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कोरोना को लेकर धनबाद के SNMMCH में किया गया मॉक ड्रिल, टॉर्च की रोशनी में हुआ संपन्न

Updated at : 28 Dec 2022 9:24 AM (IST)
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कोरोना को लेकर धनबाद के SNMMCH में किया गया मॉक ड्रिल, टॉर्च की रोशनी में हुआ संपन्न

धनबाद के SNMMCH स्थित कैथ लैब में मॉक ड्रिल शुरू करना था, पर पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां मॉक ड्रिल का अधिकांश समय टॉर्च की रोशनी में संपन्न हुआ. लगभग सात मिनट के मॉक ड्रिल के दौरान पांच मिनट तक कैथ लैब की बिजली गुल रही.

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Dhanbad News: कोरोना की आशंका को लेकर केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य के सभी सरकारी व निजी आक्सीजन प्लांटों व अस्पतालों में मॉक ड्रिल किया गया. इस क्रम में धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) स्थित कैथ लैब में मंगलवार की सुबह 10 बजे मॉक ड्रिल शुरू करना था, पर पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां मॉक ड्रिल का अधिकांश समय टॉर्च की रोशनी में संपन्न हुआ. कार्यक्रम भी दो घंटे विलंब से शुरू हुआ. कारण बताया गया कि कैथ लैब की सफाई का काम समय पर नहीं हुई. इस वजह से दो घंटे देरी से जैसे ही मॉक ड्रिल शुरू हुई कैथ लैब की लाइट चली गयी.

तत्काल जेनरेटर भी नहीं चलाया गया, इस वजह से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मियों को टॉर्च की रोशनी का सहारा लेना पड़ा. लगभग सात मिनट के मॉक ड्रिल के दौरान पांच मिनट तक कैथ लैब की बिजली गुल रही. जबकि, तीन दिन पहले से मॉक ड्रिल की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों व अन्य विभागों को दे दी गयी थी, पर तैयारियों को लेकर गंभीरता के अभाव में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई. मॉकड्रिल में सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा, एसएनएमएमसीएच के प्राचार्य डॉ ज्योति रंजन प्रसाद, अधीक्षक डॉ अरुण कुमार बरनवाल, कैथलैब कोविड सेंटर के नोडल पदाधिकारी डॉ यूके ओझा के अलावा पारा मेडिकल कर्मी, आयुष चिकित्सक, फ्रंटलाइन वर्कर्स, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका व अन्य मौजूद थे.

कैथलैब से जेनसेट का तार जोड़ना भूले कर्मी

कोविड की तीसरी लहर के बाद से कैथ लैब बंद है. केंद्र सरकार के निर्देश के आलोक में दो दिन पहले ही कैथ लैब को खोल साफ-सफाई शुरू करायी गयी है. बंद रहने के कारण कैथलैब से जुड़ा जेनसेट के कनेक्शन का तार खोल दिया गया था. इसे मॉकड्रिल से पहले जोड़ना था, पर लापरवाही ऐसी कि सब तार को जोड़ना भूल गये और अप्रिय स्थित उत्पन्न हुई.

मॉक ड्रिल में दिखी मुस्तैदी, कोविड मरीज के पहुंचते सक्रिय डॉक्टर

मॉक ड्रिल के दौरान कोविड मरीज के कैथलैब पहुंचते ही डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मुस्तैद हो गये. पहले से ही पीपीइ किट पहने डॉक्टर तत्काल बाहर निकले और एंबुलेंस में बैठे कोविड मरीज के पास पहुंच गये. डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों ने पहले मरीज के शरीर के तापमान का परीक्षण किया. फिर मरीज के शरीर व कपड़ों पर दवा व सेनिटाइजर का छिड़काव किया गया. फिर मरीज को कैथ लैब के अंदर बनाये गये कोविड डेडिकेटेड वार्ड ले जाया गया. वहां पर डॉक्टरों ने कोविड मरीज का दोबारा परीक्षण किया. मरीज को बेड उपलब्ध कराया गया और दवा देना शुरू कर दिया गया.

रेलवे अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट मिला खराब

मॉक ड्रिल में पता चला कि मंडल रेल अस्पताल का आक्सीजन प्लांट खराब मिला. दरअसल, मंडल रेल अस्पताल में पीएम केयर फंड से भेजा गया ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट इंस्टॉल होने के बाद कभी चालू नहीं किया गया. इस वजह से वह गड़बड़ हो गया. चालू नहीं होने पर जब जांचा गया तो पता चला कि उसका फिल्टर खराब है. इस वजह से यहां मॉक ड्रिल नहीं हो सका और ना ही इसका कोई फायदा मिलेगा कोविड होने पर. इस संबंध में सीएमएस डॉ डीएल चौरसिया ने कहा कि प्लांट के संचालन की जिम्मेवारी मैकेनिकल विभाग के पास है और उसे देखना है इसे. ज्ञात हो कि इस प्लांट को सात अक्तूबर 2021 को शुरू किया गया था. सांसद पीएन सिंह ने फीटा काट कर इसका उद्घाटन किया था.

500 लीटर प्रति मिनट की क्षमता

रेल अस्पताल में स्थापित पीएसए ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता प्रति मिनट 500 लीटर है. इससे 24 घंटे में 7 लाख 20 हजार लीटर ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकती है.

टीम पहुंची तो पता चला खराब है प्लांट

मंगलवार को वहां पहुंची टीम में शामिल सिविल सर्जन व अन्य ने अस्पताल का जायजा लिया. कहा कि जरूरत पड़ने पर कोविड मरीजों के लिए 20 बेड का आइसीयू व जनरल वार्ड में 30 बेड तैयार रखें. प्लांट की खराबी को दूर कराने की बात कह टीम वहां से लौट गयी.

सदर, रेलवे सहित निजी अस्पतालों में भी हुआ मॉक ड्रिल

एसएनएमएमसीएच के अलावा कोर्ट रोड स्थित सदर अस्पताल, रेलवे डिवीजनल हॉस्पिटल सहित गोविंदपुर स्थित हिलमैक अस्पताल में भी मॉक ड्रिल किया गया. उपायुक्त संदीप सिंह के निर्देश पर सभी जगहों पर आयोजन हुआ. इस क्रम में कोविड-19 प्रबंधन पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता, के अलावा एंबुलेंस की उपलब्धता और परीक्षण क्षमता, आवश्यक दवा, वेंटिलेटर और मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता की जांच की गयी.

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