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झारखंड : ग्रामीणों के स्वरोजगार का जरिया बना महुआ का फूल, खरसावां-कुचाई क्षेत्र में लाखों का हो रहा कारोबार

Updated at : 25 Apr 2023 7:15 PM (IST)
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झारखंड : ग्रामीणों के स्वरोजगार का जरिया बना महुआ का फूल, खरसावां-कुचाई क्षेत्र में लाखों का हो रहा कारोबार

खरसावां-कुचाई क्षेत्र में महुआ का फूल बेचकर ग्रामीणों की अच्छी आमदनी हो रही है. महुआ इन ग्रामीणों का स्वराेजगार का माध्यम बन गया है. ग्रामीण इलाकों में महुआ फूल की बहार आ गयी है. वहीं, इससे लाखों का कारोबार हो रहा है.

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सरायकेला-खरसावां, शचिंद्र कुमार दाश : महुआ फूल सरायकेला-खरसावां के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के स्वरोजगार का जरिया बन गया है. हर रोज गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्गों को महुआ के फूल चुनने के लिए जंगलों में जाते देखा जा सकता है. ग्रामीण बताते हैं कि पिछले एक माह से महुआ के फूल चुनने का कार्य चल रहा है. अब महुआ के फूल समाप्त होने के कगार पर है. ग्रामीण इलाकों में महुआ फूल की बहार आ गयी है. ग्रामीण इलाके में इन दिनों महुआ के वृक्षों से महुआ के फूल खूब झड़ रहे हैं. ग्रामीण भोजन-पानी लेकर जंगल में फूल चुनने जा रहे हैं. घर की अन्य महिलाएं घर के आंगन में महुआ फूल सुखाने में जुटी हुई है. महुआ के जरीये हर साल खरसावां-कुचाई क्षेत्र में लाखों का कारोबार होता है. इसे गांव के लोग अपना अतिरिक्त रोजगार मानते हैं.

ग्रामीणों से 27 रुपये किलो की दर से महुआ की खरीदारी कर रहे हैं छोटे व्यापारी

महुआ के फूलों से ग्रामीणों की अच्छी-खासी आमदनी हो रही है. ग्रामीण अच्छे क्वालिटी के महुआ के फूलों को सुखा कर छोटे व्यापारियों को 27-28 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं जबकि लो क्वालिटी के महुआ 10 से 12 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है. महुआ चुनने वाला प्रत्येक परिवार रोजाना 20 किलो से 40 किलो तक महुआ चुन लेता है. बाहर के व्यापारी ग्रामीणों से महुआ खरीद कर बाहर भेजते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि पिछले साल के पुराने महुआ के दाम एवं मांग अधिक है. कई ग्रामीण ऐसे हैं जो इस सीजन में चुने गए महुआ के फूलों को सुखा कर अपने घरों में रख देते हैं और कुछ माह बाद कीमत बढ़ जाने के बाद उसे बेचते हैं. इससे उन्हें अधिक आमदानी होती है.

चक्रधरपुर के बड़े व्यापारी को बेचते हैं क्षेत्र के छोटे व्यापारी

खरसावां, कुचाई समेत आसपास के हाट-बाजारों में स्थानीय व्यापारी ग्रामीणों से महुआ के फूलों की खरीदारी कर चक्रधरपुर के व्यापारी को बेचते हैं. इसके बाद चक्रधरपुर के बड़े व्यापारी महुआ को बिक्री के लिए देश के अन्य प्रदेशों में भेजते हैं.

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महुआ से तैयार होते हैं कई स्वादिष्ट उत्पादन

महुआ के फूलों से महुआ से स्वादिष्ट उत्पादन महुआ शरबत, आरटीएस जूस, चटनी, चिक्की, लड्डू और सूखा महुआ बनाये जाते हैं. महुआ में प्रोटीन, फाइबर कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम से भरपूर मात्रा में पाया जाता है. खास कर महानगरों में महुआ के मिठाई की काफी मांग रहती है. कई प्रदेशों में तो महुआ का उपयोग पशु चारा के रूप में भी किया जाता है.

अब तक चालू नहीं हो सका कुचाई का महुआ प्रोसेसिंग प्लांट

कुचाई के बड़ा सेगोई में करीब चार वर्ष पूर्व मिनी महुआ प्रोसेसिंग यूनिट बनकर तैयार है. यहां महुआ की प्रोसेसिंग के लिए आवश्यक सभी उपकरण भी लगा दिये गये है, लेकिन अब तक इसे चालू नहीं किया जा सका है. महुआ प्रोसेसिंग यूनिट के लिए गांव की कुछ महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया गया है. सेगोई में महुआ की प्रोसेसिंग कर आचार, चटनी, मिठाई, महुआ चिक्की, महुआ किसिस, महुआ जैम समेत अन्य कई स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने की योजना थी. लेकिन, यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी. उक्त प्रोसेसिंग यूनिट को चालू करने की स्थिति में गांव की महिलाओं को रोजगार मिल पाता.

महुआ का पेड़ लगा कर बढ़ाया जा सकता है ग्रामीणों की आमदानी

ग्रामीणों के लिए महुआ एक प्रमुख वनोत्पाद है. वनोत्पाद के जरीये लोगों को स्वरोजगार हो रहा है. बताया जाता है कि हाल के वर्षों में महुआ पेड़ों की संख्या में कमी आयी है. कहा जाता है कि पहले सरायकेला-खरसावां जिला के लगभग सभी प्रखंडों में महुआ के पेड़ों की संख्या अच्छी थी. लेकिन, अब जंगलों का ह्रास होने के साथ ही महुआ के पेड़ों की संख्या में भी कमी आयी है. सरकारी व निजी स्तर पर महुआ के पेड़ लगा कर ग्रामीणों का आमदानी बढ़ाया जा सकता है.

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