ePaper

यदि यह लापरवाही है, तो चुकाना पड़ सकता है खामियाजा, रेड जोन से हजारीबाग आये प्रवासियों को घर भेजने का मामला

Updated at : 25 May 2020 9:01 AM (IST)
विज्ञापन
यदि यह लापरवाही है, तो चुकाना पड़ सकता है खामियाजा, रेड जोन से हजारीबाग आये प्रवासियों को घर भेजने का मामला

झारखंड के हजारीबाग जिला में एक बीडीओ को फैसले ने लोगों की समस्या बढ़ा दी है. इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है. दरअसल, जिला के दारू प्रकंड में एक कोरेंटिन सेंटर में रह रहे 27 प्रवासी मजदूरों ने जब भोजन की मांग की, तो बीडीओ ने प्रवासी मजदूरों को कोरेंटिन सेंटर से निकाल घर भेज दिया. कोरेंटिन सेंटर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया.

विज्ञापन

दारू (हजारीबाग) : झारखंड के हजारीबाग जिला में एक बीडीओ को फैसले ने लोगों की समस्या बढ़ा दी है. इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है. दरअसल, जिला के दारू प्रकंड में एक कोरेंटिन सेंटर में रह रहे 27 प्रवासी मजदूरों ने जब भोजन की मांग की, तो बीडीओ ने प्रवासी मजदूरों को कोरेंटिन सेंटर से निकाल घर भेज दिया. कोरेंटिन सेंटर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया.

Also Read: दलित के हाथों बना खाना खाने से किया इनकार

मामला दारू प्रखंड के इरगा पंचायत के राजकीय मध्य विद्यालय बड़वार की है. रविवार को सभी प्रवासियों ने भोजन व सुविधा नहीं मिलने को लेकर सवाल खड़े किये थे और एक वीडियो वायरल कर दिया. इसके बाद दारू बीडीओ रामरतन कुमार वर्णवाल, मुखिया त्रिलोकी यादव व दारू थाना की पुलिस कोरेंटिन सेंटर पहुंची. सभी प्रवासियों को अपने-अपने घर जाने के लिए कह दिया.

बीडीओ के इस आदेश के बाद मजदूर अपने परिवार व समाज को सुरक्षित रखने के लिए 14 दिनों तक कोरेंटिन सेंटर में रखने के लिए अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाने लगे. लेकिन, किसी ने उनकी एक न सुनी. इस केंद्र में 27 प्रवासी मजदूर थे, जो रेड जोन इलाका मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और चेन्नई समेत कई राज्यों से आये हुये थे. ये सभी लोग सेंटर में 12 मई से रह रहे थे.

Also Read: हजारीबाग का बरही बन चुका है प्रवासी मजदूरों का जंक्शन, बिहार व झारखंड के श्रमिकों को ट्रक से भी भेजती है पुलिस

इनमें कुछ प्रवासी मजदूर तीन या छह दिन पहले आये थे. छह दिनों तक प्रवासियों ने अपने घरों से खाना मंगवाकर खाया. बाद में भोजन मिलने की सूचना पर प्रवासी भोजन की मांग करने लगे. इसलिए उन्होंने भोजन की मांग की. इससे नाराज होकर बीडीओ ने सभी को घर भेज दिया.

इधर, प्रवासी मजदूरों में भय है कि यदि उनमें से कोई भी संक्रमित हुआ, तो उनके परिवार या समाज के लोग भी खतरे में आ सकते हैं. प्रवासी कृष्णा राणा, सन्नी राणा, हरि राणा, दामोदर प्रसाद, बचन प्रसाद, विनोद साव, राजू मिर्धा, दीपक प्रसाद , राजू राणा, संदीप राणा सहित कई लोग इनमें शामिल हैं. कोरोना वैश्विक महामारी को लेकर प्रवासी व उनके परिवार काफी चिंतित हैं.

Also Read: घर लौट रहे झारखंड-बिहार के मजबूर प्रवासी श्रमिकों की रोंगटे खड़ी कर देने वाली कहानियां
मुखिया बोले : खाना बनाने वाला नहीं मिला

मुखिया त्रिलोकी यादव ने कहा कि सेंटर में खाना बनाने वाला नहीं मिला. इस कारण प्रवासियों को खाना नहीं दिया गया. बीडीओ के आदेश पर सभी को स्क्रीनिंग के बाद घर भेज दिया गया.

यह कोरेंटिन सेंटर नहीं : बीडीओ

दारू के बीडीओ रामरतन वर्णवाल ने बताया कि यह कोरेंटिन सेंटर नहीं है. यहां लोग खुद से पहुंच गये थे और रह रहे थे. इसलिए लोगों को अपने घर जाने के लिए कहा गया.

होम कोरेंटिन के लिए भेजा गया : उपायुक्त

हजारीबाग के उपायुक्त डॉ भुवनेश प्रताप सिंह ने बताया कि जिला में प्रवासी मजदूरों की संख्या बढ़ रही है. जिस कोरेंटिन सेंटर में सात दिन तक प्रवासी मजदूरों में कोरोना से संबंधित कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं, उन्हें घर में कोरेंटिन करने का आदेश दिया गया है.

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola