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Exclusive : सरकारी कागज पर तैर रहीं 50 लाख की नावें, स्थल पर जाने के लिए सही रास्ता व अन्य सुविधाएं नहीं

Updated at : 31 Oct 2023 12:06 PM (IST)
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Exclusive : सरकारी कागज पर तैर रहीं 50 लाख की नावें, स्थल पर जाने के लिए सही रास्ता व अन्य सुविधाएं नहीं

प्रभात खबर ने जिला पर्यटन पदाधिकारी कैलाश राम से बातचीत की तो उन्होंने दावा कि चिन्हित स्थल पर वाटर स्पोटर्स चल रहा है. इसकी शुरुआत कई माह पहले करा दी गई है़ तब से यह लगातार संचालित हो रहा है, लेकिन जब प्रभात खबर ने जमीनी हकीकत देखी तो तस्वीर इससे काफी अलग दिखी.

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  • कोडरमा के उरवां में वाटर स्पोटर्स को लेकर खरीदे गए सामान पड़े हैं बेकार

विकास, कोडरमा : जिले के प्रसिद्व तिलैया डैम को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से यहां वाटर स्पोटर्स की शुरुआत करने के लिए करीब 50 लाख रुपये की राशि से पांच बोट सहित अन्य सामान खरीद तो लिए गए हैं. पर आज ये पूरी तरह बेकार पड़े हैं. पर्यटन विभाग की नजर में ये बोट तिलैया डैम उरवां के पास स्थित झील रेस्टोरेंट के पीछे चल रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है़. हाल यह है कि लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए बोट इस जगह पर तो हैं, पर बंद वाली स्थिति में आप यूं समझ सकते हैं कि लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए बोट एक तरह से सरकारी कागज पर ही तैर रहीं हैं. हाल यह है कि वाटर स्पोटर्स को लेकर चिन्हित जगह पर जाने के लिए न सही रास्ता है और न ही अन्य सुविधाएं बहाल हो सकी हैं.

ऐसे में पर्यटक यहां तक पहुंचेंगे कैसे यह अपने आप में बड़ा सवाल है़ प्रशासनिक उदासीनता व सुविधाएं नहीं होने की वजह से किसी को यह तक पता नहीं है कि यहां पर वाटर स्पोटर्स की शुरुआत कुछ माह पूर्व हो गई है़. हालांकि, खराब व्यवस्था के आगे यह शुरुआत धरी रह गई ओर कुछ ही दिनों बाद से खरीदे गए बोट व अन्य सामान यूं ही उरवां में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास डैम वाले हिस्से में पड़ा है़. जानकारी के अनुसार तत्कालीन डीसी आदित्य रंजन की पहल पर अगस्त 2022 में उरवां के पास तीन दिवसीय नि:शुल्क एडवेंचर स्पोटर्स का आयोजन किया गया था. इस आयोजन को मिले अच्छे रिस्पांस के बाद जिला प्रशासन ने पर्यटन विकास मद की 58 लाख रुपये की राशि से वाटर स्पोटर्स की सुविधा बहाल करने का निर्णय लिया पहले फेज में इसके लिए जनवरी 2023 में करीब 50 लाख रुपये से तीन स्पीड बोट, दो कयाक बोट व अन्य सामान की खरीदारी टेंडर के जरिए की गई़ करार के तहत नेशनल एडवेंचर फाउंडेशन ने सामान की डिलीवरी उरवां के पास स्थित स्थल पर कर दी.

इसके बाद कुछ माह तक सामान यूं ही पड़ा रहा. पेंच स्थानीय समिति को काम देने में फंसा तो वाटर स्पोटर्स समिति उरवां का गठन कर दस युवाओं को ट्रेनिंग दिला सुविधा की शुरुआत करने का प्रयास हुआ. पर्यटन विभाग के अनुसार जून 2023 में स्थानीय समिति के द्वारा सालाना निर्धारित तीन लाख रुपये की राशि में से डेढ़ लाख रुपये जमा किए जाने के बाद वाटर स्पोटर्स शुरू करा दिया गया. शेष डेढ़ लाख की राशि दिसंबर में समिति को जमा करना है. इससे इतर प्रभात खबर टीम ने जब वाटर स्पोटर्स को लेकर चिन्हित स्थल का जायजा लिया तो यहां पूरी तरह सन्नाटा दिखा़ इस जगह पर पहुंचने के लिए न सही रास्ता है और न ही अन्स सुविधाएं यहां बहाल है. यहां तक की कोई यह नहीं समझ सकता है कि यहां वाटर स्पोटर्स चल भी रहा है. प्रभात खबर ने संपर्क कर समिति के मुख्य सदस्य कुलदीप कुमार को लेकर जानकारी ली तो पता चला कि जून 2023 में स्पोटर्स की शुरुआत तो की गई, लेकिन करीब एक-डेढ़ माह बाद से यह बंद पड़ा है.

