इस शहर में दुर्गा पूजा की मूर्तियां जीवंत रूप देते हैं कलाकार, इसलिए फेमस है Kolkata की Kumartoli
Published by : Shaurya Punj Updated At : 11 Oct 2023 6:06 PM
Kumartoli of Kolkata is Hub of making Durga Puja Idols: कोलकाता में कुम्हारटोली इलाके में दुर्गा जी की मूर्ति बनाई जाती है. उत्तरी कोलकाता का यह अनोखा इलाका वह स्थान है जहाँ कुशल कारीगर और मूर्तिकार देवी दुर्गा की भव्य मूर्तियों में जान डाल देते हैं.
Kumartoli of Kolkata is Hub of making Durga Puja Idols: जैसे जैसे दुर्गा पूजा का दिन नजदीक आ रहा है, इस त्योहार को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ते देखा जा रहा है. इस पर्व को पश्चिम बंगाल में भव्य तरीके से मनाया जाता है. इसके अलावा बिहार, झारखंड में पश्चिम बंगाल की तरह की दुर्गा मां की मूर्तियों को पंडाल में नवरात्रि के मौके पर रखकर पूजा की जाती है. आपको बता दें कोलकाता में कुम्हारटोली इलाके में दुर्गा जी की मूर्ति बनाई जाती है. उत्तरी कोलकाता का यह अनोखा इलाका वह स्थान है जहाँ कुशल कारीगर और मूर्तिकार देवी दुर्गा की भव्य मूर्तियों में जान डाल देते हैं. यह स्थान इसे रचनात्मकता और शिल्प कौशल का केंद्र बनाता है जो हर साल शहर के दिल और आत्मा को लुभाता है.
#Kumartuli is the traditional potters quarter which is over 300 years old.
In the lead up to DurgaPuja,thousands of artisans toil diligently to create some of the most stunning creations#experiencebengal #travelbengal #tourismbengal #bengalbeckons #stayinbengal #beautifulbengal pic.twitter.com/6RxcwLY0he— West Bengal Tourism (@TourismBengal) May 30, 2019
दुर्गा पूजा की तैयारी यहां आमतौर पर कई महीने पहले ही शुरू हो जाती हैं
कुम्हारटोली, जिसका बंगाली में अनुवाद कुम्हार का क्वार्टर होता है, एक ऐतिहासिक क्षेत्र है जहां कारीगरों की पीढ़ियां सदियों से अपनी कला का अभ्यास कर रही हैं. हालांकि, यह दुर्गा पूजा के दौरान है कि कुम्हारटोली वास्तव में एक आकर्षक कलाकारों के स्वर्ग में बदल जाती है. इस भव्य उत्सव की तैयारियां आमतौर पर कई महीने पहले ही शुरू हो जाती हैं और यह स्थान इस विस्तृत प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
Also Read: Navaratri 2023 में दुर्गासप्त्शी के पाठ के सिद्धिकुंजिका स्त्रोत करने से होगा शत्रु का नाश
दुर्गा पूजा के दौरान कुम्हारटोली को जो चीज अलग करती है, वह सिर्फ मूर्ति बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके चारों ओर का पूरा माहौल है. इस पड़ोस की संकरी गलियाँ कार्यशालाओं से सुसज्जित हैं, जहाँ कलाकारों को मूर्तियाँ बनाते, पेंटिंग करते और सजाते देखा जा सकता है. इस रचनात्मक उन्माद को करीब से देखने के लिए आगंतुकों का स्वागत है. हवा अगरबत्तियों की भीनी-भीनी खुशबू से भर जाती है. और काम पर कारीगरों की लयबद्ध ध्वनियाँ शिल्प कौशल की एक मंत्रमुग्ध कर देने वाली सिम्फनी पैदा करती हैं.
At #kumartoli #Kolkata #DurgaaPujo2015 @MadeInBengal @TourismBengal @welovecalcutta @CalcuttaWalks @TweetKolkata pic.twitter.com/kPybXzPFJ5
— Dipa Rudra Ghose (@DipaRudraGhose) October 7, 2015
कलात्मकता और शिल्प कौशल से परे, दुर्गा पूजा के दौरान कुम्हारटोली के परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव भी है. यह त्यौहार पूरे भारत और विदेशों से पर्यटकों और भक्तों की भारी आमद को आकर्षित करता है. आगंतुकों में यह वृद्धि स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है.
मूर्तियों को तैयार करने की यात्रा कच्चे माल के चयन से शुरू होती है
इन दिव्य मूर्तियों को तैयार करने की यात्रा कच्चे माल के चयन से शुरू होती है. कुम्हारटोली के कलाकारों ने देवी और उनके दल को आकार देने के लिए अन्य सामग्रियों के अलावा मिट्टी, पुआल और बांस को सावधानीपूर्वक चुना. मूर्ति बनाने की प्रक्रिया जटिल है, जहां हर विवरण मायने रखता है. कारीगर गहरी भक्ति और कौशल के साथ हाथ से मूर्तियाँ बनाते हैं. यह परंपरा अक्सर पीढ़ियों से चली आ रही है, कारीगरों के परिवार सदियों से इस विरासत को जारी रखे हुए हैं.
कलात्मक उत्साह, जीवंत वातावरण कुम्हारटोली को देखने योग्य स्थान बनाते हैं
अक्सर प्रभावशाली ऊंचाइयों तक पहुंचने वाली दुर्गा की मूर्तियां हर साल अद्वितीय और रचनात्मक रूप धारण कर लेती हैं. प्रत्येक कलाकार देवी के लिए अपनी व्याख्या और शैली लाता है, जिसके परिणामस्वरूप डिजाइनों की एक विविध श्रृंखला तैयार होती है जो परंपरा और नवीनता दोनों को दर्शाती है. कलाकार अपनी रचनाओं में अपना दिल और आत्मा डालते हैं, और मूर्तियाँ जीवंत रंगों, जटिल आभूषणों और अभिव्यंजक चेहरों के साथ जीवंत हो उठती हैं जो दिव्यता और अनुग्रह को दर्शाते हैं. कलात्मक उत्साह, विचारों का आदान-प्रदान और जीवंत वातावरण कुम्हारटोली को इस भव्य उत्सव के दौरान एक अवश्य देखने योग्य स्थान बनाते हैं.
दूसरे देश में भी जाती है प्रतिमाएं
दुर्गा पूजा के दौरान मूर्तिकारों की व्यस्तता काफी बढ़ जाती है. शहर या आसपास के इलाकों में स्थित पंडालों में जाने वाली प्रतिमाओं का काम तो महालय तक चलता है, लेकिन दूसरे शहर के लिए महालय से काफी पहले और दूसरे देश में जाने वाली प्रतिमाओं को पितृ पक्ष के मध्य तक रवाना कर दिया जाता है.
मिट्टी के अलावा फाइबर, थर्मोकोल और सोला से बनती है यहां मूर्तियां
मिट्टी के अलावा फाइबर, थर्मोकोल और सोला से बनी यहां की प्रतिमाओं की ख्याति व मूर्तिकारों के हुनर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां बनी मूर्तियां हर साल दुनिया के कई देशों (अमेरिका, जापान, चीन, बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, युगांडा, स्विट्जरलैंड भेजी जाती रही हैं.
दुर्गा प्रतिमा हर साल नेपाल और बांग्लादेश जा रही हैं
चायना पाल एक महिला मूर्तिकार का नाम है, जिसे एक चाल (एक साथ दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिक) की मूर्ति बनाने में महारत हासिल है. चायना की बनाई दुर्गा प्रतिमा हर साल नेपाल और बांग्लादेश जा रही हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










