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माॅब लिंचिंग मामले में 4 आरोपियों को उम्र कैद की सजा, गोड्डा में दो लोगों की पीट-पीटकर हुई थी हत्या

Updated at : 02 Feb 2022 10:23 PM (IST)
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गोड्डा सिविल कोर्ट

गोड्डा सिविल कोर्ट

jharkhand news: गोड्डा में मॉब लिंचिंग मामले में कोर्ट ने 4 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनायी. साथ ही जुर्माना भी लगाया. 13 जून, 2018 काे भीड़ ने भैंसा चोरी के आरोप में चिराउद्दीन अंसारी उर्फ चनकू और मुर्तजा अंसारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

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Jharkhand news: गोड्डा के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने चार हत्या आरोपितों को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी है. इन चारों ने भीड़ के साथ मिलकर 13 जून, 2018 को चिराउद्दीन अंसारी उर्फ चनकु एवं मुर्तजा अंसारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. कोर्ट ने चार आरोपितों को उम्र कैद की सजा सुनायी है.

इन आरोपितों को मिली सजा

सजा पाने वालों में ग्राम ढुल्लू निवासी मुंशी मुर्मू, पिपरजोरियो निवासी किशन राय, बनकट्टी निवासी कालेश्वर सोरेन व जोहन किस्कू हैं. इस संबंध में मृतक चिराउद्दीन अंसारी उर्फ चनकु के पुत्र इमरान अंसारी ने अपने पिता एवं मुर्तजा अंसारी की हत्या को लेकर देवदांड़ थाना में सभी चारों सजावार आरोपित सहित 100 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

भैंसा चोरी के मामले में लोगों की भीड़ ने दो लोगों की हत्या की

देवदांड़ थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, इमरान अंसारी को सूचना मिली थी कि दो आदमी को भैंसा के साथ ग्राम बनकट्टी में पकड़ कर रखा गया है तथा उनके साथ मारपीट की जा रही है. अपने गांव तालझारी के अन्य ग्रामीणों के साथ जब वह घटनास्थल पर पहुंचे, तो दोनों आरोपितों को मार खाते देखा. दोनों की पहचान पिता चिराउद्दीन एवं बांझी गांव के मुर्तजा अंसारी के रूप में की. जब इमरान ने इन लोगों को मारने से मना किया, तो भीड़ ने मारने के लिए इन लोगों को खदेड़ा. 100 अज्ञात भीड़ एवं चारों सजावार आरोपियों ने मिलकर साइकिल से बांध कर दोनों को बनकट्टी से ढुल्लू ले गये. वहां भी दोनों को पीटा गया. जिससे दोनों की मौत हो गयी. दोनों मृतक पर भैंसा चोरी करने का आरोप था.

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पुलिस अनुसंधान में मामला सत्य पाया गया

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस अनुसंधान के क्रम में चारों आरोपितों के खिलाफ मामले को सत्य पाया एवं अनुसंधानकर्ता द्वारा 31 अगस्त, 2018 को आरोप पत्र समर्पित किया गया. न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के बाद मामला सत्र वाद 23/2019 में तब्दील हुआ. सत्र न्यायालय में 28 फरवरी, 2019 को फैसला सुनाया था. आरोपियों ने इससे इंकार करते हुए वाद विचारण का दावा किया था.

10 गवाहों की हुई गवाही

अभियोजन पक्ष द्वारा 10 गवाहों की गवाही दिलायी गयी. जिसका बचाव पक्ष ने प्रति परीक्षण किया. अभिलेख में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपितों को दोषी पाकर सजा सुनायी. न्यायालय ने चारों आरोपितों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. इसके अतिरिक्त न्यायालय द्वारा जुर्माना भी लगाया गया. जुर्माना नहीं भरने पर आरोपितों को अतिरिक्त सजा काटने का भी निर्णय न्यायालय ने दिया है. सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के आदेश के साथ निर्णय की मुफ्त प्रति चारों दोषियों को दे दी गयी है.

Posted By: Samir Ranjan.

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