सरकारी प्रक्रिया में विलंब के कारण झारखंड में कम हुई धान खरीदारी

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Mar 2020 1:44 AM

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विधानसभा चुनाव के कारण धान खरीद प्रक्रिया में विलंब होने सहित भुगतान में भी विलंब से सरकार को धान बेचने के प्रति किसानों का रुझान कम हो रहा है.

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रांची : विधानसभा चुनाव के कारण धान खरीद प्रक्रिया में विलंब होने सहित भुगतान में भी विलंब से सरकार को धान बेचने के प्रति किसानों का रुझान कम हो रहा है. यह इससे साफ है कि जितने किसानों को धान अधिप्राप्ति के लिए टैग किया गया था, उनमें से 20 फीसदी किसानों ने ही 15 मार्च तक सरकार को अपना धान बेचा है.

धान अधिप्राप्ति करनेवाली नोडल एजेंसी राज्य खाद्य निगम ने धान बेचने वाले राज्य भर के करीब 1.34 लाख किसानों की सूची बनायी थी. इनमें से सिर्फ 27 हजार ने ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना धान दिया है. इसलिए धान खरीद के कुल लक्ष्य 30 लाख क्विंटल की जगह अब तक करीब 16 लाख क्विंटल धान की ही खरीद हो सकी है.

केंद्र सरकार 31 मार्च तक ही धान क्रय की अनुमति देती है. दरअसल किसानों को उनकी धान की कीमत विलंब से मिलना भी एक बड़ा कारण है, जिससे वह सरकारी धान क्रय केंद्र पर अपना धान बेचने के बजाय खुले बाजार में कम कीमत पर ही धान बेच देते हैं. इससे कम से कम उन्हें तत्काल नकद भुगतान हो जाता है. इस बार रांची व खूंटी सहित अन्य जिलों में धान बेचने वाले किसानों को दो-तीन माह बाद भी भुगतान न होने की खबर है.

लंबी भुगतान प्रक्रिया : सरकार की दो एजेंसिया धान खरीद रही है. राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) तथा भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ). इसमें तुलनात्मक रूप से एसएफसी से भुगतान की प्रक्रिया बहुत लंबी है. कुछ शर्त तो एेसी हैं, जिसमें सरकारी लापरवाही किसानों पर भारी पड़ती है. जैसे किसान को भुगतान की प्रक्रिया तब तक शुरू नहीं हो सकती, जब तक कि धान खरीद केंद्र से किसी मिलर या वेयर हाउस द्वारा धान स्वीकार नहीं कर लिया जाता.

देर से शुरू हुई धान खरीद प्रक्रिया भुगतान प्रक्रिया भी लंबी और जटिल

धान क्रय की स्थिति (15 मार्च तक)

खरीद एजेंसी दो

कुल धान क्रय केंद्र 328

धान कुटने वाले मिलर 58

चावल लेने वाले गोदाम 50

सूचीबद्ध कुल किसान 134946

धान बेचने वाले किसान 27158

धान खरीद का लक्ष्य 30 लाख क्विंटल

धान की हुई खरीद 16 लाख क्विंटल

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लेखक के बारे में

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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