में टाना भगतो की आर्थिक उन्नति कैसे होगी. इस मंहगाई के दौर में 6 से 9 रुपये प्रति लीटर दूध बेचकर टाना भगत अपने को कितना आर्थिक उन्नति पर ले जा सकते हैं यह एक बड़ा प्रश्न है.

पिछले एक साल से सदर प्रखंड के कैमा गांव में मेधा डेयरी ने टाना भगतों के अलावा आस-पास के कई गांवों के पशुपालकों से दूध लेने के लिए दूध संग्रह केंद्र स्थापित किया है, जिसमें लगी मशीन के द्वारा ही दूध की गुणवत्ता की जांच के बाद दूध की कीमत तय होती है. शुरू में इस केंद्र से प्रतिदिन 300 लीटर दूध संग्रह होता था, लेकिन पशुपालकों को उनके दूध की सही कीमत नहीं मिलने लगी, जिससे कई पशु मालिक केंद्र में दूध नहीं देकर खुले बाजार में अपना दूध बेचने लगे हैं. वर्तमान समय में अब इस केंद्र में 70 से 75 लीटर दूध प्रतिदिन ही संग्रह हो पाता है.

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क्या कहते हैं टाना भगत

कैमा गांव के बहादुर टाना भगत कहते हैं कि एक लीटर पानी की कीमत 15 से 20 रुपया है. लेकिन, गाय में दिन भर मेहनत करने के बाद हमें दूध की कीमत 6 से 9 रुपये मिलती है. सरकार ने हमलोगों की आर्थिक विकास के लिए गाय दी है, लेकिन इस गाय से उत्पादित दूध का मूल्य पानी से भी कम है. गांव में लोग अब केंद्र में दूध कम दे रहे हैं क्योंकि उन्हें दूध की पूरी कीमत नहीं मिल पा रही है. मशीन काफी पुराना है जिससे दूध की जांच के बाद मूल्य निर्धारित होता है.

क्या कहते है डेयरी संचालक

लातेहार मेधा डेयरी संचालक विवेक ने इस संबंध में बताया कि मशीन से ही दूध की गुणवत्ता की जांच होती है. मशीन के माध्यम से ही दूध में घी और छेना की मात्रा के बाद ही दूध की कीमत तय होती है. उन्होंने कहा कि गाय के खान-पान पर भी दूध की गुणवत्ता निर्भर होती है. कैमा गांव में मशीन को चेक करने के लिए कहा गया है.

Posted By : Samir Ranjan.

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