हरिशंकर तिवारी की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़, 22 वर्षों तक हाता के कब्जे में रही चिल्लूपार विधानसभा सीट

हरिशंकर तिवारी का मंगलवार शाम निधन हो गया. वह 88 वर्ष के थे और कुछ दिनों से लगातार बीमार चल रहे थे. उनकी मौत के बाद पूर्वांचल में उनसे जुड़े तमाम किस्से और राजनीतिक घटनाक्रम को लोग याद कर रहे हैं. बुधवार को उनकी अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए हैं.
Gorakhpur: अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस के संस्थापक और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पंडित हरिशंकर तिवारी की शव यात्रा बुधवार को उनके धर्मशाला स्थित तिवारी हाता से निकली. इस दौरान भारी संख्या में सर्मथकों का हुजूम उमड़ा. इस वजह से जहां से यात्रा गुजर रही है, वह यातायात जाम की स्थिति हो गई है. शव यात्रा हाता से निकल कर नौसढ़, बाघागाड़ा, महावीर छपरा, डवरपार, बेलीपार, कसिहार, कौड़ीराम, भलुवान, गगहा, मझगांवा, हाटा, साउंखोर होते हुए उनके पैतृक गांव टांड़ा बड़हलगंज पहुंचेगी, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा.
हरिशंकर तिवारी का मंगलवार शाम निधन हो गया. वह 88 वर्ष के थे और कुछ दिनों से लगातार बीमार चल रहे थे. उनकी मौत के बाद पूर्वांचल में उनसे जुड़े तमाम किस्से और राजनीतिक घटनाक्रम को लोग याद कर रहे हैं.
गोरखपुर के दक्षिणांचल स्थित बड़हलगंज के टांडा गांव में जन्मे पंडित हरिशंकर तिवारी चिल्लूपार विधानसभा सीट से 1985 में पहली बार विधायक चुने गए. इस चुनाव को पंडित हरिशंकर तिवारी ने जेल में रहकर लड़ा था और विजयी हुए. वह लगातार सन 1985 से 2007 तक लगातार वह चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे. पंडित हरिशंकर तिवारी चिल्लू कार्ड विधानसभा सीट से लगातार 6 बार विधायक चुने गए.
गोरखपुर विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से प्रदेश की राजनीति में पदार्पण करने वाले हरिशंकर तिवारी ने सन 1997 में जगदंबिका पाल, राजीव शुक्ला, श्याम सुंदर शर्मा और बच्चा पाठक के साथ अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस की स्थापना की. 1985 में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र अचानक चर्चा में आ गया. क्योंकि पंडित हरिशंकर तिवारी निर्दल प्रत्याशी के तौर पर जेल की सलाखों के पीछे से चुनाव लड़ रहे थे. और पूरे इलाके में एक पोस्टर चिपक गया था जिसमें हरिशंकर तिवारी सलाखों के पीछे हाथ जोड़कर खड़े थे.
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1985 के इस चुनाव में ऐसी लहर चली की हरिशंकर तिवारी ने कांग्रेस प्रत्याशी मार्कंडेय चंद को 21 हजार से अधिक वोटों की अंतराल से शिकस्त दे दी थी. जब हरिशंकर तिवारी जेल से छूट कर अपने क्षेत्र पहुंचे तो उनके पोस्टर और काफिले की चर्चा पूरे प्रदेश में हुई. और उन्होंने उस समय चिल्लूपार विधानसभा सीट पर जो कब्जा बनाया वह लगातार 22 वर्षों तक कायम रहा. 22 वर्ष में प्रदेश में लहर किसी की भी हो लेकिन चिल्लूपार में नाम सिर्फ हरिशंकर तिवारी का चला.
पंडित हरिशंकर तिवारी 1997 से 1999 तक कल्याण सिंह की सरकार में तो 2003 से 2007 तक मुलायम सरकार में मंत्री रहे. 2000 में राम प्रकाश गुप्ता ,2001 और 2002 में राजनाथ सिंह और मायावती सरकार में भी वह मंत्री रहे हैं.
रिपोर्ट– कुमार प्रदीप,गोरखपुर
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