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पर्यटन पदाधिकारी का दावा, चल रहा है वाटर स्पोटर्स

प्रभात खबर ने जिला पर्यटन पदाधिकारी कैलाश राम से बातचीत की तो उन्होंने दावा कि चिन्हित स्थल पर वाटर स्पोटर्स चल रहा है. इसकी शुरुआत कई माह पहले करा दी गई है़ तब से यह लगातार संचालित हो रहा है, लेकिन जब प्रभात खबर ने जमीनी हकीकत देखी तो तस्वीर इससे काफी अलग दिखी.

न रास्ता ठीक किया, न सुविधाएं दी हमलोग क्या करें

वाटर स्पोटर्स समिति उरवां के मुख्य सदस्य कुलदीप कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से हम लोगों को वाटर स्पोटर्स संचालन को लेकर काम तो दिया गया है, पर शुरुआत में जो वादे किए गए थे उसका पालन आज तक नहीं हुआ है. चिन्हिल स्थल तक आने के लिए रास्ता तक ठीक नहीं हो पाया है. झाड़ियों के बीच से होकर इस जगह तक पहुंचा जा सकता है. प्रशासन ने यहां टिकट काउंटर, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं बहाल करने के साथ ही प्रचार-प्रसार को लेकर मदद करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ़ आज हाल यह है कि हम लोगों ने मिलकर जो डेढ़ लाख की राशि जमा की है वह भी डूबने के कगार पर है. आगे का पैसा कैसे जमा करें समझ नहीं आ रहा़ प्रशासन हम गोताखोरों से किसी के कहीं डूबने पर मदद के लिए भेजता है, पर उसका भी मेहनताना नहीं मिलता. डोमचांच में सोनाली हत्याकांड के बाद शव को निकालने के लिए 40 हजार रुपये में बात हुई थी, आज तक एक पैसा भी नहीं मिला.

प्रशासन पहल करे तो सुधर सकती है स्थिति

वाटर स्पोटर्स समिति उरवां के सदस्य विकास कुमार ने बताया कि शुरुआत में कुछ दिन बोट का संचालन हुआ. इससे करीब 35-40 हजार रुपये आया जो जमात में ही पड़ा हुआ है. प्रशासन यहां सुविधाएं बहाल करा दे तो हमारे लिए अच्छा होता. हम युवाओं ने ट्रेनिग ली, लेकिन विशेष फायदा होता नहीं दिख रहा है. हम तो चाहते हैं कि ज्यादा संख्या में लोग पहुंचेंगे तो हमारी आमदनी बढ़ेगी, लेकिन जब तक सुविधाएं नहीं होंगी यहां आएगा कौन हम लोगों ने मुख्य रास्ते के पास एक दो जगह पर खुद से मोबाइल नंबर आदि डिस्पले किया है, ताकि कोई पर्यटक आए तो संपर्क करे, पर रिस्पांस न के बराबर है.

खरीदे गए थे ये सामान

  • रिमोट कंट्रोल सिस्टम व कैनोपी के साथ आठ सीटर वाला रेस्क्यू स्पीड बोट : 02

  • रेस्क्यू के लिए लाइफ बोट : 01

  • वाटर स्पोटर्स के लिए सेफ्टी जेकेट : 50

  • रेलिंग्स के साथ फ्लोटिग जैटी : 16 स्क्वायर मीटर

  • टेंडम कयाक : 02

  • वेहले ओरस : 02

  • योलो ओरस : 01

  • कयाक ओरस : 04

  • बिल्ज पंप : 02

  • ब्लास्ट हॉर्न : 02

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