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ऑक्सीजन लेकर चलने वाले अणुव्रत मंडल के खौफ की हैं कई कहानियां, टीएमसी नेता पर हाथ डालने से पुलिस को भी लगता है डर

Updated at : 28 Apr 2021 3:13 PM (IST)
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ऑक्सीजन लेकर चलने वाले अणुव्रत मंडल के खौफ की हैं कई कहानियां, टीएमसी नेता पर हाथ डालने से पुलिस को भी लगता है डर

बंगाल चुनाव 2021 से पहले ‘खैला होबे..., भयंकर खैला होबे...’ की बात करने वाले बीरभूम जिला के तृणमूल कांग्रेस नेता अणुव्रत मंडल को लगातार तीसरी बार नजरबंद कर दिया गया. इस दबंग नेता को चुनाव से पहले नजरबंद करना पड़ता है, क्योंकि वह चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. अणुव्रत मंडल पर हाथ डालने से पुलिस भी खौफ खाती है.

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कोलकाता : बंगाल चुनाव 2021 से पहले ‘खैला होबे…, भयंकर खैला होबे…’ की बात करने वाले बीरभूम जिला के तृणमूल कांग्रेस नेता अणुव्रत मंडल को लगातार तीसरी बार नजरबंद कर दिया गया. इस दबंग नेता को चुनाव से पहले नजरबंद करना पड़ता है, क्योंकि वह चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. अणुव्रत मंडल पर हाथ डालने से पुलिस भी खौफ खाती है.

यह बात बंगाल के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने कलकत्ता हाइकोर्ट में कही थी. जी हां, कलकत्ता हाइकोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने पुलिस महानिदेशक जीएमपी रेड्डी से जब स्पष्टीकरण मांगा कि अणुव्रत मंडल को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो श्री रेड्डी ने कहा कि एसआइटी की टीम मंडल को गिरफ्तार करने से डरती है, क्योंकि उसे मुख्यमंत्री का वरदहस्त प्राप्त है.

अणुव्रत मंडल, जिन्हें केष्टो मंडल के नाम से भी जाना जाता है, बीरभूम जिला तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख हैं. वह डब्ल्यूबीएसआरडीए के चेयरमैन भी हैं. केष्टो मंडल के कई कारनामे हैं. बीरभूम जिला के वह कद्दावर नेता हैं और विवादास्पद बयान देने के लिए मशहूर हैं. 1960 के दशक में जन्मे अणुव्रत मंडल उर्फ केष्टो मंडल बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में एक हैं. हालांकि, बंगाल के सबसे विवादित नेता में एक हैं.

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हाइपॉक्सिया रोग की वजह से ऑक्सीजन साथ लेकर चलने वाले अणुव्रत मंडल के खौफ की कई कहानियां हैं. पुलिस भी उन पर हाथ डालने से डरती है. यह बात खुद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक जीएमपी रेड्डी ने कोर्ट में कही थी. तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही अणुव्रत मंडल विवादों में बने रहते हैं. उनकी दबंगई के कुछ किस्से इस प्रकार हैं:-

जुलाई, 2013 में जब बंगाल में पंचायत चुनाव चल रहे थे, अणुव्रत मंडल ने तृणमूल कार्यकर्ताओं से खुलेआम कहा था कि पुलिस पर बम फेंको और निर्दलीय उम्मीदवारों के घरों को जला डालो. केष्टो मंडल के इस बयान के एक सप्ताह बाद ही निर्दलीय उम्मीदवार सागर घोष की हत्या कर दी गयी और पारुई गांव स्थित उसके घर को जला दिया गया. सागर घोष के परिवार ने अणुव्रत मंडल पर इसके आरोप लगाये. विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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इस मामले में बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुलकर अणुव्रत मंडल का साथ दिया. ममता ने अणुव्रत को योग्य संगठनकर्ता करार दिया और कहा कि उनका बचाव किया जाये. इसके बाद सागर घोष की मौत की जांच के लिए बने ज्यूडिशियल पैनल ने पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया.

बर्दवान के कटवा में तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नवंबर, 2013 में कथित तौर पर अणुव्रत मंडल ने कहा था, ‘यदि कोई तृणमूल समर्थकों को धमकायेगा, तो हमारे कार्यकर्ता भी रात के अंधेरे में उसके घर पर हमला बोलेंगे.’ यह भी कहा जाता है कि अणुव्रत मंडल ने कांग्रेस के एक उम्मीदवार को धमकी दी थी कि उसका हाथ काट डालेंगे. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने अणुव्रत के ऐसे किसी बयान से इनकार कर दिया.

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Posted By : Mithilesh Jha

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