शिक्षा मंथन 2023: CSJMU में शामिल हुए 425 शिक्षाविद, आनंदीबेन पटेल बोलीं- मेहनत करो और अपनी ताकत को पहचानों
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Jul 2023 8:01 PM
कानपुर विश्वविद्यालय (CSJMU) में शिक्षा मंथन 2023 कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए शिक्षा मंथन में आए सभी कुलपति और प्रोफेसरों का स्वागत किया.
Kanpur : छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय (CSJMU) में शनिवार को रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में शिक्षा मंथन 2023 कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए शिक्षा मंथन में आए सभी कुलपति और प्रोफेसरों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि जो काम हम करते हैं, उसमें थोड़ा बदलाव कर बहुत कुछ बदल सकते हैं. इससे बच्चों को बहुत से फायदे भी मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि बस हमें अपनी ताकत को पहचानने की जरूरत है. अगर हम मेहनत करें तो विश्वविद्यालय के स्वरूप को बदल सकते हैं. आज के बच्चे नया करना चाहते हैं. अगर हम उनके साथ लगे तो एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. विश्वविद्यालय सभी छात्रों को व्यस्त रखें.
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों को किसी ना किसी काम में जरूर व्यस्त रखें. बच्चे खाली रहेंगे तो किसी भी नई चीज के आने पर वह विरोध करेंगे, प्रदर्शन करेंगे. अगर वह अपने काम में बिजी रहेंगे तो कभी ऐसा नहीं होगा. हम सोचते हैं कि एक काम हो जाए उसके बाद दूसरा काम शुरू करेंगे, जो कि गलत है. हम एक साथ कई कामों को कर सकते हैं. हमको बस सोच बदलने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कॉलेज और विश्वविद्यालय में योगा करने की सोची गई थी, जो कि कार्यक्रम बहुत अच्छा रहा. बच्चों ने पानी के अंदर योगा करके दिखाया, जोकि लोगों की सोच से भी बहुत दूर था.हमें बच्चों को इतिहास से रूबरू कराना चाहिए.युवा योगा की तरफ बहुत उत्साहित है.उन्हें ऐसी जगह ले जाकर योग कराएं जहां पर वह योगा भी करें और वहां के इतिहास के बारे में भी जाने. एक साथ कई काम को हम ऐसे कर सकते हैं. योगा के कार्यक्रम में पूरे प्रदेश में 16 लाख युवाओं ने हिस्सा लिया है.
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जब NAAC की पहली बैठक हुई तो लोग बोलने में बहुत संकोच कर रहे थे, लेकिन जब NACC में ग्रेड आया तो दूसरी बैठक में लोगों के बोलने में बड़ा अंतर्गत दिखाई दे रहा था. विश्वविद्यालय में कोई छात्र छात्राएं छोटी-छोटी चीज को लेकर परेशान होते हैं तो इसका भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है.
अगर कोई छात्र परेशान है तो टेबल से उठकर उसकी समस्या का समाधान करें ताकि वह व्यक्ति बाहर निकलकर अपने विश्वविद्यालय की तारीफ करें. उस व्यकि से यह ना कहें कि यह मेरा काम नहीं है. उन्होंने कहा कि जो भी एमओयू विदेश से हुए हैं वह आम नहीं है. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हुई है.आने वाले समय में बहुत बड़ा काम होने वाला है.
उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को चिंतन बैठक करना चाहिए तभी सभी के बातें निकल कर सामने आएंगी, जब लोग अपने विचार रखेंगे तभी हम किसी चीज पर फैसला कर सकते हैं. हमें अपने विश्वविद्यालय को ऐसा बनाना है कि दूसरा विश्वविद्यालय देखने आए और जब देखने आए तो हमारा फर्ज है कि हम उनकी उंगली पकड़कर वैसे ही उनको भी चलना सिखाए, ताकि वह भी आगे पढ़कर काम कर सकें.
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